MP के धार में बड़ा बवाल; सर्वे करने पहुंची टीम पर पथराव, जान बचाकर भागे अफसर और पुलिस
एमपी के धार जिले में बड़ा बवाल हो गया। चूना पत्थर खदान में सर्वे करने पहुंची टीम पर ग्रामीण भड़क गए। तहसीलदार की गाड़ी को पलटाने की कोशिश की। जमकर पथराव किया। पुलिस और अफसर जान बचाकर भागे।
मध्य प्रदेश के धार जिले में प्रशासन और ग्रामीणों के बीच जमकर बवाल हो गया। यहां चूना पत्थर खदान में सर्वे के लिए पहुंची प्रशासनिक टीम को ग्रामीणों के आक्रोश का सामना करना पड़ा। खनन के विरोध में जुटे ग्रामीणों ने कंपनी के वाहनों में तोड़फोड़ की और मौके पर थानों की पुलिस व अफसरों पर पथराव कर दिया ओर इस दौरान तहसीलदार की गाड़ी पलटाने की कोशिश की, पत्थरबाजी में पुलिस और प्रशासन के कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए हैं। पूरी घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए है। स्थिति तनावपूर्ण होने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को जान बचाकर भागना पड़ा है।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि चूना खदान और सीमेंट फैक्ट्री खुलने से उनकी जमीन बंजर हो जाएगी, विस्थापन का खतरा बढ़ जाएगा। घटना के बाद जयस के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष रविराज भी मौके पर पहुंचे। कहा कि जल, जंगल और जमीन की कानूनी दायरे में रहकर लड़ाई लड़ेंगे।
सर्वे शुरू होते ही भड़के ग्रामीण
धार जिले के कुक्षी क्षेत्र के ग्राम खेड़ली गांव में बुधवार को दोपहर में प्रशासनिक अमला नौ थानों के पुलिस बल के साथ गांव पहुंचा था। इस दौरान सीमेंट कंपनी को शासन से मिली माइनिंग की अनुमति और टेस्टिंग के तहत ड्रिलिंग की जा रही थी। चूना पत्थर सर्वे के लिए ड्रिलिंग शुरू होते ही ग्रामीण एकत्र हो गए ओर विरोध करने लगे।
जैसे ही खेतों में ड्रिलिंग मशीन खड़ी की गई, ग्रामीणों ने सड़क पर बैठकर पुलिस और प्रशासनिक काफिले को रोक दिया, धीरे-धीरे स्थिति तनावपूर्ण होती गई,बड़ी संख्या में तैनात फोर्स की मौजूदगी के बावजूद ग्रामीणों का आक्रोश कम नहीं हुआ। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ा कि भीड़ ने अधिकारियों की गाड़ियों और मशीनों पर पथराव शुरू कर दिया, जिससे अफरा-तफरी मच गई। हालात बिगड़ते देख प्रशासनिक टीम को बिना सर्वे किए वापस लौटना पड़ा।घटना के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है।
ग्रामीणों के आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से प्रस्तावित चूना फैक्ट्री और खनन कार्य का विरोध कर रहे हैं। इनके पहले कुक्षी के विजय स्तंभ चौराहा पर पहले भी चक्का जाम किया था। इसके बाद प्रशासन ने अस्थायी रूप से ड्रिलिंग कार्य स्थगित कर दिया था। उस समय कलेक्टर प्रियंका मिश्रा ने ग्राम मोगरा पहुंचकर ग्रामीणों से बातचीत की थी।उस दौरान कलेक्टर ने आश्वासन दिया था कि जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की सहमति के बिना कोई कार्य नहीं किया जाएगा। लेकिन उनकी सहमति के बिना ही खनन प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। इससे क्षेत्र की खेती, पर्यावरण और जल स्रोतों पर इसका असर पड़ेगा।
पहले भी ग्रामीण कर चुके विरोध
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि खनिज विभाग ने 11 मार्च 2025 से राजस्थान की श्री सीमेंट कंपनी को कुक्षी क्षेत्र के बामनबयड़ी गांव में 913 हेक्टेयर, ग्राम टकारी, तलावड़ी और घोड़ा में 815 हेक्टेयर भूमि चूना पत्थर खदान के लिए तीन साल की लीज पर दी है। इससे पहले भी कंपनी की ड्रिलिंग का ग्रामीणों ने विरोध किया था। खनन के बाद यहां सीमेंट फैक्ट्री स्थापित की जाएगी। सीमेंट फैक्ट्री की वजह से कृषि भूमि प्रभावित होगी। आसपास के लोगों को विस्थापन का खतरा बढ़ेगा। इसी वजह से कुक्षी, बाग और जोबट ब्लॉक के कई गांवों के लोग चूना खदान का विरोध कर रहे हैं।
जयस के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष रविराज बघेल ने कहा कि कलेक्टर प्रियंका मिश्रा ने आश्वासन के बाद भी ग्रामीणों की बिना सहमति के ड्रिलिंग के लिए टीम को भेजा। पुलिस बल का इस्तेमाल करके ड्रिलिंग की कोशिश क्यों की गई? जल, जंगल और जमीन की यह लड़ाई कानूनी दायरे में रहकर लड़ेंगे और जीतेंगे।
एसडीएम प्रमोद गुर्जर ने बताया कि आक्रोशित भीड़ ने अधिकारियों की गाड़ियों और मशीनों पर पथराव शुरू कर दिया, हालात बेकाबू हो गए, घटना में कई वाहनों के कांच फूट गए, टैंकर-ट्रॉली पलटने के बाद पुलिस पर पत्थर बरसे। स्थिति के और बिगड़ने की आशंका को देखते हुए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने संयम बरतते हुए पीछे हटने का फैसला किया, काफी समझाइश के बाद हालात नियंत्रित हुए हैं और फिलहाल ड्रिलिंग कार्य रोक दिया गया है। कई घंटे चली गहमागहमी के बाद पूरी टीम को बिना सर्वे किए वापस लौटना पड़ा।
रिपोर्ट- विजेन्द्र यादव

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