MP में जिस अस्पताल का लाइसेंस कैंसल; फ्री इलाज का वादा कर मरीज भर्ती किए; जानवरों जैसा सलूक
बुरहानपुर में गुड अस्पताल पर गंभीर आरोप लगे हैं। गंभीर खामियों के चलते अस्पताल का लाइसेंस एक माह के लिए कैंसल किया गया था। लेकिन आरोप है कि फ्री इलाज का वादा कर मरीज भर्ती किए जा रहे हैं।

मध्य प्रदेश में बुरहानपुर में हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां गुड नामक हॉस्पिटल को स्वास्थ्य विभाग ने भंयकर खामियों के चलते एक माह के लिए बंद कर दिया था। लाइसेंस अस्थायी रूप से कैंसल कर दिया था और सख्त निर्देश दिए थे कि तब तक मरीजों को भर्ती नहीं किया जाएगा। हालांकि अस्पताल में प्रबंधन को इससे कोई फर्क नहीं पड़ा। फ्री इलाज का वादा कर मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। तीमारदारों का आरोप है कि मरीजों के साथ जानवरों जैसा सलूक हो रहा है। एक छोटे से कमरे में जमीन में एक साथ कई मरीजों को लेटाकर ड्रिप लगाई जा रही है।
अस्पताल में एडमिट हो रहे मरीजों के परिजनों का आरोप है कि उन्हें पहले मुफ्त इलाज का भरोसा दिया गया, लेकिन बाद में आयुष्मान कार्ड लाने के लिए कहा गया। परिजनों का कहना है कि उन्हें झूठे आश्वासन देकर अस्पताल में भर्ती किया गया।
जमीन पर लेटाकर उपचार, जबरन डिस्चार्ज नहीं कर रहे
खंडवा क्षेत्र से आए मरीजों ने आरोप लगाया कि उन्हें छोटे कमरों में जमीन पर लिटाकर उपचार किया जा रहा है। वहीं 5 जून से भर्ती मरीजों को केवल आईवी लगाकर इलाज किए जाने की शिकायत भी सामने आई है। मरीजों का कहना है कि छुट्टी मांगने पर भी उन्हें कई दिनों तक डिस्चार्ज नहीं किया गया।
छोटी सी बीमारी को गंभीर बता लाखों के बिल
मरीज के परिजन सुमित वारूडे ने आरोप लगाया कि छोटी बीमारी को गंभीर बताकर आयुष्मान योजना के तहत लाखों रुपये के बिल निकाले जा रहे हैं। उनका कहना है कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा मरीजों को गुमराह कर भर्ती किया जा रहा है।
अस्पताल प्रबंधन का क्या कहना है
मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। अस्पताल के डायरेक्टर विनोद सुगंधी का कहना है कि अस्पताल में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं और आयुष्मान योजना के तहत नियमों के अनुसार उपचार किया जा रहा है।
सीएमएचओ बोले- जांच के बाद ऐक्शन लेंगे
उधर सीएमएचओ डॉ. राजेंद्र वर्मा ने स्वीकार किया कि अस्पताल का अस्थायी लाइसेंस एक माह के लिए निरस्त किया गया था और मरीज भर्ती नहीं करने के निर्देश भी दिए गए थे। उन्होंने कहा कि यदि आदेशों का पालन नहीं किया गया है तो अस्पताल की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
एक तरफ मरीज और परिजन अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं, तो दूसरी तरफ अस्पताल संचालक इन आरोपों को बेबुनियाद बता रहे हैं। अब सभी की नजर स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर टिकी है कि आखिर नियमों की अनदेखी के इन आरोपों की जांच में क्या सच सामने आता है।
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