
परीक्षा रुकवानी थी, प्रिंसिपल के देहांत की खबर फैला दी; शोक मनाने पहुंच गए लोग
इंदौर के एक प्रतिष्ठित कॉलेज में परीक्षा रुकवाने के लिए प्रिंसिपल की मौत का फर्जी लेटर वायरल कर दिया गया। सूचना देखकर लोग हैरान हो गए, कई लोग तो प्रिंसिपल के घर शोक मनाने पहुंच गए।
इंदौर के एक प्रतिष्ठित कॉलेज में परीक्षा रुकवाने के लिए प्रिंसिपल की मौत का फर्जी लेटर वायरल कर दिया गया। सूचना देखकर लोग हैरान हो गए, कई लोग तो प्रिंसिपल के घर शोक मनाने पहुंच गए। अब पुलिस ने ऐसा करने वाले दो छात्रों के खिलाफ केस दर करके इसे सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के आरोप में दो छात्रों के खिलाफ केस दर्ज किया है।

भंवरकुआं पुलिस थाने के प्रभारी राजकुमार यादव ने बताया कि शासकीय होलकर साइंस कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. अनामिका जैन की शिकायत पर बैचलर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन (बीसीए) पाठ्यक्रम के तृतीय सेमेस्टर के दो छात्रों के खिलाफ बुधवार रात केस दर्ज किया गया। यादव ने बताया कि यह मामला भारतीय न्याय संहिता की धारा 336(4) (किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने के इरादे से जान-बूझकर नकली दस्तावेज बनाना) के तहत पंजीबद्ध किया गया।
उन्होंने बताया कि दोनों आरोपियों ने ऑनलाइन परीक्षा रुकवाने और कक्षाएं स्थगित कराने की कथित साजिश के तहत इस संस्थान की प्रिंसिपल की मौत का झूठा पत्र तैयार किया और इसे 14 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर प्रसारित कर दिया। महाविद्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि 'आवश्यक सूचना' के शीर्षक वाले पत्र को इस संस्थान के लेटरहेड की नकल करते हुए तैयार किया गया था और इसमें कहा गया था कि प्राचार्य जैन के 'आकस्मिक देहांत' के कारण 15 अक्टूबर और 16 अक्टूबर को होने वाली ऑनलाइन परीक्षा स्थगित कर दी गई है और सभी विषयों की कक्षाओं को भी स्थगित किया जाता है।
महाविद्यालय की प्रिंसिपल जैन ने कहा, 'इस फर्जी पत्र के सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद से मैं और मेरे परिजन बेहद परेशान हैं। पत्र को सही मानकर कई लोग शोक जताने के लिए मेरे घर भी पहुंच गए थे।'उन्होंने कहा कि पुलिस को दोनों आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए ताकि आइंदा ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। जैन ने किसी भी व्यक्ति का नाम लिए बगैर कहा कि लंबे समय से कुछ विघ्नसंतोषी तत्व अलग-अलग हरकतों से उन्हें परेशान कर रहे हैं ताकि वह प्रिंसिपल के तौर पर अपने शासकीय कर्तव्य को ठीक से नहीं निभा सकें। भारतीय न्याय संहिता की धारा 336(4) के तहत दोषी को तीन साल तक के कारावास की सजा हो सकती है और उस पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है।





