
MP में लालमन से अब्दुल बने बाप-बेटे चला रहे थे धर्मांतरण रैकेट, मुंबई से हो रही थी फंडिंग; 3 गिरफ्तार
पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपियों के पास से धार्मिक किताबें और फंडिंग के सबूत मिले हैं। इनके खिलाफ मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम की धारा 3, 5 और BNS की धारा 299 के तहत मामला दर्ज कर जेल भेज दिया गया है।
मध्यप्रदेश के सतना जिले में धारकुंडी पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो ग्रामीण अंचलों में संगठित रूप से धर्म परिवर्तन का 'खेल' चला रहा था। इस मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने एक ही परिवार के तीन सदस्यों (पिता, पुत्र और भतीजे) को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। जांच के दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि इस काम के लिए आरोपियों को मुंबई से फंडिंग की जा रही थी और पिछले एक साल में इस काम के लिए इनके खाते में 9 लाख रुपए भेजे गए। मामला जिले के धारकुंडी थाना क्षेत्र के झखौरा गांव का है। आरोपियों ने अपने घर को इबादतगाह का रूप दे दिया था, जिसकी भनक लगते ही पुलिस ने दबिश दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार पुलिस को काफी समय से झखौरा गांव में धर्म परिवर्तन से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिल रही थी, इसी दौरान मुख्य आरोपी लालमन चौधरी (68) ने करीब 15 दिन पहले अपने घर की छत पर मस्जिदनुमा गुंबद बनवा लिया। यह देख ग्रामीणों का शक यकीन में बदल गया और उन्होंने पुलिस को सूचना दी। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर जब पुलिस ने घर की तलाशी ली, तो वहां से आपत्तिजनक साहित्य, झंडे, बैनर और खुद की लिखी हुई एक विवादित किताब बरामद हुई।
15 साल पहले अपना धर्म बदला, फिर बेटे-भतीजे का भी बदलवाया
पुलिस जांच के दौरान पता चला कि लालमन चौधरी ने 15 साल पहले धर्म परिवर्तन कर अपना नाम 'अब्दुल रहमान' रख लिया था। इसके बाद उसने अपने बेटे विजय भारती (32) का धर्मांतरण कराकर उसे 'मोहम्मद उमर' बना दिया और रिश्ते के भतीजे दीनानाथ चौधरी (42) को 'अब्दुल्ला' बना दिया। अब ये तीनों मिलकर पूरे इलाके में धर्मांतरण का नेटवर्क चला रहे थे।
बैंक खाते खंगालने पर फंडिंग का खुला राज
पुलिस ने जब आरोपियों के बैंक खातों को खंगाला तो फंडिंग का बड़ा राज खुला। पिछले एक साल में आरोपी के खाते में मुंबई से करीब 9 लाख रुपए ट्रांसफर किए गए थे। पूछताछ में लालमन उर्फ अब्दुल रहमान ने कबूला कि धार्मिक यात्रा के दौरान उसकी मुलाकात मुंबई के एक शख्स से हुई थी। जिसके बाद वह शख्स भी कई बार झखौरा गांव में आ चुका है। हालांकि पकड़े जाने के डर से वे लोग मोबाइल नेटवर्क की जगह सिर्फ वॉट्सऐप कॉल पर ही बात करते थे। पैसे भी ऑनलाइन ऐप के जरिए भेजे जाते थे।
फंडिंग नेटवर्क की जांच कर रही पुलिस
इस मामले की जानकारी देते हुए एडिशनल एसपी प्रेमलाल कुर्वे ने बताया कि आरोपियों के पास से धार्मिक किताबें और फंडिंग के सबूत मिले हैं। इनके खिलाफ मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम की धारा 3, 5 और BNS की धारा 299 के तहत मामला दर्ज कर जेल भेज दिया गया है। मुंबई कनेक्शन और फंडिंग के असली स्रोत का पता लगाने के लिए साइबर सेल की मदद ली जा रही है। हम यह भी जांच रहे हैं कि इनका मुख्य उद्देश्य क्या था।





