
जगदीप धनखड़ ने इस्तीफे की ओर इशारा कर कही बस एक बात
पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने इस्तीफे की ओर इशारा करते हुए भी एक बात कही और फिर अंत में कहा कि समय की कमी की वजह से उनका गला पूरा खुल नहीं पाया।
पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ पद छोड़ने के करीब चार महीने बाद शुक्रवार को एक सार्वजनिक कार्यक्रम में भाषण देते नजर आए। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आरएसएस के संयुक्त महासचिव मनमोहन वैद्य की लिखी किताब 'हम और यह विश्व' का विमोचन करने के बाद धनखड़ ने कई ऐसी बातें कहीं जिससे ठहाके गूंज उठे। धनखड़ ने अपने इस्तीफे की ओर इशारा करते हुए भी एक बात कही और फिर अंत में कहा कि समय की कमी की वजह से उनका गला पूरा खुल नहीं पाया।

पूर्व उपराष्ट्रपति ने आरएसएस के विचारों और एक मजबूत राष्ट्र बनाने के दृष्टिकोण की प्रशंसा की। धार्मिक नेताओं और मीडिया से जुड़े जाने-माने लोगों की सभा को संबोधित करते हुए धनखड़ ने देश के भरोसे, सांस्कृतिक जड़ों और संस्थाओं की एकता को बनाए रखने की बात कही। संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने से कुछ घंटे पहले ही उनके इस्तीफे को मंजूरी मिली थी। इसके बाद उन्हें आखिरी बार सितंबर में नए उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन के शपथ ग्रहण समारोह में देखा गया था।
भाषण के बीच जब उन्हें एक शख्स ने नजदीक आकर विमान के समय की याद दिलाई तो धनखड़ ने कहा कि वह फ्लाइट पकड़ने के लिए अपना कर्तव्य नहीं छोड़ सकते हैं। उन्होंने कहा, 'संदेश आ गया, समय सीमा है। कितना समय है 7:30? मैं फ्लाइट पकड़ने की चिंता से अपने कर्तव्य नहीं छोड़ सकता।' पूर्व उपराष्ट्रपति ने मुस्कुराते हुए अपने इस्तीफे की ओर इशारा करते हुए कहा, 'मेरा हालिया अतीत इसका सबूत है।'
धनखड़ ने भाषण के अंत में यह भी इशारा किया कि वह अपने मन की पूरी बात नहीं कह सके। उन्होंने अपने चिर परिचित अंदाज में कहा, 'समय की वजह से पूरा गला खुल नहीं पाया। आजकल तो हिंदी के चलचित्र सिने पर बार-बार आती रहती हैं। आपके सामने फिर आने का सुअवसर मिलेगा।' पूर्व उपराष्ट्रपति के पहले भाषण पर पूरे देश की निगाहें थीं। ऐसा इसलिए कि उन्होंने भले ही स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर अपना पद छोड़ा, लेकिन राजनीतिक गलियारों में कई अटकलें लगाईं गईं। विपक्षी दलों के कई नेताओं ने यह स्थापित करने की कोशिश की कि सरकार से उनके मतभेद हो गए थे और इस्तीफे के लिए दबाव बनाया गया।





