‘जिसे मस्जिद माना जा चुका, उसे मंदिर कहना भ्रामक’… धार भोजशाला केस की सुनवाई के दौरान भड़का मुस्लिम पक्ष
मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा मेनन ने कमाल मौला मस्जिद वेलफेयर ट्रस्ट का पक्ष रखते हुए कोर्ट में जोरदार दलीलें पेश कीं। उन्होंने 23 साल पुराने सिविल सूट और वर्ष 2003 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (Archaeological Survey of India) द्वारा दाखिल जवाबों का हवाला दिया है।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में धार स्थित भोजशाला और कमाल मौला मस्जिद विवाद को लेकर चल रही सुनवाई अब तीखे टकराव में बदलती जा रही है। तीसरे हफ्ते की सुनवाई के पहले ही दिन मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में आक्रामक रुख अपनाते हुए साफ शब्दों में कहा “जिसे पहले ही मस्जिद माना जा चुका है, उसे बार-बार मंदिर बताना न सिर्फ भ्रामक है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को गुमराह करने की कोशिश भी है।”
मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा मेनन ने कमाल मौला मस्जिद वेलफेयर ट्रस्ट का पक्ष रखते हुए कोर्ट में जोरदार दलीलें पेश कीं। उन्होंने 23 साल पुराने सिविल सूट और वर्ष 2003 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (Archaeological Survey of India) द्वारा दाखिल जवाबों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि संबंधित संरचना को पहले ही मस्जिद के रूप में दर्ज किया जा चुका है।
कोर्ट में कड़ा तर्क — ‘ढांचे की पहचान बदलना खेल नहीं’
इंदौर हाई कोर्ट की डबल बेंच, जिसमें न्यायमूर्ति विवेक कुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी शामिल हैं, के समक्ष मेनन ने सख्त लहजे में कहा कि किसी भी संरचना की पहचान मनमाने ढंग से बदलना संभव नहीं है। उन्होंने दो टूक कहा कि “भवन कोई जीवित वस्तु नहीं कि उसका स्वरूप इच्छानुसार बदल दिया जाए, इसके लिए ठोस और ठोसतम प्रमाण जरूरी हैं।”
पुरानी मांगों को बताया खारिज , फिर वही राग क्यों?
मुस्लिम पक्ष ने यह भी उजागर किया कि पहले भी इसी तरह की मांगें- जैसे जुमे की नमाज पर रोक और स्थल को मंदिर घोषित करने की मांग कोर्ट में उठाई जा चुकी हैं, जिन्हें राज्य और एएसआई पहले ही खारिज कर चुके हैं। ऐसे में बार-बार वही मुद्दे उठाना सीधे तौर पर न्यायिक समय की बर्बादी और तथ्यों से खिलवाड़ बताया गया।
हिंदू पक्ष भी मैदान में, टकराव और बढ़ेगा
दूसरी ओर, हिंदू पक्ष की ओर से दायर याचिकाओं में हस्तक्षेप आवेदन के जरिए अपनी दलीलें रखी जा रही हैं। दोनों पक्षों के बीच बढ़ती कानूनी जंग अब और तेज होने के संकेत दे रही है।
आगे क्या?
कोर्ट में यह मामला अब निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में दोनों पक्ष अपने-अपने दावों को और धार देंगे, जिससे यह विवाद और अधिक गरमाने की पूरी संभावना है।
गौरतलब है कि मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने पिछले शुक्रवार को अपनी दलीलें पूरी कर ली थीं। उनकी बहस में सर्वे की प्रक्रिया और उससे जुड़े तथ्यों पर सवाल उठाए गए थे।
रिपोर्ट - हेमंत
लेखक के बारे में
Mohitमोहित पिछले 10 साल से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिंदुस्तान में स्टेट टीम के लिए क्षेत्रीय समाचारों और महत्वपूर्ण घटनाओं को कवर कर रहे हैं। वे विशेष रूप से दिल्ली-एनसीआर, उत्तराखंड, झारखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, गुजरात जैसे राज्यों की खबरों को कवर करते हैं।
विस्तृत बायो:
मोहित एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें भारतीय मीडिया जगत के प्रतिष्ठित संस्थानों में एक दशक से ज्यादा का अनुभव हासिल है। वे साल 2016 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्तमान में हिंदुस्तान डिजिटल के साथ कार्यरत, मोहित अपनी लेखनी के जरिए खबरों की गहराई और सत्यता को पाठकों तक पहुंचा रहे हैं। इनका पत्रकारिता का सफर केवल समाचार देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इनके पास जटिल विषयों को सरल और सटीक भाषा में समझाने का विशेष कौशल है। बदलते समय के साथ विजुअल स्टोरीटेलिंग के क्षेत्र में भी महारत हासिल की और न्यूज वेब स्टोरीज के जरिए लाखों पाठकों तक सटीक जानकारी पहुंचाई।
अनुभव:
मोहित साल 2021 से ही हिंदुस्तान डिजिटल से जुड़े हैं। वर्तमान में स्टेट (State) टीम के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वे क्षेत्रीय समाचारों और महत्वपूर्ण घटनाओं की कवरेज कर रहे हैं। इससे पहले वेब स्टोरी टीम में वैल्यू-एडेड कंटेंट तैयार कर चुके हैं। हिंदुस्तान से जुड़ने से पहले जनसत्ता डिजिटल, एनडीटीवी, उमर उजाला डिजिटल में अलग-अलग पदों पर रहते हुए राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राजनीति से जुड़े मुद्दों, ब्रेकिंग न्यूज, स्पोर्ट्स और यूटिलिटी की खबरों के जरिए पाठकों को जागरूक करने का काम कर चुके हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि:
हिंदी पत्रकारिता में मास्टर डिग्री है और देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में ही पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा होने के कारण मोहित के पास खबरों की ठोस समझ है। विशेष रूप से स्पोर्ट्स, ऑटो-टेक और राजनीति जैसे क्षेत्रों में निरंतर रिसर्च और लेखन ने उन्हें इन विषयों पर एक विश्वसनीय 'विषय विशेषज्ञ' बनाया है।
पत्रकारिता का उद्देश्य:
एक दशक के पत्रकारिता सफर और IIMC जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के मूल्यों को आत्मसात करते हुए, मोहित का मानना है कि पत्रकारिता केवल सूचनाओं का प्रसारण नहीं, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में समाज के प्रति एक गहरी जवाबदेही है। ये जवाबदेही निष्पक्ष और तथ्यपरक सूचनाएं देने से पूरी होती है।
विशेषज्ञता
राजनीतिक खबरें
स्पोर्ट्स टेक्नोलॉजी गैजेट्स कंटेट
यूटिलिटी कंटेट
विजुअल स्टोरीटेलिंग


