बीमारी ने छीन ली थी रोशनी, इंदौर के अक्षत ने कैसे UPSC में हासिल किया 173वां स्थान?

Mar 07, 2026 09:34 am ISTKrishna Bihari Singh भाषा, इंदौर
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इंदौर के 25 वर्षीय दृष्टिबाधित अक्षत बल्दवा ने पहले ही प्रयास में यूपीएससी परीक्षा में 173वीं रैंक हासिल कर मिसाल कायम की है। बचपन से देख पाने में असमर्थ अक्षत ने अपनी चुनौतियों को बाधा नहीं बनने दिया। 

बीमारी ने छीन ली थी रोशनी, इंदौर के अक्षत ने कैसे UPSC में हासिल किया 173वां स्थान?

इंदौर के 25 साल के दृष्टिबाधित अक्षत बल्दवा ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति की बदौलत पहले ही प्रयास में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास कर 173वीं रैंक हासिल की है। मात्र डेढ़ महीने की उम्र में आंखों की रोशनी खो देने वाले अक्षत ने कभी शारीरिक चुनौती को बाधा नहीं बनने दिया। उन्होंने बेंगलुरु से बीए-एलएलबी की पढ़ाई की। उन्होंने 11वीं से ही प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना देखा था। अक्षत अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां को देते हैं जिन्होंने पढ़ाई के दौरान उनका साथ दिया। अक्षत की यह उपलब्धि बताती है कि कठिन चुनौतियों के बावजूद सही सोच और मेहनत से बड़े लक्ष्य पाए जा सकते हैं।

बेंगलुरु से की बीए-एलएलबी

इंदौर के अक्षत बल्दवा बचपन से देख नहीं सकते हैं। बल्दवा ने बेंगलुरु की नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी से बीए-एलएलबी (ऑनर्स) की उपाधि हासिल की है। वह इन दिनों कर्नाटक की राजधानी में ही रह रहे हैं।

11वीं में ही साधा लक्ष्य

अक्षत बल्दवा बताते हैं कि वह जब 11वीं में पढ़ रहे थे तभी तय कर लिया था कि एक दिन सिविल सेवा परीक्षा में सफल होना है। पहले ही प्रयास में परीक्षा में मिली कामयाबी ने उनको सुखद आश्चर्य से भर दिया है। उन्होंने कहा कि मैं इस पल को महसूस कर पा रहा हूं।

गंभीर बीमारी ने बचपन में छीन ली रोशनी

अक्षत बल्दवा के मुताबिक डेढ़ माह की उम्र में एक गंभीर बीमारी के कारण उनकी आंखों की रोशनी चली गई थी। वह 100 फीसदी दृष्टिबाधित हैं।

नहीं बनना भीड़ का हिस्सा

अक्षत बल्दवा कहते हैं कि मुझे भीड़ का हिस्सा नहीं बनना है। मुझे बड़े लक्ष्य हासिल करने हैं। मेरे सामने हमेशा से चुनौतियां रही हैं लेकिन मैं चुनौतियों के बारे में नहीं वरन इनसे निपटने के तरीकों के बारे में सोचता हूं।

साए की तरह मदद करती रहीं मां

उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा में मिली इस कामयाबी के पीछे मां मीना देवी का योगदान बताया। सबसे बड़ा योगदान मां का है। बेंगलुरु में मेरी पढ़ाई के दौरान मां परिवार को छोड़कर मेरे साथ रहीं और मेरी मदद करती रहीं।

बचपन से पढ़ने का जुनून

UPSC के नतीजे आने के बाद इंदौर में अक्षत बल्दवा के घर पर जश्न का माहौल देखा गया। उनके पिता संजय बल्दवा ने सफलता के राज के बारे में बताते हुए कहा कि अक्षत पढ़ाई को लेकर बचपन से जुनूनी रहा है। इसी पढ़ने के जुनून के कारण उसे यह सफलता मिली है। सिविल सेवा परीक्षा में मिली सफलता ने हमें गर्व से भर दिया है। अक्षत को संगीत का भी शौक है। इसी संगीत के शौक के कारण अक्षत ने तबला और हारमोनियम बजाना भी सीखा है।

Krishna Bihari Singh

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Krishna Bihari Singh

कृष्ण बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम का हिस्सा (दिल्ली-NCR, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और गुजरात )


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कृष्ण बिहारी सिंह पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। कृष्ण बिहारी सिंह लाइव हिन्दुस्तान में कार्यरत हैं। वह स्टेट टीम के साथ काम कर रहे हैं। कृष्ण बिहारी सिंह भारतीय मीडिया जगत में केबी उपनाम से चर्चित हैं। यूपी के मऊ जिले से ताल्लुक रखने वाले केबी महाराष्ट्र और हरियाणा में पत्रकारिता कर चुके हैं। मौजूदा वक्त में वह दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय हैं।


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शैक्षणिक पृष्ठभूमि: लॉ (एलएलबी) और साइंस (बी.एससी, बायोलॉजी) से ग्रेजुएट कृष्ण बिहारी सिंह ने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए और एमफिल किया है। कृष्ण बिहारी सिंह भारतीय राजनीति और वैश्विक मामलों के साथ विधि विषय की गहरी समझ रखते हैं। अखबार से लेकर टेलीविजन और अब डिजिटल मीडिया के बदलावों के साक्षी रहे कृष्ण बिहारी सिंह पाठकों की पसंद और बदलते ट्रेंड को बारीकी से समझते हैं।

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