मायके आने से 3 दिन पहले हो गई मौत, किस दबाव में बेटी को नहीं ला रहे थे वापस; ट्विशा के पिता ने बताया

लाइव हिन्दुस्तान, भोपाल
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ट्विशा अपनी मां से लगातार गुहार लगा रही थीं कि वह भोपाल में अपने पति के घर पर नहीं रहना चाहती है। वह नोएडा में अपने मायके वापस आना चाहती हैं। जब तक उनके टिकट बुक हुए, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। ट्विशा के पिता ने कहा कि बहुत गलत हो गया। उसे 15 मई को घर वापस लौटना था।

मायके आने से 3 दिन पहले हो गई मौत, किस दबाव में बेटी को नहीं ला रहे थे वापस; ट्विशा के पिता ने बताया

भोपाल में नोएडा ट्विशा की मौत के मामले में तरह-तरह की बातें सामने आ रही हैं। वाट्सअप पर अपनी मां से किए गए चैट में उसे गुहार लगाते देखा गया है। वह अपनी मां से लगातार गुहार लगा रही थीं कि वह भोपाल में अपने पति के घर पर नहीं रहना चाहती है। वह नोएडा में अपने मायके वापस आना चाहती हैं। जब तक उनके टिकट बुक हुए, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। ट्विशा के पिता ने कहा कि बहुत गलत हो गया। साथ ही उन्होंने बताया कि किस तरह के दबाव में उन्होंने उसे वापस लाने में देर कर दी। एनडीटीवी के अनुसार, ट्विशा शर्मा के पिता नव निधि शर्मा ने बताया कि ट्विशा को ससुराल में लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। उसे 15 मई को वापस अपने घर नोएडा लौटना था। ट्विशा 12 मई को भोपाल में अपने ससुराल में मृत पाई गई।

हमें उसे उस घर में नहीं छोड़ना चाहिए था

ट्विशा के पिता ने दावा किया कि उनकी बेटी के साथ कई तरह का दुर्व्यवहार किया जा रहा था। ट्विशा और उसकी मां के बीच हुई वाट्सअप चैट से पता चला है कि वह अपनी शादी में फंसा हुआ महसूस कर रही थीं। चैट के अनुसार, ससुराल वाले उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। दहेज के लिए उसका उत्पीड़न किया जा रहा था। ट्विशा की मां रेखा शर्मा ने आंसू रोकते हुए कहा कि मुझे इस बात का गहरा अफसोस है कि मैं पहले क्यों नहीं आई। पिता ने भी कहा कि हमें उसे उस जगह से निकाल लेना चाहिए था। हमें उसे उस घर में नहीं छोड़ना चाहिए था।

सामाजिक दबाव को जिम्मेदार ठहराया

पिता ने इसके लिए मध्यम-वर्गीय मानसिकता और सामाजिक दबाव को जिम्मेदार ठहराया। पिता ने कहा कि हमारी परंपरा की सबसे बड़ी बदकिस्मती यह है कि हर मध्यम-वर्गीय परिवार चाहता है कि शादी सफल हो। सामाजिक दबाव इतना ज्यादा होता है कि लोग कहते हैं अभी तो शादी को सिर्फ पांच महीने ही हुए हैं। यह तो नई शादी है। कोई बात नहीं, कोई हल निकालते हैं। कोई भी कभी यह सोचता ही नहीं कि शादी को बस टूट जाने देना चाहिए। पिता ने ये बातें तब कहीं जब उनसे पूछा गया कि क्या परिवार ने ट्विशा पर शादी में तालमेल बिठाने के लिए दबाव डाला था।

प्लीज आओ और मुझे यहां से ले जाओ

चैट्स के मुताबिक 30 अप्रैल को ट्विशा ने अपनी मां से पूछा कि आपने मुझे भोपाल क्यों भेजा? वह मुझसे बात नहीं कर रहा है। 7 मई के मैसेज में ट्विशा ने अपनी मां को लिखा कि प्लीज आओ और कल मुझे यहां से ले जाओ। पिता ने कहा कि वह तलाक के बारे में बात कर रही थी। कह रही थी कि पापा, अगर बात नहीं बनी तो मैं उसे छोड़ दूंगी। मैं पीछे नहीं हटूंगी। ट्विशा ने अपनी मां से एक बातचीत के दौरान कहा था कि मैं इस तरह नहीं जीना चाहती।

'लव यू' और 'मिस यू' लिखने पर चिढ़ता था पति

ट्विशा की मां रेखा शर्मा ने अपनी बेटी की बात बताते हुए कहा कि जब भी उसे घर से कोई फोन आता था तो उसका पति उसे ताना मारता था। कहता था कि मां बहुत ज्यादा फोन करती हैं। जब मैं अपने मैसेज के आखिर में 'लव यू टुकटुक' या 'मिस यू टुकटुक' लिखती थी तो समर्थ चिढ़ जाता था। कहता था कि तुम्हारी मां 'लव यू' और 'मिस यू' बहुत ज्यादा लिखती हैं। उन्होंने अपना आंसू पोछते हुए कहा कि अपनी औलाद को भला कौन ऐसा नहीं लिखेगा? दुखी मां ने कहा कि अब सब कुछ खत्म हो गया। अब मैं किसे लिखूंगी?

इंसाफ के लिए लड़ेगा परिवार

वहीं, ट्विशा के भाई हर्षित ने कहा कि परिवार इंसाफ के लिए लड़ेगा। कहा कि हम यहां लड़ने के लिए हैं और हम लड़ेंगे। सोमवार को भोपाल पुलिस ने ट्विशा के पति के बारे में कोई भी जानकारी देने वाले को 10000 रुपए का नकद इनाम देने का ऐलान किया। ट्विशा की चचेरी बहन मीनाक्षी ने आरोप लगाया है कि उत्पीड़न तब अपने चरम पर पहुंच गया जब ट्विशा की 'वर्क-फ़्रॉम-होम' वाली नौकरी चली गई और वह गर्भवती हो गई। उसके पति ने उस बच्चे को अपना मानने से इनकार कर दिया। बता दें कि 2024 में एक डेटिंग ऐप पर ट्विशा की मुलाकात समर्थ सिंह से हुई थी। एक साल बाद दिसंबर 2025 में दोनों ने शादी कर ली थी।

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।

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