
मुझे अफसोस रहेगा कि मैं...; धार्मिक कट्टरता बढ़ाने के आरोप से बरी होने के बाद पूर्व प्रिंसिपल डॉ. इनामुर्रहमान
मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग ने शुक्रवार को इंदौर के एक लॉ कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल को तीन साल पुराने मामले में बरी कर दिया है। उन पर कॉलेज में धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा देने का आरोप था। पूर्व प्रिंसिपल ने कहा कि यह राहत उन्हें हुई अपार मानसिक पीड़ा की भरपाई नहीं कर सकती।
मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग ने शुक्रवार को इंदौर के एक लॉ कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल को तीन साल पुराने मामले में बरी कर दिया है। उन पर कॉलेज में धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा देने का आरोप था। पूर्व प्रिंसिपल डॉ. इनामुर्रहमान ने कहा कि यह राहत उन निराधार आरोपों के कारण उन्हें हुई अपार मानसिक पीड़ा की भरपाई नहीं कर सकती।
अधिकारियों के अनुसार, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के सदस्यों ने 1 दिसंबर 2022 को शहर के सरकारी न्यू लॉ कॉलेज के प्रशासन और कुछ प्रोफेसरों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि शिकायत में कॉलेज में धार्मिक कट्टरवाद को बढ़ावा देने, पक्षपातपूर्ण व्यवहार करने, सामाजिक सद्भाव और मेलजोल को भंग करने और सरकारी नीतियों के बारे में छात्रों को गुमराह करने के आरोप शामिल थे।
इन आरोपों पर हुए हंगामे के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने 9 दिसंबर 2022 को डॉ. इनामुर्रहमान को सस्पेंड कर दिया। विभागीय जांच में उन पर कॉलेज में सामाजिक सद्भाव और सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने में लापरवाही बरतने और शिक्षकों द्वारा अनुशासनहीनता को रोकने के लिए आवश्यक कदम न उठाने का आरोप लगाया गया।
हालांकि, इस साल 8 दिसंबर को जारी एक आदेश में उच्च शिक्षा विभाग ने कहा कि गवाहों के बयानों और पर्याप्त रिकॉर्ड की कमी के कारण आरोप साबित नहीं हो सके। अधिकारियों ने बताया कि इसके कारण डॉ. इनामुर्रहमान के खिलाफ विभागीय जांच खत्म करने और उनकी निलंबन अवधि को कार्य अवधि के रूप में मानने का प्रशासनिक निर्णय लिया गया।
डॉ. इनामुर्रहमान 31 मई 2024 को सेवानिवृत्त हुए। उस समय वह सस्पेंड थे। उन्होंने पीटीआई से कहा कि विभागीय जांच में मुझे निर्दोष घोषित करने का निर्णय मेरी सेवानिवृत्ति के डेढ़ साल बाद लिया गया है। यह उन निराधार आरोपों पर निलंबित किए जाने के बाद मुझे हुई अपार मानसिक पीड़ा की भरपाई नहीं कर सकता।
लॉ कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल ने तीन साल पहले संस्थान में उठे विवाद पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। कहा कि यदि विभागीय जांच में दोषमुक्त होने के बाद सेवानिवृत्ति से पहले मैं काम पर लौट आता तो मैं कॉलेज के छात्रों के कल्याण के लिए बनाई गई योजनाओं को लागू कर सकता था। मुझे हमेशा इस बात का अफसोस रहेगा कि मैं ऐसा नहीं कर सका।
एबीवीपी की शिकायत के आधार पर पुलिस ने पूर्व प्रिंसिपल और अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 153-ए (धर्म के आधार पर दो समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना), 295-ए (जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य, जिसका उद्देश्य किसी भी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना हो) और अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। सुप्रीम कोर्ट ने 14 मई 2024 को इस एफआईआर को रद्द कर दिया था।





