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मिट्टी नहीं, हवा में तैयार हुए आलू; ग्वालियर में वैज्ञानियों का कमाल, खूबियां बेमिसाल

मिट्टी नहीं, हवा में तैयार हुए आलू; ग्वालियर में वैज्ञानियों का कमाल, खूबियां बेमिसाल

संक्षेप:

ग्वालियर कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने कमाल कर दिया है। वैज्ञानिकों ने एरोपोनिक्स तकनीक से हवा में आलू उगाए हैं। वैज्ञानिकों ने इस लैब में मिट्टी के बिना केवल फॉगिंग और पोषक तत्वों की मदद से करीब 20 किस्मों के बीमारी मुक्त बीज तैयार किए हैं। 

Feb 07, 2026 04:01 pm ISTKrishna Bihari Singh लाइव हिन्दुस्तान, ग्वालियर
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ग्वालियर के राजमाता विजया राजे सिंधिया विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने कमाल कर दिया है। इन वैज्ञानिकों ने बिना मिट्टी के हवा में आलू उगाए हैं। ये आलू विश्वविद्यालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग की एरोपोनिक्स लैब यूनिट में तैयार किए गए हैं। लैब में मिट्टी के बिना केवल फॉगिंग और पोषक तत्वों की मदद से करीब 20 अलग-अलग किस्मों के आलू के बीज तैयार किए जा रहे हैं। वैज्ञानिकों का दावा है कि ये बीज कई बीमारियों से मुक्त हैं।

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मिट्टी में नहीं लगाए जाते हैं पौधे

राजमाता विजया राजे कृषि विश्वविद्यालय में जैव प्रौद्योगिकी विभाग की वैज्ञानिक और एयरोपोनिक प्रोजेक्ट की इंचार्ज डॉक्टर सुषमा तिवारी ने बताया कि एयरोपोनिक तकनीक में पौधे टिशू कल्चर के माध्यम से लैब में तैयार किए जाते हैं। फिर ये पौधे मिट्टी में नहीं लगाए जाते हैं। जब पौधे एयरोपोनिक यूनिट में ट्रांसप्लांट करने होते हैं तब एक महीने पहले इनकी हार्डनिंग की जाती है। इन पौधों की जड़ें हवा में लटकी रहती हैं।

पोषण के लिए फॉगिंग सिस्टम का इस्तेमाल

डॉ. सुषमा तिवारी ने बताया कि पौधे की जड़ वाले वाले हिस्से को थोड़ा काट दिया जाता है। इसके बाद मिस्ट या फॉगिंग के जरिए लगातार नमी बनाए रखी जाती है। साथ ही पोषक भी फॉगिंग तकनीक से ही दिए जाते हैं। इन पौधों की जड़ों में आलू के बल्ब बनने तक पूरा पोषण फॉगिंग सिस्टम के जरिए ही किया जाता है। इस तकनीक से उच्च गुणवत्ता वाले आलू के बीज यानी मिनी ट्यूबर बनते हैं।

खूबियां बेमिसाल, बीमारी फ्री होते हैं ये आलू

डॉक्टर सुषमा तिवारी ने बताया कि हवा में तैयार किए जाने वाले आलू रोग मुक्त होते हैं। देखा जाता है कि मिट्टी के भीतर उगे आलू की फसल पर रोग या वायरस का असर पड़ता हैं लेकिन इस तकनीक से तैयार आलू के बीजों की फसल में ऐसी कोई बीमारी नहीं होती है। एरोपोनिक में तैयार पौधे बीमारी फ्री होते हैं। ये हेल्दी पौधे होते हैं। ये आलू के बीच अच्छी गुणवत्ता के होते हैं। यही नहीं इन बीजों से उत्पादन भी कई गुना अधिक होता है।

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एक किलो मिनी ट्यूबर से 4 क्विंटल पैदावार

डॉक्टर सुषमा तिवारी ने बताया कि एयरोपोनिक तकनीक से उगाए बीज का वजन बेहद कम होता है। इन्हें हम मिनी ट्यूबर का नाम देते हैं। इन मिनी ट्यूबर का वजन 2 से 3 ग्राम तक ही होता है। दो साल पहले जब इसकी शुरुआत के समय प्रदर्शनी यूनिट लगाई गई थी तब एक किलोग्राम बीज पैदा हुए थे। इससे 400 किलोग्राम सामान्य आलू निकला था। हालांकि किसानों को उक्त आलू के बीज जी-2 प्रोसेस के बाद ही दिए जाते हैं।

Krishna Bihari Singh

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Krishna Bihari Singh

कृष्ण बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम का हिस्सा (दिल्ली-NCR, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और गुजरात )


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कृष्ण बिहारी सिंह पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। कृष्ण बिहारी सिंह लाइव हिन्दुस्तान में कार्यरत हैं। वह स्टेट टीम के साथ काम कर रहे हैं। कृष्ण बिहारी सिंह भारतीय मीडिया जगत में केबी उपनाम से चर्चित हैं। यूपी के मऊ जिले से ताल्लुक रखने वाले केबी महाराष्ट्र और हरियाणा में पत्रकारिता कर चुके हैं। मौजूदा वक्त में वह दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय हैं।


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शैक्षणिक पृष्ठभूमि: लॉ (एलएलबी) और साइंस (बी.एससी, बायोलॉजी) से ग्रेजुएट कृष्ण बिहारी सिंह ने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए और एमफिल किया है। कृष्ण बिहारी सिंह भारतीय राजनीति और वैश्विक मामलों के साथ विधि विषय की गहरी समझ रखते हैं। अखबार से लेकर टेलीविजन और अब डिजिटल मीडिया के बदलावों के साक्षी रहे कृष्ण बिहारी सिंह पाठकों की पसंद और बदलते ट्रेंड को बारीकी से समझते हैं।

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