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ग्वालियर में रेबीज का कहर: डोज के बावजूद नहीं बचा बच्चा, पांच दिन में तीन मौतें; डॉक्टर भी हैरान

ग्वालियर में रेबीज का कहर: डोज के बावजूद नहीं बचा बच्चा, पांच दिन में तीन मौतें; डॉक्टर भी हैरान

संक्षेप:

ग्वालियर में सड़कों पर घूमते आवारा कुत्तों के वजह से लोगों में डर का माहौल है। इस पर लगाम लगाने में प्रशासन स्वास्थ्य सिस्टम की लापरवाही और नाकामी अब जानलेवा बनने लगी है।

Feb 09, 2026 04:51 pm ISTMohit लाइव हिन्दुस्तान
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ग्वालियर में महज पांच दिनों मे एक मासूम सहित रेबीज से तीन लोगो की मौत से हड़कंप मच गया है। सबसे चौंकानी वाली बात ये है कि एक बच्चे की मौत एंटी रेबीज के तीन डोज इंजेक्शन लगने के बाद हुई इसके बाद ड्रग की गुणवत्ता पर ही सवाल उठने लगे हैं। खुद स्वास्थ्य विभाग में भी हड़कंप है और वह मामले की जांच कराने की बात कह रहे है।

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ग्वालियर में सड़कों पर घूमते आवारा कुत्तों के वजह से लोगों में डर का माहौल है। इस पर लगाम लगाने में प्रशासन स्वास्थ्य सिस्टम की लापरवाही और नाकामी अब जानलेवा बनने लगी है। इसका चौंकाने वाला खुलासा खुद न्यू जयारोग्य अस्पताल में सामने आया है, यहां 5 दिनों में रैबीज से 3 मरीजों की मौत हो चुकी है। इनमें सबसे चौंकाने वाला मामला दतिया जिले से आए 6 साल के मासूम हंस प्रजापति का है। मासूम को डॉग बाइट के बाद एंटी रैबीज वैक्सीन की तीन डोज लगने के बावजूद रैबीज विकसित हो गया और अंततः उसकी मौत हो गई। यह मामला न सिर्फ चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी बताता है कि आवारा कुत्तों को लेकर प्रशासन के दावे कितने सच है। खुद स्वास्थ्य विभाग मे डोज के बाद भी बच्चे की मौत से हड़कंप है और ड्रग पर ही सवाल खड़े हो गए है।

लगने ही वाला था चौथा इंजेक्शन

दतिया निवासी हंस के पिता अशोक उर्फ कल्लू प्रजापति ने हॉस्पिटल में बताया था कि हंस को जिस दिन आवारा कुत्ते ने काटा था, डॉक्टर की सलाह पर तत्काल ईलाज शुरू कर दिया था। स्थानीय डॉक्टरों की सलाह और देखरेख में ही उसे 13 जनवरी को पहला डोज दिया गया था। उसके बाद 16 जनवरी और फिर 21 जनवरी को एंटी रैबीज वैक्सीन की डोज लगवाए। चौथा इंजेक्शन 10 फरवरी को लगना था, लेकिन इससे पहले ही बीते शुक्रवार को बच्चे में रैबीज के लक्षण दिखने लगे। वह चौंकने लगा और हवा और पानी से डर लगने लगा इसके बाद वह उसे कमला राजा अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन हालत नहीं सुधरी तो वहां से शनिवार को बच्चे की छुट्टी कराकर दतिया चले गए, जहां शनिवार-रविवार की रात उसकी मौत हो गई।

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डॉक्टर भी हैरान

सवाल यही है कि पीड़ित को डॉक्टरों द्वारा बताई गई तारीख को इंजेक्शन लगवाए। फिर बच्चा की मौत कैसे हो गई? अगर इंजेक्शन सही थे तो रैबीज कैसे हुआ? खुद डॉक्टर मान रहे हैं कि एंटी रेबीज के 3 डोज लगने के बाद रैबीज होना बेहद दुर्लभ माना जाता है। जयारोग चिकित्सालय के वरिष्ठ चिकित्सक और पब्लिक रिलेशन अधिकारी डॉ मनीष चतुर्वेदी ने स्वीकार किया कि बीते पांच दिनों मे डॉग बाईट के शिकार तीन लोगों की मौत हुई है जो चिंताजनक है। हालांकि इनमें ग्वालियर की एक है। एक अन्य मरीज टीकमगढ़ का रहने वाला था, लेकिन सबसे चिंता की वजह दतिया निवासी छह साल का मासूम की मौत है क्योंकि उसे एंटी रेबीज के तीन डोज लग चुके थे। यह रेयर टू रेयरेस्ट मामला है क्योंकि तीन डोज के बाद रेबीज नहीं फैलता। इसमें कई स्तर की जांच कराई जाएगी जिसमें देखभाल से लेकर ड्रग की जांच भी शामिल है।

रिपोर्ट: अमित कुमार

Mohit

लेखक के बारे में

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मोहित ने पत्रकारिता की पढ़ाई देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान आईआईएमसी दिल्ली से की है। 2016 में डिजिटल मीडिया डेब्यू। अमर उजाला से शुरुआत फिर एनडीटीवी और जनसत्ता से होकर अब लाइव हिंदुस्तान में बतौर डिप्टी कंटेट प्रोड्यूसर पद पर कार्यरत। स्पोर्ट्स की वेब स्टोरीज कवर करते हैं। पॉलिटिक्स में दिलचस्पी रखते हैं। खाली समय में गेम खेलना और खाना पसंद है। और पढ़ें

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