एमपी के पूर्व कांग्रेस MLA राजेंद्र भारती को दिल्ली HC से झटका, सजा पर रोक से इनकार
मध्य प्रदेश के अयोग्य घोषित कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को दिल्ली हाईकोर्ट से भी मायूसी हाथ लगी है। अदालत ने बैंक धोखाधड़ी मामले में सुनाई गई सजा पर रोक लगाने की उनकी याचिका खारिज कर दी है।

मध्य प्रदेश के अयोग्य घोषित कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को दिल्ली हाई कोर्ट से तगड़ा झटका लगा है। दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को धोखाधड़ी के एक मामले में एमपी के पूर्व कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। यह मामला 1998 और 2011 के बीच अवैध ब्याज भुगतान पाने के लिए बैंक रिकॉर्ड में हेराफेरी करने से जुड़ा है। राजेंद्र भारती ने दिल्ली हाई कोर्ट से बैंक धोखाधड़ी मामले में सुनाई गई 3 साल की सजा पर रोक की मांग की थी।
राजेंद्र भारती की ओर से दाखिल याचिका पर फैसला सुनाते हुए जस्टिस मनोज जैन ने कहा कि हम इसे खारिज कर रहे हैं। निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अपील दायर करने के बाद, हाई कोर्ट ने 28 अप्रैल को इस मामले में पूर्व विधायक को सुनाई गई 3 साल की सजा पर रोक लगा दी थी।
निचली अदालत ने सुनाई थी 3 साल की सजा
निचली अदालत ने दो अप्रैल को इस मामले में जिला सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र भारती को 3 साल की सजा सुनाई थी। निचली अदालत ने एक अप्रैल को राजेंद्र भारती को आईपीसी की धाराओं 120बी (आपराधिक साजिश), 420 (धोखाधड़ी), 467 (मूल्यवान प्रतिभूति की जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी) और 471 (जाली दस्तावेज को असली के रूप में इस्तेमाल करना) के तहत दोषी करार दिया था।
क्यों दिल्ली ट्रांसफर हुआ था केस?
राजेंद्र भारती के वकील ने पूर्व में पूर्व में दी गई अपनी दलील में कहा था कि एक बार दोषसिद्धि पर रोक लग जाने के बाद उनकी अयोग्यता का कोई आधार नहीं रहेगा। नतीजतन उनकी विधानसभा सीट को रिक्त घोषित नहीं किया जा सकेगा। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के दतिया से जुड़े इस मामले को पिछले साल अक्टूबर में दिल्ली भेज दिया था। शीर्ष अदालत ने उक्त आदेश बचाव पक्ष के गवाहों को डराने-धमकाने के प्रयास किए जाने के दावे के मद्देनजर लिया गया था।
क्या था पूरा मामला?
अभियोजन के अनुसार, राजेंद्र भारती की दिवंगत मां सावित्री ने 24 अगस्त 1998 को दतिया स्थित जिला सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक में परिवार द्वारा संचालित एक ट्रस्ट के नाम पर 3 साल की सावधि जमा (एफडी) के रूप में 10 लाख रुपये जमा किए थे। इस जमा पर सालाना 13.5 फीसदी की ब्याज दर तय की गई थी। आरोप है कि बैंक रिकॉर्ड में छेड़छाड़ कर के आरोपियों ने तय अवधि के बाद भी ऊंची ब्याज दर का भुगतान जारी रखने के लिए साजिश रची थी।


