भोपाल में गूंजा ज्ञान और संवाद का स्वर, 350 से अधिक शोधार्थी और विद्वान हुए शामिल
समागम में देशभर से आए शोधार्थियों, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने सहभागिता की। 14 फरवरी तक चलने वाले इस आयोजन में शोध, विज्ञान और नवाचार के विभिन्न आयामों पर विमर्श होगा।

प्रख्यात चिंतक और विचारक सुरेश सोनी ने कहा कि वर्तमान अकादमिक चिंतन यूरोप केंद्रित है। इस विचार का ग्रेविटेशनल फोर्स भारत के बाहर है। यूरोप में विषयों का वर्गीकरण ऐसा किया गया है जो भारत में नहीं है। शोध के लिये इसे भारत केंद्रित बनाना होगा। भारत की शोध दृष्टि समग्रता में है, विषयों को खंड-खंड देखने की नहीं है।
सोनी दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान द्वारा मेपकास्ट में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय शोधार्थी समागम 2026 के उद्घाटन क्षेत्र में बीच वक्तव्य दे रहे थे। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा और शोध के लिए दृष्टि, उत्तरदायित्व और कार्य योजना पर विस्तार से प्रकाश डाला। विकसित भारत के लिए विभिन्न विषयों में शोध और इस विचार के महत्व को स्पष्ट किया उन्होंने कहा कि हमारा शोध न तो पुराने की छाया हो और ना ही रूस और अमेरिका की प्रतिकृति बने। हमें अकादमिक जगत में इंटरनल वैल्यूज को ध्यान में रखकर शोध करना चाहिए। पाश्चात्य समाजशास्त्री विचारों ने समाज को विकृत रूप में प्रस्तुत किया है। भारतीय समाज का ताना-बाना ऐसा नहीं है। भारत के गांव में ब्राह्मण के विवाह के अवसर पर कुमार की चाक से मिट्टी लाने की परंपरा रही है।
शोध ऐसा हो, जो सबकी सोच ही बदल दें : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
उद्धाटन सत्र के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि शोध केवल अकादमिक गतिविधि नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की दिशा बदलने वाली शक्ति है। शोध ऐसा होना चाहिए जो नई दृष्टि और नई दिशा प्रदान कर सबकी सोच बदल दे। उन्होंने कहा कि विज्ञान के विकास में ही देश का समग्र विकास निहित है और मध्यप्रदेश को शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में शोध की परंपरा समग्र कल्याण पर आधारित रही है, एकल शोध पर नहीं। शोध समाज आधारित होना चाहिए, जिसमें राष्ट्रहित सर्वोपरि हो। उन्होंने शोधार्थियों से आह्वान किया कि वे परंपरागत सीमाओं से आगे बढ़कर नवीन वैज्ञानिक दृष्टि के साथ अनुसंधान करें।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान की रिसर्च फेलोशिप के पोस्टर और वेबसाइट का विमोचन किया। साथ ही संस्थान द्वारा प्रकाशित सात पुस्तकों का लोकार्पण किया। उन्होंने "महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम" वेबसाइट, महाकाल ब्रोशर तथा 41वें मध्यप्रदेश युवा वैज्ञानिक सम्मेलन एवं विज्ञान उत्सव के पोस्टर का भी विमोचन किया।
समागम में देशभर से आए शोधार्थियों, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने सहभागिता की। 14 फरवरी तक चलने वाले इस आयोजन में शोध, विज्ञान और नवाचार के विभिन्न आयामों पर विमर्श होगा।
कार्यक्रम में आचार्य मिथलेशनंदिनीशरण महाराज, वरिष्ठ चिंतक सुरेश सोनी, भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के अध्यक्ष प्रो. मधुकर एस. पड़वी, उच्च शिक्षा एवं आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार सहित अनेक विशिष्टजन उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने विज्ञान भवन परिसर में पौधरोपण भी किया।
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