‘मैं उस दिन यहां होता तो…’; इंदौर अग्निकांड पर 20 साल पुराने ड्राइवर ने मनोज पुगलिया के बारे में क्या बताया

लाइव हिन्दुस्तान, इंदौर
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इंदौर के भीषण अग्निकांड में जान गंवाने वाले उद्योगपति मनोज पुगलिया की जिंदगी से जुड़े कई ऐसे पहलू सामने आए हैं, जो उनके शौक और रुतबे की कहानी बयां करते हैं। करीब 20 वर्षों से मनोज पुगलिया के साथ रहे उनके ड्राइवर संदीप बताते हैं कि मनोज को सोना पहनने का खास शौक था।

‘मैं उस दिन यहां होता तो…’; इंदौर अग्निकांड पर 20 साल पुराने ड्राइवर ने मनोज पुगलिया के बारे में क्या बताया

इंदौर के भीषण अग्निकांड में जान गंवाने वाले उद्योगपति मनोज पुगलिया की जिंदगी से जुड़े कई ऐसे पहलू सामने आए हैं, जो उनके शौक और रुतबे की कहानी बयां करते हैं। करीब 20 वर्षों से मनोज पुगलिया के साथ रहे उनके ड्राइवर संदीप बताते हैं कि मनोज को सोना पहनने का खास शौक था। वे पांचों उंगलियों में हीरे जड़ी अंगूठियां पहनते थे। उनकी जीवनशैली में शानो-शौकत झलकती थी। यहां तक कि घुटने के ऑपरेशन के दौरान उन्होंने मजाक में डॉक्टरों से कहा था कि “घुटना भी सोने का ही लगाना।” ड्राइवर का दावा है कि यदि वो उस दिन अपने गांव नहीं जाता तो अपने मालिक और उनके परिवार को बचा लेता, लेकिन होनी को कुछ और मंजूर था।

संदीप के मुताबिक, हाल ही में जनवरी में बेटे सौमिल की शादी से पहले घर में बड़े स्तर पर फर्नीचर और पीओपी का काम कराया गया था, वहीं छत पर बेटों के लिए जिम भी तैयार करवाया गया था। लेकिन बुधवार तड़के लगी आग ने इन सभी सपनों और तैयारियों को राख में बदल दिया।

रिश्तेदारों के यहां रुके हैं पीड़ित परिवार के बचे सदस्य

इस दर्दनाक हादसे के बाद परिवार के बचे सदस्य— बेटे सौरभ, सौमिल, हर्षित, पत्नी सुनीता और छोटी बहू सखी—अब अपने ही जले हुए घर के आसपास नया आशियाना तलाश रहे हैं। फिलहाल यह परिवार रिश्तेदारों के यहां ठहरा हुआ है, लेकिन उनकी इच्छा है कि वे ब्रजेश्वरी (एनएक्स) इलाके को छोड़कर कहीं और न जाएं।

परिवार ने चादर से ढंकी जले हुए घर की खिड़कियां

ड्राइवर संदीप ने बताया कि मनोज पुगलिया की चार कारें घर के सामने खाली प्लॉट में अब भी खड़ी हैं, लेकिन आग में चाबियां जल जाने के कारण वे स्टार्ट नहीं हो पा रहीं। परिवार चाहता है कि पुलिस की अनुमति मिलते ही वे चाबियां ढूंढकर कारों को वहां से हटाएं। हादसे के बाद से इलाके में लोगों की भीड़ लगी रहती है, हर कोई इस त्रासदी को करीब से देखने और समझने की कोशिश कर रहा है। जब भी परिवार के बच्चे मकान देखने आते हैं, वहां लोगों का जमावड़ा लग जाता है। शनिवार को बच्चों के दोस्तों ने मकान की खिड़कियों को चादर से ढंक दिया, ताकि भीतर का मंजर नजर न आए।

इंदौर से नेपाल तक फैला मनोज का कारोबार

मनोज पुगलिया की संघर्ष भरी यात्रा भी कम प्रेरणादायक नहीं थी। किशनगंज में कुछ समय बिताने के बाद वे इंदौर आए और रबड़ के कारोबार की शुरुआत की। कड़ी मेहनत और लगन से उन्होंने अपना व्यवसाय बिहार से लेकर नेपाल तक फैला दिया और शहर में तिलक नगर व ब्रजेश्वरी (एनएक्स) सहित जगह तीन मकान खड़े किए। उन्हें घर सजाने का भी खास शौक था और वे हर साल अपने मकानों का रिनोवेशन करवाते थे। राजस्थान के सादलगढ़ से 35 साल पहले सपनों की तलाश में निकले मनोज ने जो साम्राज्य खड़ा किया था, वह एक ही रात में खाक हो गया।

अब उसी घर की राख के बीच खड़ा यह परिवार एक नई शुरुआत की तलाश में है, लेकिन दर्द इतना गहरा है कि वे उस इलाके को छोड़ने को तैयार नहीं, जहां उनकी यादें बसी हैं। वहीं, इस हादसे के बाद मनोज पुगलिया की पत्नी सुनीता की तबीयत फिर बिगड़ गई है और उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

रिपोर्ट : हेमंत

Praveen Sharma

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प्रवीण शर्मा लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम का हिस्सा हैं। एक दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे प्रवीण साल 2014 में डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले प्रिंट मीडिया में भी काम कर चुके हैं। प्रवीण ने अपने करियर की शुरुआत हरिभूमि अखबार से की थी और वर्ष 2018 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। प्रवीण मूलरूप से उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के निवासी हैं, लेकिन इनका जन्म और स्कूली शिक्षा दिल्ली से हुई है। हालांकि, पत्रकारिता की पढ़ाई इन्होंने हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से की है। वह दिल्ली-एनसीआर की सियासी घटनाओं के साथ ही जन सरोकार से जुड़ी सभी छोटी-बड़ी खबरों पर भी पैनी नजर रखते हैं। और पढ़ें
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