डेटिंग ऐप से मुलाकात, 6 महीने बाद शादी और फिर दुखद अंत; भोपाल में नोएडा की ट्विशा के साथ क्या हुआ
डेटिंग ऐप के जरिए शुरू हुए रिश्ते का शादी के छह महीने से भी कम समय में दुखद अंत हो गया। भोपाल में नोएडा की ट्विशा शर्मा की मौत के बाद उसके परिवार ने दहेज उत्पीड़न, मारपीट और हत्या के आरोप लगाए हैं। 31 साल की यह महिला 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में अपने ससुराल में फंदे से लटकी हुई मिली।

डेटिंग ऐप के जरिए शुरू हुए रिश्ते का शादी के छह महीने से भी कम समय में दुखद अंत हो गया। भोपाल में नोएडा की ट्विशा शर्मा की मौत के बाद उसके परिवार ने दहेज उत्पीड़न, मारपीट और हत्या के आरोप लगाए हैं। 31 साल की यह महिला 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में अपने ससुराल में फंदे से लटकी हुई मिली। पुलिस ने बताया कि उसने दिसंबर 2025 में भोपाल के एक वकील से शादी की थी। दोनों की मुलाकात पिछले साल एक डेटिंग ऐप के जरिए हुई थी। उसका पति एक पूर्व सेशन जज का बेटा है।
अपने पति से कैसे मिली द्विशा
पुलिस के अनुसार, मूलरूप से नोएडा की रहने वाली यह महिला 2024 में एक डेटिंग ऐप के जरिए उस व्यक्ति से मिली। बाद में उनका रिश्ता शादी तक पहुंचा और दिसंबर 2025 में दोनों ने शादी कर ली। शादी के बाद वह भोपाल चली गई और बाघ मुगालिया एक्सटेंशन कटारा हिल्स इलाके में अपने पति और उसके परिवार के साथ उनके घर पर रहने लगी। हालांकि, महिला के रिश्तेदारों का दावा है कि वह भोपाल में खुश नहीं थी और नोएडा वापस लौटना चाहती थी।
मौत से कुछ देर पहले की थी बात
परिवार वालों के अनुसार, वह लगातार उनके साथ संपर्क में थी और मंगलवार रात अपनी मौत से कुछ ही समय पहले तक उसने उनसे बात की थी। उसके पिता ने आरोप लगाया कि घटना से करीब 30 मिनट पहले उसने उनसे बात की थी और अपने पति तथा सास द्वारा परेशान किए जाने की शिकायत की थी। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि उसने उन्हें बताया था कि उसके पति ने उसके साथ मारपीट की थी।
शरीर पर चोट के निशान का दावा
पुलिस ने इस मामले की जांच संदिग्ध आत्महत्या के तौर पर शुरू की। हालांकि, उसके परिवार ने किसी साजिश का आरोप लगाया और दावा किया कि उसके शरीर पर चोट के निशान थे। उन्होंने पति और उसकी मां पर उसकी हत्या करने का आरोप लगाया। परिवार ने एम्स भोपाल में किए गए पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच अधिकारी ने मेडिकल रिपोर्ट में बताए गए अहम सबूतों को फोरेंसिक जांच के लिए जमा नहीं किया।
महिला की मौत के बाद पति और उसकी मां के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 80(2) के तहत दहेज से जुड़ी मौत का मामला दर्ज किया गया है। साथ ही परिवार वालों के आरोपों की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है।
पति को गिरफ्तार करने के प्रयास
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, एसआईटी का नेतृत्व कर रहे सहायक पुलिस आयुक्त रजनीश कश्यप ने बताया कि जांच में दहेज उत्पीड़न, शारीरिक हमले और महिला की मौत के बाद सबूतों को मिटाने की कथित कोशिशों के आरोपों की जांच की जाएगी। पुलिस ने यह भी बताया कि महिला के पति का पता लगाने और उसे गिरफ्तार करने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।
CM आवास के बाहर प्रदर्शन
रविवार को महिला के परिवार ने भोपाल में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के आवास के बाहर प्रदर्शन किया। परिवार ने मांग की कि एम्स दिल्ली में दूसरा पोस्टमॉर्टम कराया जाए। परिवार ने दावा किया कि महिला का शव पांच दिनों तक एम्स भोपाल की मॉर्चरी में पड़ा रहा। बाद में उनके पिता और भाई ने बताया कि मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी। परिवार ने यह भी मांग की है कि इस मामले की कानूनी कार्यवाही राज्य से बाहर ट्रांसफर किया जाए।
ससुर को जमानत मिली
इस बीच, भोपाल की एक जिला अदालत ने शनिवार को इस मामले के संबंध में पीड़िता के ससुर (सेवानिवृत्त जिला प्रधान न्यायाधीश) को अंतरिम जमानत दे दी। पति की अग्रिम जमानत याचिका पर सोमवार को सुनवाई होनी है।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
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