भोजशाला पर SC पहुंच गया मुस्लिम पक्ष, हाई कोर्ट ने बताया था मां सरस्वती का मंदिर

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। मुस्लिम पक्ष की ओर से शीर्ष अदालत में याचिका दायर की गई है। हाई कोर्ट ने इससे पहले भोजशाला को मां सरस्वती का मंदिर कहा था।

भोजशाला पर SC पहुंच गया मुस्लिम पक्ष, हाई कोर्ट ने बताया था मां सरस्वती का मंदिर

Bhojshala Case in Supreme Court: मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर को लेकर हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। मस्जिद के कार्यवाहक काजी मोइनुद्दीन ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत में अपील दाखिल की है। इससे पहले 15 मई को हाईकोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में कहा था कि भोजशाला परिसर का धार्मिक स्वरूप एक मंदिर का है। कोर्ट ने कहा था कि विवादित क्षेत्र एक संरक्षित स्मारक है और यह मां सरस्वती का मंदिर है।

भोजशाला में पहली बार शुक्रवार को महाआरती

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका से इतर भोजशाला में शुक्रवार को पहली बार मां वाग्देवी की महाआरती और विशेष पूजन का आयोजन किया जा रहा है। 721 वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद यह पहला अवसर है, जब शुक्रवार के दिन भोजशाला परिसर मां वाग्देवी के जयकारों से गूंज उठेगा। पूरे धार अंचल में इसे लेकर उत्सव जैसा माहौल बना हुआ है।

इससे पहले हाई कोर्ट जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के वर्ष 2003 के उस आदेश को भी रद्द कर दिया था, जिसके तहत मुस्लिम पक्ष को परिसर में नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि मुस्लिम पक्ष मस्जिद निर्माण के लिए राज्य सरकार से वैकल्पिक भूमि मांग सकता है।

हाई कोर्ट का फैसला

इससे पहले हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि ऐतिहासिक साहित्य और पुरातात्विक साक्ष्य यह साबित करते हैं कि यह स्थल संस्कृत शिक्षा का प्रमुख केंद्र था और यहां मां सरस्वती का मंदिर मौजूद था। अदालत ने कहा कि उसने अपने निष्कर्ष सुप्रीम कोर्ट के अयोध्या फैसले में तय सिद्धांतों के आधार पर निकाले हैं। कोर्ट ने केंद्र सरकार और ASI को मंदिर के प्रशासन और प्रबंधन पर निर्णय लेने का निर्देश दिया था। हालांकि, ASI को संपत्ति के समग्र प्रशासन और प्रबंधन की जिम्मेदारी जारी रखने को कहा गया।

लंदन से लाई जाएगी मां सरस्वती की प्रतिमा

हाईकोर्ट ने हिंदू पक्ष की उस मांग पर भी टिप्पणी की, जिसमें ब्रिटिश काल में लंदन ले जाई गई मां सरस्वती (वाग्देवी) की प्रतिमा को वापस लाने की मांग की गई थी। अदालत ने कहा कि केंद्र सरकार इस मांग को एक प्रतिनिधित्व के रूप में विचार कर सकती है।

यह फैसला उन कई याचिकाओं पर आया था, जिनमें हिंदू पक्ष ने भोजशाला परिसर को हिंदुओं को सौंपने और परिसर में नमाज पर रोक लगाने की मांग की थी। इन याचिकाओं में एएसआई की 7 अप्रैल 2003 की अधिसूचना को चुनौती दी गई थी, जिसमें मुस्लिमों को परिसर में नमाज की अनुमति दी गई थी और हिंदुओं के पूजा अधिकार सीमित किए गए थे।

बता दें कि वर्ष 2024 में हाईकोर्ट के आदेश पर एएसआई ने परिसर का सर्वे किया था। अपनी रिपोर्ट में कहा था कि मौजूदा ढांचा पुराने मंदिरों के अवशेषों और हिस्सों से निर्मित प्रतीत होता है। इसके बाद हाईकोर्ट ने स्थल का निरीक्षण भी किया था और फिर अपना फैसला सुनाया।

Gaurav Kala

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