मासूम बच्चों के साथ चिता पर लेंटीं, अब सैकड़ों ने गले में लगाया फांसी का फंदा; MP में क्या मांग रहीं महिलाएं
मध्य प्रदेश के छतरपुर में आदिवासी महिलाएं अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रही हैं। केन-बेतवा रिवर लिंक प्रोजेक्ट के विरोध में महिलाएं अब सैकड़ों की संख्या में फांसी का फंदा गले में लगाकार चेतावनी दे रही हैं।

मध्य प्रदेश के छतरपुर में हजारों महिलाएं केन-बेतवा रिवर लिंक प्रोजेक्ट का विरोध कर रही हैं। महिलाओं का कहना है कि उनसे उनकी जमीन छीनी जा रही है। इस प्रोजेक्ट के विरोध में महिलाएं कई दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रही हैं। प्रदर्शन कर रही महिलाएं अपने मासूम बच्चों के साथ कभी चिताओं पर लेट जा रही हैं, तो कभी तालाब में उतरकर फांसी के फंदा गले में लगा रही हैं। आइए जानते हैं आखिर ये महिलाएं ऐसा क्यों कर रही हैं और उनकी मांग क्या है।
क्यों हो रहा विरोध प्रदर्शन
मध्य प्रदेश में सरकार ने केन नदी को बेतवा से जोड़ने के लिए एक प्रोजेक्ट चालू कर रही है। इसका उद्देश्य केन नदी के बेसिन के पानी को नहर के जरिए बेतवा के बेसिन तक पहुंचाने की योजना है। सरकार का कहना है कि इस प्रोजेक्ट के पूरा होने पर लाखों हेक्टेयर जमीन को सींचने के लिए पानी मिलेगा। अब यहां की आदिवासी महिलाएं इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रही हैं। महिलाओं का कहना है कि इस प्रोजेक्ट के जरिए उनकी जमीन और उनके जंगल उनसे छीने जा रहे हैं। इसलिए वो इसका विरोध कर रही हैं।
विरोध प्रदर्शन कर रही महिलाएं अपने घर के पुरुषों और मासूम बच्चों को लेकर विरोध प्रदर्शन वाली जगह पर पहुंच गई हैं। पिछले 12 दिनों से लगातार चल रहे प्रदर्शन में सैकड़ों महिलाएं अपने मासूम बच्चों के साथ चिताओं पर लेट कर प्रदर्शन कर रही हैं। अब नए विजुअल्स भी सामने आए हैं, जिसमें महिलाएं तालाब में उतर गई हैं। पानी में ही महिलाओं ने सैकड़ों की संख्या में फांसी का फंदा अपने गले में लगाया हुआ है। महिलाएं लगातार अपनी मांगों पर अड़ी हुई हैं।
क्या है सरकार का प्लान
सरकार का प्लान है कि केन-बेतवा रिवर लिंक प्रोजेक्ट को पूरा करने के बाद करीब 62 लाख लोगों को पीने के लिए साफ पानी मुहैय्या करवाया जाएगा। इसके अलावा 200 किलोमीटर की नहर के माध्यम से दोनों नदियों को जोड़ने के बाद लाखों हेक्टेयर जमीन को सींचने के लिए पानी की समस्या खत्म हो जाएगी। इसके साथ ही इस परियोजना के लिए डैम का निर्माण करने की भी योजना है। इस परियोजना के माध्यम से सरकार की बिजली पैदा करने की भी योजना है और कम पानी वाले इलाकों में भी पानी पहुंचाने की योजना बनी हुई है।
प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने कहा कि हमारे जंगल, ज़मीन और घर छीने जा रहे हैं, इसलिए हम प्रोटेस्ट करने के लिए मजबूर हैं। 10 दिन हो गए हैं, आज 11वां दिन है, और कोई अधिकारी नहीं आया है। जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होतीं, हम नहीं जाएंगे। अगर वे हमें नज़रअंदाज़ करते हैं, तो हम नक्सल भी बन सकते हैं बंदूक़ भी उठा सकते हैं। दुर्गा या काली की तरह, हम भी उग्र हो सकते हैं। महिलाओं ने कहा कि हमारे बच्चे डर में जी रहे हैं, लेकिन सरकार को कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि हमारे घरों के अंदर क्या होता है।
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Mohammad Azamसंक्षिप्त विवरण
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