भोजशाला केस में मोड़; ASI को सर्वे की वीडियोग्राफी मस्जिद पक्ष को देने के आदेश

लाइव हिन्दुस्तान, इंदौर
Follow us on Google News
share

एमपी के धार भोजशाला मामले में हाई कोर्ट ने एएसआई को 98 दिनों के सर्वे की वीडियोग्राफी 27 अप्रैल तक गूगल ड्राइव पर अपलोड कर पासवर्ड दोनों पक्षों को देने का आदेश दिया है। अदालत ने यह कदम मस्जिद पक्ष की आपत्तियों को सुनने के लिए उठाया है।

भोजशाला केस में मोड़; ASI को सर्वे की वीडियोग्राफी मस्जिद पक्ष को देने के आदेश

धार भोजशाला मामले में एक अपडेट सामने आया है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को निर्देश दिया है कि वह 98 दिनों तक चले सर्वे की पूरी वीडियोग्राफी 27 अप्रैल तक गूगल ड्राइव पर अपलोड करे और इसका पासवर्ड कोर्ट के साथ मस्जिद पक्ष को सौंपे। मस्जिद पक्ष के वकील सलमान खुर्शीद ने दलील दी कि बिना वीडियोग्राफी देखे वह सर्वे पर अपनी आपत्ति दर्ज नहीं करा पा रहे हैं। उन्होंने हिंदू पक्ष की याचिका की वैधता पर सवाल उठाए और कहा कि मामला सीधे हाई कोर्ट के बजाय जिला अदालत में सुना जाना चाहिए।

हाई कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को आदेश दिया कि 98 दिन चले भोजशाला सर्वे की पूरी वीडियोग्राफी 27 अप्रैल से पहले गूगल ड्राइव पर अपलोड कर मस्जिद पक्ष यानी मौलाना कलामुद्दीन वेलफेयर सोसायटी और कोर्ट को पासवर्ड उपलब्ध कराया जाए। कोर्ट के इस आदेश के बाद बहुचर्चित भोजशाला विवाद में कानूनी हलचल और तेज हो गई है।

सर्वे पर आपत्ति दर्ज कराने की अनुमति दी

मस्जिद पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने कोर्ट में दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट ने सर्वे पर आपत्ति दर्ज कराने की अनुमति दी है लेकिन वीडियोग्राफी उपलब्ध नहीं होने से आपत्ति दर्ज कराना संभव नहीं हो पा रहा है। इस पर हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद एएसआई को वीडियोग्राफी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। एएसआई की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील जैन ने इस पर आपत्ति भी दर्ज कराई।

याचिका की वैधता पर उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान सलमान खुर्शीद ने हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका की वैधता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह मामला स्वामित्व विवाद से जुड़ा सिविल मामला है, जिसे रिट याचिका के जरिए नहीं सुना जा सकता है। उन्होंने कहा कि जिला कोर्ट में पहले से वाद लंबित है ऐसे में सीधे हाई कोर्ट में याचिका दायर करने का कोई औचित्य नहीं है।

याचिका निरस्त करने की मांग

खुर्शीद ने यह भी तर्क दिया कि 2003 के एएसआई आदेश के 19 साल बाद दाखिल याचिका समयसीमा से बाहर है, इसलिए इसे निरस्त किया जाना चाहिए। सुनवाई के दौरान अयोध्या फैसले, वक्फ एक्ट और धार्मिक उपयोग को लेकर भी कई उदाहरण पेश किए गए। खुर्शीद बुधवार को अपनी दलीलें पूरा करेंगे। मामले की अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। भोजशाला विवाद में हाई कोर्ट का उक्त आदेश एक अहम मोड़ माना जा रहा है।

रिपोर्ट- हेमंत

Krishna Bihari Singh

लेखक के बारे में

Krishna Bihari Singh

कृष्ण बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम का हिस्सा (दिल्ली-NCR, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और गुजरात )


संक्षिप्त विवरण

कृष्ण बिहारी सिंह पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। कृष्ण बिहारी सिंह लाइव हिन्दुस्तान में कार्यरत हैं। वह स्टेट टीम के साथ काम कर रहे हैं। कृष्ण बिहारी सिंह भारतीय मीडिया जगत में केबी उपनाम से चर्चित हैं। यूपी के मऊ जिले से ताल्लुक रखने वाले केबी महाराष्ट्र और हरियाणा में पत्रकारिता कर चुके हैं। मौजूदा वक्त में वह दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय हैं।


विस्तृत बायो

परिचय और अनुभव: कृष्ण बिहारी सिंह लोकमत, आज समाज, राष्ट्रीय सहारा, अमर उजाला और दैनिक जागरण अखबार में विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं। उन्होंने साल 2019 में जागरण डॉट कॉम से डिजिटल मीडिया में कदम रखा। कृष्ण बिहारी सिंह मौजूदा वक्त में भारत के प्रसिद्ध समाचार संस्थान 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) की स्टेट टीम में डिप्टी चीफ एडिटर (कंटेंट क्रिएटर) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि: लॉ (एलएलबी) और साइंस (बी.एससी, बायोलॉजी) से ग्रेजुएट कृष्ण बिहारी सिंह ने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए और एमफिल किया है। कृष्ण बिहारी सिंह भारतीय राजनीति और वैश्विक मामलों के साथ विधि विषय की गहरी समझ रखते हैं। अखबार से लेकर टेलीविजन और अब डिजिटल मीडिया के बदलावों के साक्षी रहे कृष्ण बिहारी सिंह पाठकों की पसंद और बदलते ट्रेंड को बारीकी से समझते हैं।

रिपोर्टिंग एवं विशेषज्ञता: कृष्ण बिहारी सिंह राजनीति, जिओ पॉलिटिक्स, जन सरोकार और क्राइम की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। कृष्ण बिहारी सिंह ने अब तक विभिन्न मीडिया संस्थानों में नेशनल, इंटरनेशनल, बिजनेस, रिसर्च एवं एक्सप्लेनर और संपादकीय टीमों के साथ लंबे समय तक काम किया है। यही वजह है कि खबर के पीछे छिपे एजेंडे की समझ रखने वाले केबी समसामयिक घटनाक्रमों पर गहरा विश्लेषण करते हैं।

पत्रकारिता का उद्देश्य: कृष्ण बिहारी सिंह 'राष्ट्र प्रथम' की भावना के साथ काम करते हैं। केबी का मानना है कि एक पत्रकार की पहली जिम्मेदारी उसका राष्ट्र और लोक कल्याण है। केबी खबरों को पहले प्रमाणिकता की कसौटी पर कसते हैं, फिर आम जनमानस की भाषा में उसे परोसने का काम करते हैं। केबी का मानना है कि रिपोर्टिंग का उद्देश्य पाठकों को न केवल सूचना देना वरन उन्हें सही और असल जानकारी देना है।

और पढ़ें
लेटेस्ट Hindi News, Bhopal News, Indore News, Jabalpur News, Gwalior News, Ujjain News के साथ-साथ MP Board Result 2026 Live और MP News अपडेट हिंदी में पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।