MP : कांग्रेस MLA राजेंद्र भारती को नया झटका, 3 साल की साज के बाद विधायकी भी छिनी
Madhya Pradesh News : मध्य प्रदेश से कांग्रेस के विधायक राजेंद्र भारती को धोखाधड़ी के एक मामले में दोषसिद्धि के बाद राज्य विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया गया है। भारती ने 2023 के विधानसभा चुनाव में पूर्व गृह मंत्री एवं भाजपा नेता नरोत्तम मिश्रा को हराया था।

Madhya Pradesh News : मध्य प्रदेश से कांग्रेस के विधायक राजेंद्र भारती को धोखाधड़ी के एक मामले में दोषसिद्धि के बाद राज्य विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि इस मुद्दे पर गुरुवार रात विचार-विमर्श के बाद विधानसभा सचिवालय ने दतिया सीट से भारती की सदस्यता समाप्त करने की अधिसूचना जारी कर दी। भारती ने 2023 के विधानसभा चुनाव में पूर्व गृह मंत्री एवं भाजपा नेता नरोत्तम मिश्रा को हराया था।
अधिसूचना में दिल्ली की एक अदालत द्वारा भारती को तीन साल के कारावास की सजा सुनाए जाने का उल्लेख करते हुए दतिया सीट को रिक्त घोषित किया गया है। यह अधिसूचना विधानसभा के प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा ने दो अप्रैल की रात जारी की, जिसे शुक्रवार सुबह मीडिया को उपलब्ध कराया गया।
क्या है मामला?
दिल्ली की एक अदालत ने गुरुवार को राजेंद्र भारती और बैंक के एक पूर्व कर्मचारी को 1998 से 2011 के बीच बैंक रिकॉर्ड में हेराफेरी कर अवैध ब्याज भुगतान हासिल करने से जुड़े धोखाधड़ी के मामले में तीन साल के कारावास की सजा सुनाई थी। स्पेशल जज दिगविनय सिंह ने विधायक भारती और पूर्व कैशियर रघुवीर शरण प्रजापति पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। दोनों को आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, मूल्यवान प्रतिभूति की जालसाजी, धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी और जाली दस्तावेज को असली के रूप में इस्तेमाल करने के आरोपों में दोषी ठहराया गया है।
किन धाराओं में ठहराया था दोषी
कोर्ट द्वारा बुधवार को दोनों को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 120बी (आपराधिक साजिश), 420 (धोखाधड़ी), 467 (कीमती दस्तावेज की जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के लिए जालसाजी) और 471 (जाली दस्तावेज का असली दस्तावेज की तरह उपयोग) के तहत दोषी ठहराया गया था।
कैसे किया खेल
अभियोजन पक्ष के अनुसार, भारती की दिवंगत मां सावित्री ने 24 अगस्त 1998 को जिला सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक, दतिया में परिवार के ट्रस्ट के नाम पर 10 लाख रुपये तीन साल की सावधि जमा के रूप में जमा किए थे, जिस पर हर साल 13.5 प्रतिशत का ब्याज मिलना था। अभियोजन ने कहा कि आरोपियों ने उच्च दर वाले ब्याज के भुगतान को निर्धारित अवधि से आगे बढ़ाने की साजिश रची और बैंक रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की। अभियोजन पक्ष ने बताया कि उन्होंने गलत तरीकों का इस्तेमाल करके सावधि जमा की तीन साल की अवधि को पहले 10 और फिर 15 साल तक बढ़ा दिया, जिससे ट्रस्ट 2011 तक वार्षिक ब्याज निकालता रहा जबकि उस समय ब्याज दरें काफी गिर चुकी थीं। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि भारती ट्रस्ट के ट्रस्टी थे। उन्होंने लगभग 18.5 लाख रुपये अवैध रूप से ब्याज के रूप में निकाले।


