ASI रिपोर्ट ने कैसे सुलझाई भोजशाला की एतिहासिक गुत्थी, सबूत जिन्हें देख HC ने मस्जिद नहीं माना मंदिर

By Mohit
लाइव हिन्दुस्तान, धार
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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की सर्वे रिपोर्ट हाई कोर्ट के इस एतिहासिक फैसले का आधार बनी। सर्वे रिपोर्ट में कहा गया था कि विवादित परिसर में कई ऐसे साक्ष्य हैं जो कि मंदिर होने की पुष्टि करते हैं।

ASI रिपोर्ट ने कैसे सुलझाई भोजशाला की एतिहासिक गुत्थी, सबूत जिन्हें देख HC ने मस्जिद नहीं माना मंदिर

मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर विवाद पर शुक्रवार को फैसला सुना दिया। हाईकोर्ट ने धार में भोजशाला को हिंदू मंदिर करार दिया है। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद हिंदू पक्ष की जीत हुई है तो वहीं मुस्लिम पक्ष फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी में है।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की सर्वे रिपोर्ट हाई कोर्ट के इस एतिहासिक फैसले का आधार बनी। सर्वे रिपोर्ट में कहा गया था कि विवादित परिसर में कई ऐसे साक्ष्य हैं जो कि मंदिर होने की पुष्टि करते हैं। हाईकोर्ट के 11 मार्च 2024 के आदेश के बाद ही, एएसआई ने 22 मार्च से भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर का वैज्ञानिक सर्वे शुरू किया था। 15 जुलाई 2024 को कोर्ट में विस्तृत रिपोर्ट सौंपी दी गई थी।

सर्वे से पुख्ता किए हिंदू पक्ष के दावे

98 दिन चले इस सर्वे में 188 स्तंभों के साथ-साथ कई मूर्तियां, प्राचीन तांबे के सिक्के और शिलालेख मिलने की पुष्टि की गई थी, जिसे कोर्ट ने फैसले का अहम आधार माना है। इस रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा ढांचे के निर्माण से पहले वहां परमार राजाओं के काल की एक विशाल हिंदू संरचना विद्यमान थी।

सर्वे में और क्या-क्या सामने आया?

सर्वे के दौरान दीवारों और शिलाखंडों पर संस्कृत और देवनागरी लिपि में लिखे मिले, जिनमें विशेष रूप से मां सरस्वती और विद्या का उल्लेख है। सर्वे में इन्हें परमार काल का बताया गया। सर्वे रिपोर्ट कहा गया कि, परिसर में मौजूद ढांचे की वास्तुकला पूरी तरह मंदिर शैली पर आधारित है, जिसकी नक्काशी और डिजाइन हिंदू मंदिरों के समान है। खुदाई और जांच में भगवान शिव, विष्णु, गणेश, वासुकी नाग और कुबेर की प्रतिमाओं के अवशेष भी मिले, साथ ही स्तंभों पर स्पष्ट रूप से हिंदू धार्मिक प्रतीक और कलाकृतियां अंकित पाई गईं।

मुस्लिम पक्ष ने सर्वे को नकार दिया था

मुस्लिम पक्ष ने एएसआई की सर्वे रिपोर्ट पर भी सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए थे। मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट के सामने दावा किया था कि एएसआई की सर्वे रिपोर्ट ‘पक्षपातपूर्ण’ और इसे हिंदू याचिकाकर्ताओं के दावों का समर्थन करने मकसद से तैयार की गई।

अब नमाज अदा करने पर भी रोक

आपको बता दें कि यह विवादित परिसर एएसआई के संरक्षण में है। साल 2003 से भोजशाला में हर मंगलवार और वसंत पंचमी पर हिंदू समाज को पूजा करने की अनुमति है तो शुक्रवार को मुस्लिम समाज को नमाज की अनुमति दी जाती रही है। मगर कोर्ट ने अब परिसर में नमाज अदा करने पर भी रोक लगा दी है। 11वीं सदी के इस स्मारक पर हिंदू और मुस्लिम समुदाय लंबे समय से दावा करते रहे हैं। हिंदू समुदाय भोजशाला को वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है। हिंदू पक्ष का दावा है कि यहां पहले मंदिर था जिसे बाद में तोड़कर मस्जिद का निर्माण कर लिया गया था।

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