भोपाल में भूजल संकट पर कलेक्टर का बड़ा फैसला, नए बोरवेल पर तत्काल रोक; FIR भी होगी

Mar 14, 2026 05:35 pm ISTMohammad Azam लाइव हिन्दुस्तान, भोपाल
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भोपाल में गिरते भूजल स्तर को देखते हुए जिला प्रशासन ने नए बोरवेल की खुदाई पर रोक लगा दी है। इस प्रतिबंध का उल्लंघन करनेवालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की बात कही गई है।

भोपाल में भूजल संकट पर कलेक्टर का बड़ा फैसला, नए बोरवेल पर तत्काल रोक; FIR भी होगी

भोपाल में तेजी से गिरते भूजल स्तर को देखते हुए जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने पूरे जिले को जल-अभाव क्षेत्र घोषित करते हुए निजी ट्यूबवेल (बोरवेल) की नई खुदाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

उल्लंघन करने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई

यह आदेश मध्य प्रदेश पेयजल संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत जारी किया गया है। इसके अनुसार भोपाल जिले के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में बिना अनुमति नए बोरवेल की खुदाई पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें एफआईआर दर्ज होने के साथ दो साल तक की सजा का प्रावधान भी शामिल है।

गंभीर पेयजल संकट की आशंका

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग के अनुसार कृषि, व्यावसायिक और घरेलू जरूरतों के लिए भूजल का अत्यधिक दोहन होने से जलस्तर तेजी से नीचे जा रहा है। कई पेयजल स्रोतों और पुराने ट्यूबवेल में पानी का स्तर खतरनाक रूप से गिर गया है, जिससे आने वाले गर्मी के महीनों में गंभीर पेयजल संकट की आशंका जताई जा रही है।

कलेक्टर की लेनी होगी अनुमति

कलेक्टर ने कहा कि बिना नियंत्रण के बोरवेल की खुदाई भूजल भंडार को तेजी से खत्म कर रही है, जिससे नगर निगम की जल आपूर्ति व्यवस्था और ग्रामीण क्षेत्रों के हैंडपंप भी प्रभावित हो रहे हैं। इससे पहले खरगोन और इंदौर जैसे जिलों में भी गर्मियों के दौरान इसी तरह के मौसमी प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं, जो आमतौर पर जून या जुलाई तक लागू रहते हैं, ताकि जल संसाधनों को बचाया जा सके।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी विभाग यदि सार्वजनिक पेयजल परियोजनाओं के लिए आवश्यक समझें तो वे अनुमति ले सकते हैं। लेकिन निजी व्यक्तियों या संस्थानों को अब बोरवेल खोदने के लिए पहले उपखंड अधिकारी (SDO) या अतिरिक्त कलेक्टर से अनुमति लेनी होगी।

रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर जोर

जिला प्रशासन ने नागरिकों और किसानों से जल संरक्षण अपनाने की अपील की है। इसके तहत वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग), कुशल सिंचाई तकनीक और पानी की बर्बादी रोकने जैसे उपायों पर जोर दिया गया है। साथ ही लोगों को सतही जल स्रोतों और नगर निगम की शुद्ध जल आपूर्ति पर निर्भर रहने की सलाह दी गई है।

प्रशासन को उम्मीद है कि इस प्रतिबंध से भूजल स्तर को स्थिर करने में मदद मिलेगी और बढ़ती आबादी के लिए पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी। फिलहाल आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। इसकी निगरानी के लिए विशेष टीमें तैनात की गई हैं। नागरिक किसी भी अवैध बोरवेल खुदाई की सूचना जिला हेल्पलाइन या PHE कार्यालय को दे सकते हैं।

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