दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती भेजे गए तिहाड़, बैंक घोटाले में पाए गए दोषी
दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को दिल्ली MP-MLA कोर्ट ने भूमि विकास बैंक से जुड़े मामले में बुधवार को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के तहत दोषी ठहराया है। विधायक को फिलहाल तिहाड़ जेल भेज दिया गया है।

दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को दिल्ली MP-MLA कोर्ट ने भूमि विकास बैंक से जुड़े मामले में बुधवार को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के तहत दोषी ठहराया है। विधायक को फिलहाल तिहाड़ जेल भेज दिया गया है। कितनी सजा दी गई है, इसका अभी कोई अपडेड न्यायालय से नहीं आया है। अगली सुनवाई गुरुवार को होनी है, जिसमें सजा सुनाई जाएगी। अब समझिए क्या मामला है, जिसके तहत कांग्रेस विधायक दोषी पाए गए हैं।
3 साल की एफडी का 15 साल तक लिया ब्याज
विधायक राजेंद्र भारती ने अपनी मां के नाम बैंक में 10.50 लाख रुपए की एफडी तीन साल के लिए कराई थी, जिस पर 13.50% ब्याज मिल रहा था। आरोप है कि बाद में एफडी की अवधि 3 साल से बढ़ाकर 15 साल कर दी गई। इसी मामले में बैंक कर्मचारी नरेंद्र सिंह ने कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई। कोर्ट ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए इसे धोखाधड़ी का मामला माना और केस दर्ज करने के आदेश दिए।
25 साल पुराना है मामला, मां के लिए खुलवाई थी एफडी
दतिया से कांग्रेस जिला अध्यक्ष अशोक दांगी ने बताया कि विधायक राजेंद्र भारती को न्यायालय ने अभी केवल दोषी ठहराया है। कितनी सजा दी गई है, या क्या दंड दिया गया है।इस का अभी कोई अपडेड न्यायालय से नहीं आया है। यह मामला करीब 25 साल पुराना है, जब दतिया के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती जिला सहकारी कृषि ग्रामीण बैंक दतिया के अध्यक्ष थे। उसी दौरान उन्होंने अपनी मां स्व. सावित्री देवी के नाम पर 1998 में 10 लाख रुपये की एफडी कराई, जिसकी अवधि 3 साल थी। उस समय 13.5% वार्षिक ब्याज मिल रहा था।
हर साल अवैध रूप से निकलवाते रहे एफडी का ब्याज
आरोप है कि अध्यक्ष पद पर रहते हुए उन्होंने नियमों के विपरीत हर साल एफडी का ब्याज अलग से निकलवाया, जबकि नियमानुसार ब्याज और मूलधन मैच्योरिटी के बाद ही दिया जाता है।इस तरह तीन साल तक नियमों के खिलाफ भुगतान कराया गया।आरोप है कि 2001 में जब एफडी की अवधि पूरी होने वाली थी और बाजार में ब्याज दरें कम हो गई थीं, तब राजेंद्र भारती ने पद का दुरुपयोग कर दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर अवधि 3 साल और बढ़ा दी।इसके बाद भी उन्होंने 13.5% की ऊंची ब्याज दर पर हर साल ब्याज लिया।
फर्जी दस्तावेज और रिकॉर्ड में हेर-फेर करके किया कांड
आरोप है कि 2004 में फिर दस्तावेजों में बदलाव कर एफडी की अवधि करीब 10 साल और बढ़ा दी गई, जिससे उन्हें ज्यादा ब्याज मिलता रहा। यह पूरा खेल फर्जी दस्तावेजों और रिकॉर्ड में बदलाव से किया गया। बैंक प्रबंधन को गड़बड़ी की जानकारी 2003 में मिली, जिसके बाद आंतरिक जांच शुरू हुई। जांच में राजेंद्र भारती और उनकी मां को दोषी पाया गया। इसके बाद मामला उपभोक्ता फोरम और दतिया की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) कोर्ट तक पहुंचा।
रिपोर्ट- अमित कुमार
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