भोजशाला में नमाज पर लगी रोक के बीच SC ने मुसलमानों को दी एक राहत
देश की सबसे बड़ी अदालत में अब भोजशाला विवाद की रोजाना सुनवाई होगी। देश की सबसे बड़ी अदालत ने मुसलमानों के लिए नमाज स्थल की व्यवस्था करने को कहा है।

मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर को लेकर दशकों से जारी विवाद पर अब देश की सबसे बड़ी अदालत में सुनवाई होगी। सर्वोच्च अदालत ने पिछले दिनों हाई कोर्ट की ओर से मंदिर करार दिए गए भोजशाला पर रोजाना सुनवाई पर सहमति जताई। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर रोक तो नहीं लगाई है, लेकिन मुसलमानों को एक राहत जरूर दी है। अदालत ने मध्य प्रदेश सरकार से परिसर के आसपास किसी खुले स्थान पर शुक्रवार को दोपहर 1-3 बजे के बीच नमाज की व्यवस्था करने को कहा है।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और वी. मोहना की बेंच ने भोजशाला परिसर के पास नमाज की व्यवस्था का आदेश राज्य सरकार को दिया है। अदालत ने कहा, 'दोनों पक्षों के अधिकारों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना यह निर्देश दिया जाता है कि शुक्रवार को 1-3 बजे के बीच नमाज के लिए एक अलग खुला स्थान/परिसर के पास याचिकाकर्ताओं और अन्य (मुसलमानों) को उपलब्ध कराया जा सकता है। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि धार्मिक कार्यों में किसी पक्ष की तरफ से बाधा उत्पन्न ना हो।'
अस्थायी होगी नमाज वाली व्यवस्था, बदलाव से पहले लेगी होगी अनुमति: SC
अदालत ने साफ किया कि यह व्यवस्था अस्थायी होगी और अपील के अंतिम परिणाम पर निर्भर करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) किसी प्रकार के संरचनात्मक परिवर्तन करता है तो उसे अदालत की पूर्व अनुमति लेनी होगी।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भोजशाला विवाद अत्यंत संवेदनशील मामला है और हिंदू तथा मुस्लिम दोनों पक्षों को धर्य रखना चाहिए। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि वह इस मामले की रोजाना सुनवाई करने और इसका समाधान निकालने के लिए तैयार है।
CJI ने कहा- 10-15 दिनों में किसी बेंच को भेजा जाएगा
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, 'अंतरिम व्यवस्था से जुड़ा यह मामला पहली बार हमारे सामने आया है। हाई कोर्ट के आदेश और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में राज्य सरकार की कठिनाइयों को भी ध्यान में रखा जा रहा है। हमारा मानना है कि इस मामले को 10 से 15 दिनों के भीतर उपयुक्त पीठ के सामने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।'
हाई कोर्ट ने लगा दी थी नमाज पर रोक
पिछले दिनों मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भोजशाला विवाद पर फैसला सुनाते हुए कहा था कि धार जिले में स्थित विवादित परिसर देवी सरस्वती का मंदिर है। मुस्लिम पक्ष ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने 15 मई के अपने फैसले में कहा था कि धार जिले का विवादित भोजशाला–कमाल मौला मस्जिद परिसर देवी सरस्वती को समर्पित एक मंदिर है। साथ ही अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के उस कई दशक पुराने आदेश को भी रद्द कर दिया था, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को इस परिसर में शुक्रवार की नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी।
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