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भोपाल में खतरनाक कार्बाइड गन से 60 से ज्यादा बच्चे घायल, कई की आंखें खतरे में

भोपाल में खतरनाक कार्बाइड गन से 60 से ज्यादा बच्चे घायल, कई की आंखें खतरे में

संक्षेप:

भोपाल में दीपावली पर खतरनाक कैल्शियम कार्बाइड गन के इस्तेमाल से 60 से अधिक बच्चे गंभीर रूप से घायल होकर अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनमें से कई की आंखें चोटिल हुई हैं।

Thu, 23 Oct 2025 01:16 PMAnubhav Shakya भोपाल, भाषा
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भोपाल में इस दीपावली का उल्लास कुछ बच्चों और उनके परिवारों के लिए दुखद याद बन गया। खतरनाक कैल्शियम कार्बाइड गन के इस्तेमाल ने राजधानी में 60 से अधिक लोगों को अस्पताल पहुंचा दिया। इनमें ज्यादातर 8 से 14 साल के बच्चे हैं, जिनके लिए दीपावली की चमक अब आंसुओं और चोटों की कहानी बन गई है।

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खतरनाक गन से मासूम बने शिकार

कैल्शियम कार्बाइड, प्लास्टिक पाइप और गैस लाइटर से बनी ये देसी गन इस बार भोपाल में खूब प्रचलन में थी। लेकिन इसके पीछे छिपा खतरा किसी ने नहीं सोचा। जैसे ही कार्बाइड पानी के संपर्क में आता है, यह एसिटिलीन गैस बनाता है और चिंगारी पड़ते ही विस्फोट होता है। विस्फोट से टूटने वाले प्लास्टिक पाइप के छोटे-छोटे टुकड़े छर्रों की तरह शरीर में घुसकर गंभीर चोटें पहुंचाते हैं। खासकर आंखों, चेहरे और त्वचा को नुकसान होता है।

भोपाल के सीएमएचओ मनीष शर्मा ने बताया, "यह कार्बाइड पाइप गन बेहद खतरनाक है। इसके कारण चोटिल हुए 60 लोगों का इलाज अभी भी भोपाल के विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है। सभी मरीज सुरक्षित हैं, लेकिन कुछ के चेहरे झुलस गए हैं और कुछ की आंखों की रोशनी खतरे में है।

अस्पतालों में भरे मासूम चेहरे

हमीदिया अस्पताल, जेपी अस्पताल, सेवा सदन और एम्स में घायल बच्चों की भीड़ है। दीपावली के अगले दिन भोपाल में ऐसे 150 से अधिक मामले सामने आए, जिनमें से कई को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया। लेकिन कुछ बच्चों की हालत गंभीर बनी हुई है। एम्स में भर्ती एक 12 वर्षीय बच्चे की आंखों की रोशनी बचाने के लिए डॉक्टर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। हमीदिया अस्पताल में भी दो बच्चों की आंखों का इलाज जारी है, जहां कुल 10 बच्चे भर्ती हैं।

हमीदिया अस्पताल में भर्ती 14 साल के हेमंत पंथी और 15 साल के आरिस के परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा है। आरिस के पिता सरीख खान ने कहा, "ऐसी खतरनाक गन बाजार में बिकनी ही नहीं चाहिए। इन्हें बनाने और बेचने वालों पर सख्त कार्रवाई हो और बच्चों के इलाज के लिए मुआवजा दिया जाए।" परिजनों ने प्रशासन को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया और ऐसी गन पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग की।

प्रशासन की नाकामी या लापरवाही?

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 18 अक्टूबर को अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए थे कि कार्बाइड गन की बिक्री रोकी जाए। लेकिन बाजारों में ये गन धड़ल्ले से बिकती रहीं। सीएमएचओ शर्मा ने दावा किया कि प्रशासन कार्रवाई कर रहा है, लेकिन हादसों की संख्या सवाल उठाती है कि क्या ये प्रयास पर्याप्त थे?

Anubhav Shakya

लेखक के बारे में

Anubhav Shakya
भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद जी न्यूज से करियर की शुरुआत की। इसके बाद नवभारत टाइम्स में काम किया। फिलहाल लाइव हिंदुस्तान में बतौर सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रहे हैं। किताबों की दुनिया में खोए रहने में मजा आता है। जनसरोकार, सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों में गहरी दिलचस्पी है। एनालिसिस और रिसर्च बेस्ड स्टोरी खूबी है। और पढ़ें
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