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7 नवंबर को ही रिलीज होगी 'हक', कोर्ट ने खारिज कर दी शाहबानो के बेटी की रोक वाली याचिका

7 नवंबर को ही रिलीज होगी 'हक', कोर्ट ने खारिज कर दी शाहबानो के बेटी की रोक वाली याचिका

संक्षेप:

शाहबानो की बेटी सिद्दीकी बेगम का आरोप था कि फिल्म हक में उनकी मां शाहबानो के जीवन से जुड़े घटनाक्रम को बिना अनुमति और तथ्यों से परे दर्शाया गया है। उन्होंने अदालत से मांग की थी कि फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाई जाए।

Nov 06, 2025 02:32 pm ISTUtkarsh Gaharwar लाइव हिन्दुस्तान, इंदौर
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शाहबानो केस पर बनी फिल्म रिलीज से पहले कानूनी पचड़े में पड़ गई थी। शाहबानो के परिवार और खुद उनकी बेटी ने इस फिल्म को बिना इजाजत बनाने पर कोर्ट से रोक लगाने की मांग की थी। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने आज फिल्म मेकर्स को राहत की सांस दी है। एमपी हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने शाहबानो की बेटी सिद्दीकी बेगम खान की ओर से दायर की गई याचिका को खारिज कर दिया है। फिल्म हक के रिलीज पर अब कोई रोक नहीं रहेगी।

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दरअसल, शाहबानो की बेटी सिद्दीकी बेगम का आरोप था कि फिल्म हक में उनकी मां शाहबानो के जीवन से जुड़े घटनाक्रम को बिना अनुमति और तथ्यों से परे दर्शाया गया है। उन्होंने अदालत से मांग की थी कि फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाई जाए। वहीं, फिल्म निर्माता जंगली पिक्चर्स की ओर से पेश हुए अधिवक्ता ऋतिक गुप्ता और अजय बगड़िया ने अदालत में दलील दी कि फिल्म एक काल्पनिक कथा पर आधारित है और इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति या समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है।

हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा ने इन दलीलों को खारिज करते हुए फैसला सुनाया कि किसी व्यक्ति की ओर से अपने जीवनकाल में अर्जित की गई निजता (Privacy) या प्रतिष्ठा (Reputation) उसकी मृत्यु के साथ समाप्त हो जाती है। इसे चल या अचल संपत्ति की तरह विरासत में नहीं लिया जा सकता। कोर्ट ने फिल्म निर्माता के इस रुख को भी स्वीकार किया कि यह फिल्म केवल सुप्रीम कोर्ट के एक मामले से प्रेरित है, लेकिन बाकी की कहानी काल्पनिक है। कोर्ट ने माना कि इस संबंध में एक अस्वीकरण (Disclaimer) भी फिल्म का हिस्सा है।

कोर्ट ने आगे कहा कि चूंकि फिल्म के डिस्क्लेमर में खुद ही यह बताया गया है कि फिल्म का नाट्य रूपांतरण (dramatization) किया गया है और यह काल्पनिक है, साथ ही यह एक किताब का रूपांतरण है और सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले से प्रेरित है, इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि फिल्म की सामग्री मनगढ़ंत है। चूंकि फिल्म प्रेरणा और कल्पना पर आधारित है, इसलिए कुछ हद तक छूट निश्चित रूप से स्वीकार्य है, और सिर्फ इसलिए कि ऐसा किया गया है, यह नहीं कहा जा सकता कि इसमें कोई सनसनीखेज प्रस्तुति या गलत चित्रण किया गया है।

अदालत ने निर्माताओं के तर्कों से सहमति जताते हुए याचिका को खारिज कर दिया। इस मामले में मंगलवार को सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था, जो बुधवार को सुनाया गया। फिल्म की रिलीज डेट से महज एक दिन पहले आए इस फैसले से निर्माताओं को बड़ी राहत मिली है। जिसमें बाद अब हक फिल्म कल याने 7 नवंबर को देशभर में बिना किसी कानूनी अड़चन के रिलीज होगी।

रिपोर्ट- हेमंत

Utkarsh Gaharwar

लेखक के बारे में

Utkarsh Gaharwar
एमिटी और बेनेट विश्वविद्यालय से पत्रकारिता के गुर सीखने के बाद अमर उजाला से करियर की शुरुआत हुई। अमर उजाला में बतौर एंकर सेवाएं देने के बाद 3 साल नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर काम किया। वर्तमान में लाइव हिंदुस्तान में डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हूं। एंकरिंग और लेखन के अलावा मिमिक्री और थोड़ा बहुत गायन भी कर लेता हूं। और पढ़ें
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