भोजशाला में हिंदुओं को मिली बिना रोक-टोक पूजा की इजाजत; ASI का बड़ा कदम

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भोजशाला पर एएसआई ने शनिवार को एक बड़ा आदेश जारी किया। ASI ने हिंदू समुदाय को बिना किसी रोक-टोक के भोजशाला में पूजा और अध्ययन करने की अनुमति दे दी है। 

भोजशाला में हिंदुओं को मिली बिना रोक-टोक पूजा की इजाजत; ASI का बड़ा कदम

भोजशाला को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ओर से सरस्वती मंदिर घोषित किए जाने के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI ने एक नया आदेश जारी किया है। इसके तहत हिंदू समुदाय को अब इस स्थान पर बिना किसी रोक-टोक के पूजा-अर्चना करने और जाने की पूरी अनुमति दे दी है। ASI के एक अधिकारी ने बताया कि चूंकि भोजशाला देवी वाग्देवी (सरस्वती) को समर्पित एक मंदिर होने के साथ-साथ संस्कृत भाषा, व्याकरण और साहित्य के अध्ययन और अनुसंधान का भी एक केंद्र था इसलिए हिंदू समुदाय को 'अध्ययन की प्राचीन परंपरा और देवी सरस्वती की पूजा-अर्चना के लिए इस स्थान पर बिना किसी रोक-टोक के आने-जाने की अनुमति होगी।

एएसआई की ओर से भोजशाला में हिंदू समुदाय को बिना किसी रोक-टोक के पूजा-अर्चना करने और जाने की पूरी अनुमति ऐसे वक्त में दी गई है जब ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा है कि इस मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का फैसला 1991 के पूजा स्थल कानून की मूल भावना के खिलाफ है। मुस्लिम पक्षकार इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे।

सनद रहे एक दिन पहले ही कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा था कि भोजशाला मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले का अध्ययन किया जाएगा। भोजशाला एएसआई संरक्षित स्मारक है। क्या ऐसे स्मारक में पूजा या इबादत हो सकती है। यह सुप्रीम कोर्ट को ही तय करना है। विवादित परिसरों से जुड़े विषयों में नियम-कानूनों का पालन किया जाना चाहिए।

अप्रैल 2003 में ASI ने सीमित किया था अधिकार

उल्लेखनीय है कि अप्रैल 2003 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने एक आदेश जारी कर के भोजशाला परिसर के भीतर हिंदुओं के पूजा करने के अधिकार को सीमित कर दिया था। साथ ही मुस्लिमों को हर शुक्रवार परिसर में नमाज अदा करने की अनुमति दे दी थी। एक दिन पहले शुक्रवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने एएसआई के अप्रैल 2003 के सारे आदेश रद्द कर दिए थे।

HC ने रद्द कर दी थी नमाज पढ़ने की अनुमति

अदालत ने शुक्रवार को फैसला सुनाते हुए भोजशाला की धार्मिक प्रकृति को हिंदू मान्यता में 'ज्ञान की देवी' वाग्देवी (सरस्वती) के मंदिर के तौर पर तय की। अदालत ने मुस्लिम समुदाय को स्थल पर शुक्रवार को नमाज पढ़ने की अनुमति भी रद्द कर दी। अदालत ने साफ कर दिया कि परमार वंश के राजा भोज की विरासत से जुड़े इस स्थल पर हिंदुओं की पूजा-अर्चना कभी समाप्त ही नहीं हुई। अदालत ने भोजशाला में केवल हिंदुओं को पूजा का अधिकार देने की मांग मान ली। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने 242 पन्नों के अपने आदेश में कहा कि मुस्लिम पक्ष मस्जिद के लिए अलग जमीन के लिए मध्य प्रदेश सरकार से संपर्क कर सकता है।

Krishna Bihari Singh

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Krishna Bihari Singh

कृष्ण बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम का हिस्सा (दिल्ली-NCR, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और गुजरात )


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कृष्ण बिहारी सिंह पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। कृष्ण बिहारी सिंह लाइव हिन्दुस्तान में कार्यरत हैं। वह स्टेट टीम के साथ काम कर रहे हैं। कृष्ण बिहारी सिंह भारतीय मीडिया जगत में केबी उपनाम से चर्चित हैं। यूपी के मऊ जिले से ताल्लुक रखने वाले केबी महाराष्ट्र और हरियाणा में पत्रकारिता कर चुके हैं। मौजूदा वक्त में वह दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय हैं।


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