MP में गजब खेल, पुराने कंप्यूटर को नया बताकर सरकार को करोड़ों का चूना लगाया

पीटीआई, भोपाल
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मध्य प्रदेश के एक सरकारी विभाग में करोड़ों रुपए के खरीद घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। जांच में पता चला है कि चार फर्म कथित तौर पर एक ही व्यक्ति द्वारा नियंत्रित या उससे जुड़ी हुई थीं। उन्होंने टेंडर में इस तरह हिस्सा लिया जिससे ऐसा लगे कि वे बोली लगाने में एक-दूसरे की प्रतिस्पर्धी हैं।

मध्य प्रदेश में करोड़ों का फर्जीवाड़ा।
मध्य प्रदेश में करोड़ों का फर्जीवाड़ा।

मध्य प्रदेश ईओडब्ल्यू ने सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) पर फर्जी बोली लगाकर राज्य के एक विभाग को नए बताकर पुराने कंप्यूटर और घटिया क्वालिटी के दूसरे डिवाइस सप्लाई करने के कथित 10.99 करोड़ रुपए के खरीद घोटाले का पर्दाफाश किया है। ईओडब्ल्यू के डायरेक्टर जनरल उपेंद्र जैन ने पीटीआई को बताया कि 'सामाजिक न्याय और दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग' के लिए खरीद में कथित गड़बड़ियों के सिलसिले में अलग-अलग फर्मों के चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

उन्होंने कहा कि इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (ईओडब्ल्यू) की जांच में पता चला है कि चार फर्म कथित तौर पर एक ही व्यक्ति द्वारा नियंत्रित या उससे जुड़ी हुई थीं। उन्होंने GeM टेंडर में इस तरह हिस्सा लिया जिससे ऐसा लगे कि वे बोली लगाने में एक-दूसरे की प्रतिस्पर्धी हैं। जैन ने धोखाधड़ी के तरीके के बारे में बताया कि कंपनियों ने एक ही जीएसटी अकाउंट से रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और पते का इस्तेमाल किया। उन्होंने टेंडर में एक साथ हिस्सा लिया और बोली के लिए क्वालीफाई करने के लिए मैन्युफैक्चरर ऑथराइजेशन लेटर जमा किए।

कुछ मामलों में कंपनियों ने पुराने कंप्यूटरों को नया बताकर सप्लाई किया। ईओडब्ल्यू ने एक प्रेस रिलीज में बताया कि एक मामले में 22 जुलाई 2024 को लगाए गए कंप्यूटरों को 23 सितंबर 2024 को निकाले गए टेंडर में नया इक्विपमेंट दिखाया गया था। जांच में सप्लाई किए गए कंप्यूटरों के स्पेसिफिकेशन में भी गड़बड़ी पाई गई। इसमें कहा गया है कि कंपनियों ने कथित तौर पर स्थानीय स्तर पर खरीदी गई एसएसडी और रैम वाले इक्विपमेंट सप्लाई किए, जो तय स्पेसिफिकेशन के मुताबिक नहीं थे।

जैन ने बताया कि टेंडर में हिस्सा लेने के लिए एक कंपनी ने कथित तौर पर एक मल्टीनेशनल कंप्यूटर बनाने वाली कंपनी का जारी किया हुआ नकली ऑथराइजेशन लेटर जमा किया था। उन्होंने बताया कि यह भी पता चला कि विभाग ने कथित तौर पर 6086 रुपए की छपी हुई कीमत वाला यूपीएस 11247 रुपए में खरीदा, जबकि GeM पर उसकी कीमत 3754 रुपए थी।

जांच के मुताबिक, एक मैन्युफैक्चरर ने एजेंसी को यह भी बताया कि खरीद में बताए गए यूपीएस मॉडल की सप्लाई टेंडर के तहत नहीं की गई थी। ईओडब्ल्यू ने गड़बड़ी में कथित तौर पर शामिल कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने समेत अन्य कार्रवाई की सिफारिश की है। ईओडब्ल्यू ने आगे बताया कि आरोपियों के खिलाफ 1 सितंबर को भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी।

Subodh Kumar Mishra

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Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

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शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।

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