इंदौर के भागीरथपुरा के 30% हिस्से में साफ पानी पहुंचाने का दावा, मेयर ने पीकर भी दिखाया

Jan 16, 2026 08:10 pm ISTSubodh Kumar Mishra भाषा, इंदौर
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इंदौर प्रशासन ने दावा किया कि उसने नगर निगम की पाइपलाइन को दुरुस्त करते हुए भागीरथपुरा के करीब 30 प्रतिशत हिस्से में साफ पानी पहुंचाने की व्यवस्था बहाल कर दी है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने दुरुस्त किए गए पाइपलाइन से जुड़े नलों के जरिये घरों में आने वाला पानी पीकर भी दिखाया।

इंदौर के भागीरथपुरा के 30% हिस्से में साफ पानी पहुंचाने का दावा, मेयर ने पीकर भी दिखाया

इंदौर प्रशासन ने दावा किया कि उसने नगर निगम की पाइपलाइन को दुरुस्त करते हुए भागीरथपुरा के करीब 30 प्रतिशत हिस्से में साफ पानी पहुंचाने की व्यवस्था बहाल कर दी है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने दुरुस्त किए गए पाइपलाइन से जुड़े नलों के जरिये घरों में आने वाला पानी पीकर दिखाया और कहा कि यह शुद्ध है। बता दें कि मध्य प्रदेश के इंदौर का भागीरथपुरा इलाका दूषित पेयजल पीने के कारण फैले उल्टी-दस्त के प्रकोप से कई लोगों की मौत को लेकर सुर्खियों में है।

पानी के कई नमूने लिए गए

इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने शुक्रवार को वाटर सप्लाई की स्थिति जानने के लिए भागीरथपुरा क्षेत्र का दौरा किया। उन्होंने कहा कि सुधार कार्यों के बाद पिछले तीन दिनों के दौरान भागीरथपुरा में नगर निगम की पाइपलाइन से जलापूर्ति करके पानी के कई नमूने लिए गए और जांच में पानी साफ पाया गया। खुद महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भागीरथपुरा में इस पाइपलाइन से जुड़े नलों के जरिये घरों में आने वाला पानी पीकर दिखाया और कहा कि यह शुद्ध है।

15000 लोगों को मिलेगा फायदा

भार्गव ने कहा कि सभी जांचों में पेयजल सुरक्षित पाए जाने के बाद भागीरथपुरा के लगभग 30 प्रतिशत हिस्से में नगर निगम की पाइपलाइन के जरिए पानी की सप्लाई बहाल कर दी गई है। इस हिस्से में लगभग 15000 लोग रहते हैं। इंदौर अपनी पानी की जरूरतों के लिए नर्मदा नदी पर निर्भर है। नगर निगम की बिछाई गई पाइपलाइन के जरिए नर्मदा नदी के पानी को पड़ोसी खरगोन जिले के जलूद से 80 किलोमीटर दूर इंदौर लाकर घर-घर पहुंचाया जाता है।

दिसंबर के आखिर में शुरू हुआ था बीमारी का प्रकोप

भागीरथपुरा में दूषित पेयजल पीने से लोगों के बीमार पड़ने का सिलसिला दिसंबर के आखिर में शुरू हुआ था। स्थानीय लोगों ने इस प्रकोप से अब तक 24 लोगों के दम तोड़ने का दावा किया है। मृतकों के आंकड़े को लेकर विरोधाभासी दावों के बीच राज्य सरकार ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ में गुरुवार को पेश स्थिति रिपोर्ट में भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त प्रकोप के दौरान पांच माह के बालक समेत 7 लोगों की मौत का जिक्र किया है।

21 लोगों को दो-दो लाख का मुआवजा

प्रशासन ने भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त का प्रकोप शुरू होने के बाद जान गंवाने वाले 21 लोगों को दो-दो लाख रुपए का मुआवजा दिया है। अधिकारियों का दावा है कि इनमें से कुछ लोगों की मौत दूसरी बीमारियों और अन्य कारणों से भी हुई है, लेकिन सभी मृतकों के परिवारों को मानवीय आधार पर आर्थिक सहायता दी जा रही है।

इस बीच, शहर के शासकीय महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय की एक समिति की 'डेथ ऑडिट' की रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि भागीरथपुरा के 15 लोगों की मौत दूषित पानी के प्रकोप से किसी न किसी तरह जुड़ी हो सकती है।

Subodh Kumar Mishra

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सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।

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