
मैं कायर नहीं हूं, आत्महत्या नहीं कर सकती; इंदौर की महिला टीचर ने राष्ट्रपति से मांगी इच्छा मृत्यु
कुमारी चंद्रकांता जेठवानी गंभीर शारीरिक बीमारियों से जूझ रही हैं, लेकिन इसके बावजूद व्हीलचेयर की मदद से स्कूल जाती हैं और रोजाना 7-8 घंटे तक बच्चों को पढ़ाती हैं। उन्होंने अपनी सारी संपत्ति स्कूल के छह बच्चों को दान करने को कहा है।
इंदौर के सरकारी स्कूल की एक दिव्यांग टीचर ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से इच्छामृत्यु की अनुमति मांगी है। राष्ट्रपति से गुहार लगाने वाली महिला टीचर का नाम कुमारी चंद्रकांता जेठवानी है। जेठवानी गंभीर शारीरिक बीमारियों से जूझ रही हैं, लेकिन इसके बावजूद व्हीलचेयर की मदद से स्कूल जाती हैं और रोजाना 7-8 घंटे तक बच्चों को पढ़ाती हैं। उन्होंने अपनी सारी संपत्ति स्कूल के छह बच्चों को दान करने को कहा है।

लाइलाज बीमारी के बावजूद रोजाना 7-8 घंटे पढ़ातीं
रोजाना स्कूल जाना और बच्चों को पढ़ाना, शिक्षा को लेकर उनके अटूट समर्पण और ईमानदारी से निभाए जा रहे कर्तव्य को बताता है। वह रोजाना करीब 7-8 घंटे बच्चों को पढ़ाती हैं। लेकिन, कई गंभीर शारीरिक समस्याओं के चलते उन्हें काफी कष्ट झेलने पड़ते हैं। इस दर्द से छुटकारा पाने के खातिर दिव्यांग टीचर ने राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू से इच्छामृत्यु की मांग की है। उन्हें बच्चों से काफी लगाव है, इसके चलते टीचर ने अपनी सारी संपत्ति स्कूल के छह बच्चों के नाम करने की बात कही है।
गलत दवाई से हालत और भी खराब हो गई
दिव्यांग टीचर ने बताया कि मेरी फैमिली में कोई नहीं है और सभी काम खुद करने पड़ते हैं। उन्हें ओस्टियोजेनेसिस इंपरफेक्टा नामक बीमारी है। एक दुर्लभ और जन्मजात बीमारी है, जो हड्डियों को कमजोर और आसानी से टूटने वाला बना देती है।
उनका आरोप है कि साल 2020 में गलत इलाज के कारण उनके शरीर की हालत और भी ज्यादा खराब हो गई थी। दवाई के साइड इफेक्ट के चलते शरीर के और भी हिस्सों में समस्याएं हो गई थीं। तब से काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
कायर नहीं हूं, मैं आत्महत्या नहीं कर सकती
उन्होंने बताया कि मेरी हालत दिन प्रति दिन खराब हो रही है। उन्होंने हाथ जोड़कर राष्ट्रपति से विनती करते हुए कहा कि मैं आत्महत्या नहीं कर सकती हूं। मैं कायर नहीं हूं। इसलिए मुझे इच्छामृत्यु दी जाए। इच्छामृत्यु यानी दया मृत्यु इसे यूथेनेसिया (Euthanasia) भी कहते हैं। आगे जानिए इसका क्या मतलब होता है और इसको लेकर क्या नियम हैं…
जानिए क्या होती है इच्छा मृत्यु (यूथेनेसिया)
दया मृत्यु या इच्छामृत्यु यानी (यूथेनेसिया) ऐसी स्थिति में किसी इंसान की जान लेना जब वह व्यक्ति लाइलाज बीमारी से जूझ रहा हो। इस बीमारी के चलते उसे असहनीय दर्द होता हो और ठीक होने की कोई संभावना न हो। मगर डॉक्टर की सहमति और परामर्श भी जरूरी है।
जानिए इच्छा मृत्यु पर क्या कहता है कानून
भारत में एक्टिव यूथेनेसिया पूरी तरह गैर-कानूनी है। लेकिन पैसिव यूथेनेसिया को कुछ शर्तों के साथ सुप्रीम कोर्ट ने अनुमति दी है। इन शर्तों में उसी तरह की बातें शामिल हैं। जैसे मरीज को गंभीर, लाइलाज और स्थायी बीमारी हो। कोर्ट या मेडिकल बोर्ड की तरफ से मंजूरी मिल गई हो। इसके साथ ही मरीज की मर्जी (अगर होश में है) या लिविंग विल (यदि पहले से दी गई हो) की आवश्यकता होती है।



