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परिवार ने की मजदूरी, गांव की पिच से महिला वर्ल्ड कप तक… क्रांति गौड़ की कहानी

परिवार ने की मजदूरी, गांव की पिच से महिला वर्ल्ड कप तक… क्रांति गौड़ की कहानी

संक्षेप:

Kranti Goud Biography: महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप में अपने प्रदर्शन से लोहा मनवाने वाली क्रांति की कहानी संघर्षों से भरी है। पाकिस्तान के खिलाफ खेले गए मैच से सुर्खियों में आईं क्रांति गौड़ ने गांव की पिच से वर्ल्ड कप तक का सफर तय किया है।

Sat, 1 Nov 2025 05:23 PMKrishna Bihari Singh लाइव हिन्दुस्तान, छतरपुर
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भारतीय महिला क्रिकेट टीम की तेज गेंदबाज क्रांति गौड़ महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप में अपने प्रदर्शन का लोहा मनवा दिया है। पाकिस्तान के खिलाफ खेले गए मैच से सुर्खियों में आईं क्रांति गौड़ की कहानी संघर्षों से भरी है। क्रांति के पिता मुन्ना सिंह गौंड सरकारी नौकरी में थे लेकिन सस्पेंड हो गए। इसके बाद परिवार पर मुश्किलों का पहाड़ टूट पड़ा था। परिवार को मजदूरी कर गुजारा कराना पड़ा। हालांकि इस बीच क्रांति विचलित नहीं हुई और उसने अपनी प्रैक्टिस जारी रखी।

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वर्ल्ड कप में 9 विकेट ले चुकी हैं क्रांति

क्रांति गौड़ अब तक क्रिकेट वर्ल्ड कप में 9 विकेट ले चुकी हैं। क्रांति ने हाल ही में खेले गए मैच में ऑस्ट्रेलिया के कप्तान का महत्वपूर्ण विकेट लेकर भारतीय टीम को बड़ी कामयाबी दिलाई। पाकिस्तान के खिलाफ खेले गए मैच में क्रांति गौड़ ने तीन विकेट झटके थे। उनको शानदार प्रदर्शन के लिए 'प्लेयर ऑफ द मैच' से नवाजा गया।

समान लाइन लेंथ पर है ध्यान

कांति कहती हैं कि उनका फोकस समान लाइन लेंथ बनाए रखने पर है। उन्होंने कहा कि वह और तेज गति से गेंदबाजी करना चाहती हैं। काफी कुछ करने की कोशिश नहीं कर रही हैं।

आरक्षक थे पिता

छतरपुर जिले के छोटे से कस्बे घुवारा की रहने वाली 22 साल की क्रांति गौड़ का बचपन संघर्षों से भरा रहा है। क्रांति के पिता मुन्ना सिंह गौड़ आरक्षक थे। एक विभागीय लापरवाही के चलते उनकी नौकरी चली गई थी। इसके बाद परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा।

गांव की पिच से वर्ल्ड कप तक का सफर

क्रांति को बचपन से क्रिकेट का शौक था। क्रांति के घर के सामने ही एक छोटा सा खेल मैदान है। इसी में क्रांति अपने दोस्तों के साथ टेनिस गेंद से खेलती थीं। इस ग्राउंड में क्रांति बचपन में खेलती थीं।

बचपन से क्रिकेट का शौक

क्रांति के साथ खेलने वाले बचपन की दोस्त राजेश रजक बताते हैं कि क्रांति को बचपन से ही क्रिकेट खेलने का शौक था। क्रांति हम सबसे कई साल छोटी है लेकिन उसकी बॉलिंग स्पीड बहुत तेज है। बॉलिंग स्पीड के कारण आसपास के कई जिलों के खिलाड़ी उसके सामने नतमस्तक हो जाते थे।

पलक झपकते उड़ा देती है विकेट

अपनी उम्र से कई बड़े खिलाड़ियों की विकेट क्रांति पलक झपकते ही उड़ा देती है। हमे गर्व है कि क्रांति देश के लिए खेल रही है। भाई लोकपाल सिंह बताते हैं कि क्रांति उनसे 9 साल छोटी है। क्रांति को बचपन से क्रिकेट का शौक है। क्रांति तेज रफ्तार के साथ गेंद फेंकती है। घर के सामने ही एक छोटा सा मैदान है जहां क्रांति पूर्व में अपने अन्य दोस्तों के साथ प्रैक्टिस करती रहती थी। हमें गर्व है कि क्रांति देश के लिए खेल रही है।

मजदूरी कर परिवार ने किया गुजारा

क्रांति की बड़ी बहन रोशनी सिंह बेहद खुश है। उन्हें उम्मीद है कि क्रांति की टीम भारत के लिए वर्ल्ड कप जीत कर लाएगी। क्रांति की मां नीलम सिंह बताती हैं कि पिता की नौकरी जाने के बाद परिवार की हालत बेहद खराब हो गई। मजदूरी कर के परिवार का भरण पोषण किया लेकिन क्रांति ने क्रिकेट जारी रखा। हमें उम्मीद है कि क्रांति की टीम फाइनल में जीत दर्ज करेगी।

Krishna Bihari Singh

लेखक के बारे में

Krishna Bihari Singh
पत्रकारिता में करीब 14 वर्षों से केबी उपनाम से पहचान रखने वाले कृष्ण बिहारी सिंह लाइव हिन्दुस्तान में कार्यरत हैं। वह लोकमत, राष्ट्रीय सहारा, अमर उजाला और दैनिक जागरण अखबार में विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं। उन्होंने साल 2019 में जागरण डॉट कॉम से डिजिटल मीडिया में कदम रखा। मूलरूप से यूपी के मऊ जिले से ताल्लुक रखने वाले केबी महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली में पत्रकारिता कर चुके हैं। लॉ और साइंस से ग्रेजुएट केबी ने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमफिल किया है। वह भारतीय राजनीति और वैश्विक मामलों के साथ जन सरोकार और क्राइम की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। और पढ़ें
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