अपराध गंभीर है...; ट्विशा की सास गिरिबाला को राहत नहीं दे सकते, हाई कोर्ट ने गिनाईं कई वजहें
ट्विशा शर्मा की मौत मामले में सास गिरिबाला को एमपी हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली। हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कई वजहों का जिक्र किया कि क्यों गिरिबाला को अग्रिम जमानत नहीं मिल सकती।

ट्विशा शर्मा की मौत मामले में अब उनकी सास और रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। इससे पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार देर रात सुनवाई करते हुए कई वजहें बताई कि रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत क्यों नहीं मिल सकती? अदालत ने तल्ख टिप्पणी भी की कि उन्होंने जांच में सहयोग नहीं किया और अपराध बेहद गंभीर हैं। गिरिबाला सिंह अपनी बहू ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में आरोपी हैं।
जस्टिस देवनारायण मिश्रा की सिंगल बेंच ने कहा कि ट्विशा की मौत मामले में उन पर लगातार गंभीर आरोप लगे हैं। आरोपी जांच एजेंसी का सहयोग नहीं कर रही थीं। अपराध भी गंभीर प्रकृति का है। अदालत ने यह भी कहा कि भोपाल की ट्रायल कोर्ट ने कई अहम सबूतों पर ध्यान नहीं दिया था। इससे पहले 15 मई को भोपाल की जिला अदालत ने गिरिबाला को अग्रिम जमानत दी थी, लेकिन हाई कोर्ट ने जिला अदालत के फैसले को पलट दिया।
जांच में सहयोग नहीं करने का आरोप
हाईकोर्ट ने कहा कि जमानत मिलने के बाद भी गिरिबाला सिंह जांच एजेंसी के साथ सहयोग नहीं कर रही थीं। बयान दर्ज कराने के लिए उन्हें कई बार नोटिस भेजे गए, लेकिन उन्होंने सहयोग नहीं किया। सुनवाई के दौरान एमपी सरकार की ओर से पेश एडवोकेट जनरल प्रशांत सिंह ने कहा कि पांच बार नोटिस दिए गए, लेकिन आरोपी पक्ष ने नोटिस लेने से भी इनकार कर दिया। बाद में नोटिस व्हाट्सऐप से भेजने पड़े।
व्हाट्सऐप चैट और गर्भपात का जिक्र
हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने व्हाट्सऐप चैट जैसे अहम सबूतों पर विचार नहीं किया। अदालत ने कहा कि आरोप सिर्फ समर्थ सिंह पर नहीं हैं। अदालत ने कहा कि ट्विशा गर्भवती हुई थीं और दो महीने के अंदर गर्भपात हो गया था। ट्विशा के परिवारवालों ने आरोप लगाया है कि उन पर दबाव बनाया गया। वहीं गिरिबाला सिंह का कहना था कि ट्विशा खुद गर्भपात चाहती थीं।
पैसों के लेनदेन पर कोर्ट की टिप्पणी
गिरिबाला सिंह की ओर से कहा गया था कि उन्होंने ट्विशा के खाते में पैसे भेजे थे, इसलिए दहेज मांग का आरोप गलत है। इस पर अदालत ने कहा कि शादी दिसंबर 2025 में हुई थी और पैसे अक्टूबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच भेजे गए थे। मौत के करीब कोई रकम ट्रांसफर नहीं हुई थी। अदालत ने कहा कि सिर्फ पैसे भेजने से यह साबित नहीं होता कि दहेज की मांग नहीं थी।
शरीर पर चोटों का जिक्र
हाईकोर्ट ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का भी जिक्र किया। रिपोर्ट में मौत का कारण फांसी बताया गया है। लेकिन शरीर पर छह और चोटों के निशान भी मिले थे। इनमें चार चोटें बाएं हाथ पर, एक उंगली में और एक सिर पर थी। अदालत ने कहा कि जांच रिपोर्ट के अनुसार ये चोटें शव उतारने या अस्पताल ले जाने के दौरान नहीं लगी थीं।
सबूतों से छेड़छाड़ के आरोप
ट्विशा के परिवार के वकीलों ने आरोप लगाया कि गिरिबाला सिंह ने अपने अनुभव का इस्तेमाल कर क्राइम सीन से छेड़छाड़ की कोशिश की। वकीलों ने बताया कि पुलिस ने 13 मई को घर का सीसीटीवी फुटेज जब्त किया था। आरोप है कि गिरिबाला सिंह के पास घटना का वीडियो था और उन्होंने सोशल मीडिया पर उसका छोटा हिस्सा जारी किया ताकि जांच प्रभावित हो सके।
चरित्र पर सवाल उठाया
परिवार के वकील अंकुर पांडे ने अदालत में कहा कि गिरिबाला सिंह ने ट्विशा के चरित्र पर सवाल उठाने की कोशिश की। उन्होंने जांच में भी सहयोग नहीं किया। सीबीआई के वकील ने भी अदालत में कहा कि ट्विशा के गर्भवती होने के बाद पति और सास उनके चरित्र पर शक करते थे और गर्भपात के लिए दबाव डालते थे।
गिरिबाला के कई बयानों पर विवाद
ट्विशा की मौत के बाद गिरिबाला सिंह के कई बयान चर्चा में रहे। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि ट्विशा शादी से पहले पौधों से प्यार करने की बात कहती थीं, लेकिन शादी के बाद पौधों को पानी तक नहीं देती थीं। इस बयान को लेकर भी सोशल मीडिया पर काफी विवाद हुआ था।
ट्विशा शर्मा की मौत कैसे हुई
ट्विशा शर्मा की 12 मई को भोपाल स्थित ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। ट्विशा का शरीर फंदे से झूलता हुआ मिला था। शुरुआती जांच इसे आत्महत्या माना गया। बाद में मामले में पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह पर दहेज और प्रताड़ना के आरोप लगे। अब इस केस की जांच सीबीआई कर रही है। 15 मई को एफआईआर दर्ज हुई थी। उसी दिन कुछ घंटों के भीतर ट्रायल कोर्ट ने गिरिबाला सिंह को अंतरिम जमानत दे दी थी। वहीं उनका बेटा समर्थ सिंह 10 दिन तक लापता रहने के बाद सरेंडर कर चुका है और फिलहाल सीबीआई हिरासत में है।
रिपोर्ट- श्रुति तोमर
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