राजा रघुवंशी मर्डर: जेल में ही रहेंगे राज कुशवाह और अन्य आरोपी, जमानत नामंजूर; कोर्ट से बोले- सोनम को मिली, हमें भी मिले
मुख्य आरोपी राज कुशवाह, विशाल सिंह चौहान, आकाश सिंह राजपूत और आनंद कुर्मी-चारों ने अपनी याचिकाओं में यह दलील दी कि सह-आरोपी सोनम रघुवंशी को पहले ही जमानत मिल चुकी है। ऐसे में समानता के आधार पर उन्हें भी राहत दी जानी चाहिए।

राजा रघुवंशी हत्याकांड में शिलॉन्ग सेशन कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी राज कुशवाह समेत चार आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। कोर्ट ने गुरुवार को फैसला सुनाया था, जबकि शुक्रवार को विस्तृत आदेश जारी किया गया।
अदालत ने साफ किया कि सह-आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत का लाभ बाकी आरोपियों को स्वतः नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने ट्रायल में देरी, गिरफ्तारी प्रक्रिया में कथित खामियों और लंबी जेल अवधि जैसे सभी तर्कों को राहत के लिए पर्याप्त नहीं माना। कानूनी जानकारों के मुताबिक, इस आदेश के बाद फिलहाल चारों आरोपियों के लिए जेल से बाहर आने की राह बेहद कठिन हो गई है।
किन आधारों पर मांगी गई थी जमानत?
राज की बेल रिजेक्ट: राज के वकील ने तर्क दिया कि इसी मामले की एक अन्य मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को जमानत मिल चुकी है, इसलिए राज को भी जमानत मिलनी चाहिए, क्योंकि दोनों की भूमिका समान है। मामले में कुल 90 गवाह हैं, जिनमें से अभी तक सिर्फ 4 की गवाही हुई है। ऐसे में ट्रायल खत्म होने में काफी समय लगेगा। वकील का कहना था कि राज घटनास्थल पर मौजूद नहीं था, उसके पास से कोई हथियार बरामद नहीं हुआ और उसे सिर्फ साजिश के शक में फंसाया गया है। इतनी लंबी कैद अनुच्छेद 21 (जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन है।
विशाल सिंह चौहान: वकील ने तर्क दिया कि इसी मामले की एक अन्य आरोपी सोनम रघुवंशी को अदालत पहले ही जमानत दे चुकी है। चूंकि विशाल की भूमिका भी वैसी ही है, इसलिए उसे भी जमानत मिलनी चाहिए। वकील का कहना था कि विशाल घटनास्थल पर मौजूद नहीं था और उसे केवल साजिश के आधार पर फंसाया गया है, जिसके लिए कोई ठोस सबूत नहीं है। मामले में 90 गवाह हैं और अभी तक केवल 4 की ही गवाही हुई है, जिससे ट्रायल पूरा होने में काफी समय लगेगा।
आकाश सिंह राजपूत: वकील ने तर्क दिया कि आरोपी लंबे समय से जेल में है और इतने लंबे समय तक जेल में रखना उसके मौलिक अधिकारों (अनुच्छेद 21) का उल्लंघन है। आरोपी के खिलाफ कोई सीधा सबूत नहीं है और न ही उसके पास से कोई हथियार मिला है। वकील ने "समानता" का हवाला देते हुए कहा कि इसी मामले की एक अन्य आरोपी सोनम रघुवंशी को जमानत मिल चुकी है, इसलिए आकाश को भी जमानत मिलनी चाहिए।
आनंद कुर्मी: वकील ने दलील दी कि आरोपी काफी समय से जेल में है, जो उसके अधिकारों का उल्लंघन है। उसके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है। एक अन्य मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को जमानत मिल चुकी है, इसलिए समानता के आधार पर आनंद को भी जमानत मिलनी चाहिए।
“सोनम को बेल मिली, हमें भी मिले”
मुख्य आरोपी राज कुशवाह, विशाल सिंह चौहान, आकाश सिंह राजपूत और आनंद कुर्मी-चारों ने अपनी याचिकाओं में यह दलील दी कि सह-आरोपी सोनम रघुवंशी को पहले ही जमानत मिल चुकी है। ऐसे में समानता के आधार पर उन्हें भी राहत दी जानी चाहिए। हालांकि कोर्ट ने माना कि हर आरोपी की भूमिका अलग-अलग परिस्थितियों में परखी जाती है और केवल “पैरिटी” जमानत का स्वतः आधार नहीं बन सकती।
ट्रायल लंबा चलेगा, इसलिए बेल मिले
बचाव पक्ष ने कोर्ट को बताया कि मामले में करीब 90 गवाह हैं, लेकिन अब तक केवल चार की गवाही हुई है। ऐसे में मुकदमे के जल्द खत्म होने की संभावना नहीं है। वकीलों ने तर्क दिया कि लंबे समय तक जेल में रखना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है।
घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे आरोपी
राज कुशवाह और विशाल सिंह चौहान की ओर से कहा गया कि वे वारदात के वक्त घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे। बचाव पक्ष ने दावा किया कि आरोपियों के पास से कोई हथियार भी बरामद नहीं हुआ और उन्हें केवल कथित साजिश के आधार पर आरोपी बनाया गया है। आकाश और आनंद की ओर से भी प्रत्यक्ष सबूतों के अभाव की दलील दी गई।
गिरफ्तारी प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल
चारों आरोपियों की ओर से यह भी कहा गया कि गिरफ्तारी के दौरान उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई। बचाव पक्ष ने दावा किया कि गिरफ्तारी के कारण स्पष्ट रूप से नहीं बताए गए। लेकिन कोर्ट ने इन सभी दलीलों को खारिज करते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।
राज कुशवाह को दूसरी बार झटका
मुख्य आरोपी राज कुशवाह पहले भी बेल की कोशिश कर चुका है। उसकी पिछली जमानत याचिका भी कोर्ट खारिज कर चुकी थी। अब दूसरी बार भी राहत नहीं मिलने से उसकी कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
सोनम की जमानत पर भी संकट
इधर, आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत अब हाईकोर्ट में चुनौती के घेरे में है। मेघालय सरकार ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अपील दायर की है। सरकार का कहना है कि बेल से जांच और ट्रायल प्रभावित हो सकता है। मामले में 12 मई को हाईकोर्ट में सुनवाई प्रस्तावित है
रिपोर्ट -हेमंत
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