
जगदीप धनखड़ ने इस्तीफे के बाद पहले भाषण में क्या-क्या कहा कि लगे ठहाके
उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के बाद जगदीप धनखड़ ने शुक्रवार को पहली बार किसी सार्वजनिक सभा को संबोधित किया। पूर्व उपराष्ट्रपति ने मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के रवींद्र भवन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक डॉ. मनमोहन वैद्य की पुस्तक 'हम और यह विश्व' का विमोचन किया।
उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के बाद जगदीप धनखड़ ने शुक्रवार को पहली बार किसी सार्वजनिक सभा को संबोधित किया। पूर्व उपराष्ट्रपति ने मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के रवींद्र भवन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक डॉ. मनमोहन वैद्य की पुस्तक 'हम और यह विश्व' का विमोचन किया। पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने पुस्तक की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह पुस्तक सोए हुए को जगा देने की क्षमता रखती है। गंभीर चिंतन के बीच उन्होंने कुछ ऐसी बातें भी कहीं जिस पर तालियां बजीं और खूब ठहाके लगे।

जगदीप धनखड़ ने कहा कि उन्होंने इस किताब को दो बार पढ़ी। पुस्तक में उठाए गए कई मुद्दों की चर्चा करते हुए पूर्व उपराष्ट्रपति ने नैरेटिव में फंसने के जोखिम की भी चर्चा की। उन्होंने इसे चक्रव्यूह बताते हुए कहा कि इसमें कोई फंस जाए तो निकलना कठिन होता है। उन्होंने अपने अंदाज में कहा, 'भगवान करे कोई नैरेटिव के चक्र में ना फंस जाए, इस चक्रव्यूह में कोई फंस गया तो निकलना बड़ा मुश्किल है।' इसके बाद धनखड़ ने कहा- मैं अपना उदाहरण नहीं दे रहा हूं।' उनके यह कहते ही सभागार तालियों और ठहाकों से गूंज उठा।
इस साल जुलाई में संसद के मॉनसून सत्र के पहले ही दिन अचानक उपराष्ट्रपति के पद से इस्तीफा देकर जगदीप धनखड़ ने सबको चौंका दिया था। धनखड़ ने भले ही स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर पद छोड़ा लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसकी खास चर्चा हुई। इस्तीफे का बाद लंबे समय तक धनखड़ की चुप्पी को लेकर विपक्षी दलों के कई नेताओं ने सरकार पर निशाना साधा। करीब चार महीने बाद धनखड़ किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में बोलते नजर आए।
उनके भाषण की अवधि का जिक्र करते हुए धनखड़ ने कहा कि वे 'फ्लाइट पकड़ने' के लिए अपना कर्तव्य नहीं छोड़ सकते। उन्होंने कहा, ‘संदेश आया है कि समय की सीमा है। मैं फ्लाइट पकड़ने की चिंता से अपने कर्तव्य को नहीं छोड़ सकता। मेरा हालिया अतीत इसका प्रमाण है।' यह सुनते ही एक बार फिर श्रोताओं ने ठहाके लगाए।
धनखड़ ने कहा कि जो सोया हुआ है उसको जगा सकते हैं। और जो जागकर सो रहा है उसको तो कुछ भी कर लो। बल प्रयोग एक अलग बात है। उन्होंने सूचना युद्ध और बदलावकारी तकनीकों- जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, ब्लॉकचेन और मशीन लर्निंग- की वृद्धि का उल्लेख किया और साथ ही यह भी कहा कि एक सभ्यतागत प्रतिस्पर्धा चल रही है।





