भोजशाला पर सुप्रीम कोर्ट रोजाना सुनवाई को राजी, CJI ने सावधान भी किया
सुप्रीम कोर्ट ने आज भोजशाला मामले की रोजाना सुनवाई पर सहमति जताई है। सीजेआई की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने कहा कि हमें ऐसा कोई आदेश पारित नहीं करना चाहिए जिससे तनाव पैदा हो। इसके साथ ही दोनों पक्षों को भी धैर्य रखना होगा।

सुप्रीम कोर्ट आज मध्य प्रदेश के धार जिले की भोजशाला मामले की रोजाना सुनवाई को राजी हो गया। कोर्ट ने कहा कि यह एक संवेदनशील मामला है और वह इस विवाद को सुलझाने के लिए तैयार है, इसलिए हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों को धैर्य रखना होगा।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें कहा गया था कि धार जिले में विवादित भोजशाला परिसर देवी सरस्वती को समर्पित एक मंदिर है। बेंच ने कहा कि इस्तेमाल किए गए हर शब्द को लेकर उसे बहुत सावधान रहना होगा।
ये बेहद संवेदनशील मामले हैं। अदालत में जो कहा जा रहा है, उससे बिना कारण के विवाद बढ़ सकते हैं या गलत मैसेज जा सकता है। इसलिए हमें हर शब्द का बेहद सावधानी से इस्तेमाल करना होगा।
ऐसा मामला पहली बार हमारे सामने आया
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, “ऐसा पहली बार है जब अंतरिम व्यवस्था से जुड़ा मामला हमारे सामने आ रहा है। हाईकोर्ट के आदेश और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में राज्य की बेबसी पर भी ध्यान दिया जा रहा है। हमारी राय है कि अभी जो भी व्यवस्था लागू है, उसके साथ ही इस मामले को 10 से 15 दिनों के भीतर किसी उपयुक्त बेंच के सामने लिस्ट किया जा सकता है।”
मुस्लिम पक्ष ने SC से किया था जल्द सुनवाई का आग्रह
बता दें कि, मुस्लिम पक्ष के याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट हुजेफा अहमदी और एडवोकेट निजाम पाशा ने सोमवार को बेंच से इन याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई का आग्रह किया था। इस पर सीजीआई की अगुवाई वाली बेंच ने कहा था कि याचिकाओं में तकनीकी खामियों को दूर किए जाने के बाद उन्हें उचित बेंच के समक्ष जल्द सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। इस बीच हिंदू पक्ष ने भी एहतियात के तौर पर सुप्रीम कोर्ट में पहले ही कैविएट दायर कर दी है, ताकि किसी भी अंतरिम आदेश से पहले उसका पक्ष भी सुना जा सके।
हाईकोर्ट ने 2 महीने पहले सुनाया था फैसला
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 15 मई को फैसला सुनाया था कि धार जिले में विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर देवी सरस्वती को समर्पित एक मंदिर है। कोर्ट ने इसके अलावा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के दशकों पुराने उस आदेश को भी रद्द कर दिया था, जिसमें मुस्लिम समुदाय को इस जगह पर शुक्रवार की नमाज पढ़ने की इजाजत दी गई थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि केंद्र और एएसआई भोजशाला परिसर के प्रशासन और प्रबंधन के बारे में फैसला ले सकते हैं। हिंदू समुदाय भोजशाला को देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष 11वीं सदी की इस इमारत को कमाल मौला मस्जिद कहता है। यह विवादित परिसर एएसआई के संरक्षण में है।


