MP में बाबा साहब के अपमान पर FIR; फोटो जलाई, मुर्दाबाद के नारे लगाए, वीडियो भी वायरल किया
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की भ्रामक, भड़काऊ, आपत्तिजनक अथवा कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने वाली सामग्री सोशल मीडिया पर अपलोड या शेयर करने से बचें। ऐसी गतिविधियां दंडनीय अपराध हैं, जिनके लिए सख्त कानूनी कार्यवाही का प्रावधान है।

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में साल के पहले दिन सवर्ण समाज के कुछ युवाओं ने एक जुलूस निकालते हुए संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव अंबेडकर का फोटो जलाया था, साथ ही सकपाल (अंबेडकर का एक नाम) मुर्दाबाद के नारे भी लगाए थे। इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद दलित समाज के लोगों में काफी गुस्सा देखा जा रहा था, जिसके चलते पुलिस ने इस मामले में शिकायत प्राप्त होते ही ऐक्शन लेते हुए स्थानीय वकील अनिल मिश्रा समेत 7 लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज कर ली है, साथ ही मिश्रा को भी गिरफ्तार कर लिया है। इस बारे में ग्वालियर पुलिस अधीक्षक धरमवीर सिंह ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी।
इन 7 लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ मामला
पुलिस ने इस घटना को लेकर वकील अनिल मिश्रा के अलावा मोहित ऋषिश्वर उर्फ मोहित शर्मा, अमित दुबे, ध्यानेन्द्र शर्मा, कुलदीप कांकेरिया, गौरव व्यास और अमित भदौरिया के खिलाफ नामजद प्रकरण दर्ज किया है। इनमें से मिश्रा को गुरुवार रात गिरफ्तार भी कर लिया गया।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ SC/ST एक्ट की धारा 3 (1)(u), 3(1)(v) और भारतीय न्याय संहिता की धारा 223(b), 196(1)(a),196(1)(b), 353(1)(c), 353(2),190 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर जांच शुरू कर दी है।
शिकायतकर्ता बोले- हमारी भावनाओं को ठेस पहुंची
इस मामले को लेकर शिकायतकर्ताओं ने पुलिस को बताया कि रक्षक मोर्चा द्वारा अनिल मिश्रा के नेतृत्व में 1 जनवरी गुरुवार दोपहर करीब 1 से 2 बजे के आसपास शहर के पटेल नगर तिराहा के पास स्थित सिटी सेंटर पर एक जुलूस निकाला गया, इस दौरान इन लोगों ने हमारी आस्था के प्रतीक श्रृद्धेय बाबा साहब डॉ भीमराव अम्बेडकर जी के चित्र को जलाया गया एवं जलाकर पैरों तले कुचला गया और सकपाल मुर्दाबाद, सकपाल मुर्दाबाद के नारे लगाए।
शिकायतकर्ता ने बताया कि भारत रत्न बाबा साहब हमारे समाज के लिए परम श्रद्धेय और पूजनीय हैं। उनके फोटो को जलाना एवं पैरों तले कुचले जाने से हमें बहुत दुख हुआ है, हमारी भावनाएं आहत हुई हैं। साथ ही इस कृत्य के कारण सामाजिक वैमनस्यता, समुदायों के बीच जातिगत असुरक्षा और भय की भावना और लोक शांति में विघ्न्न उत्पन्न हुआ है। उन्होंने इसे जातीय संघर्ष फैलाने के लिए षडयंत्र बताते हुए पुलिस से कठोर कार्रवाई की मांग की।
पुलिस बोली- हम कर रहे कठोर कार्रवाई
मामले की जानकारी देते हुए पुलिस अधीक्षक सिंह ने बताया, 'ग्वालियर पुलिस द्वारा सोशल मीडिया पर प्रसारित एक आपत्तिजनक वीडियो का संज्ञान लेते हुए 7 नामजद आरोपियों व अन्य के विरूद्ध प्रकरण पंजीबद्ध कर लिया गया है, साथ ही मुख्य आरोपी को पुलिस हिरासत में लेकर कठोर वैधानिक कार्यवाही की जा रही है।'
सोशल मीडिया की निगरानी कर रही पुलिस
इसके साथ ही पुलिस अधीक्षक ने बताया कि ग्वालियर पुलिस द्वारा लगातार सोशल मीडिया की निगरानी की जा रही है और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने, वैमनस्यता फैलाने एवं लोक-शांति भंग करने वाली सामग्री प्रसारित करने वालों के सोशल मीडिया अकाउंट ब्लॉक कराए जा रहे हैं, साथ ही उनके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
नागरिकों से अपील करते हुए दी चेतावनी
इसके साथ ही पुलिस अधिकारी ने सार्वजनिक अपील करते हुए लिखा, 'सभी नागरिकों से अपील है कि किसी भी प्रकार की भ्रामक, भड़काऊ, आपत्तिजनक अथवा कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने वाली सामग्री सोशल मीडिया पर अपलोड या शेयर करने से बचें। ऐसी गतिविधियाँ दंडनीय अपराध हैं, जिनके लिए सख्त कानूनी कार्यवाही का प्रावधान है।'
आरोपियों के समर्थन में उतरे सवर्ण संगठन
उधर फोटो जलाने के मामले में सवर्ण समाज के लोगों पर मामला दर्ज होते ही उनके समर्थक भी सक्रिय हो गए हैं। आरोपियों का बचाव करते हुए उन्होंने इसे क्रिया की प्रतिक्रिया बताया है। उनका कहना है कि जब धर्मग्रंथ (मनुस्मृति) जलाए जाते हैं, ब्राह्मणों की सवर्णों की बेटी मांगी जाती है, तब पुलिस FIR नहीं करती है, लेकिन सिर्फ तस्वीर जलाने पर मामला दर्ज हो जाता है। उन्होंने इसे पुलिस का दोगलापन बताया।
स्वामी आनंद स्वरूप ने बताया एकतरफा कार्रवाई
पुलिस कार्रवाई का विरोध भी शुरू हो गया है। इसे एकतरफा कार्रवाई बताते हुए बेंगलुरु स्थित शाम्भवी पीठ के पीठाधिपति और शंकराचार्य परिषद के अध्यक्ष स्वामी आनन्द स्वरूप ने कहा, 'मनुस्मृति जलाने पर चुप्पी और प्रतिक्रिया करने वालों पर कार्रवाई, यह न्याय नहीं, पक्षपात है। ग्वालियर में हुई गिरफ्तारी सवाल खड़े करती है कि कानून सबके लिए बराबर है या नहीं। अगर क्रिया पर कार्रवाई नहीं होगी, तो प्रतिक्रिया पर भी एकतरफा दमन स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह आवाज दबेगी नहीं, अन्याय के खिलाफ संघर्ष और तेज होगा।'

लेखक के बारे में
Sourabh Jainसौरभ जैन पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम में कार्यरत हैं। वह दिल्ली-एनसीआर, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, झारखंड, हिमाचल प्रदेश और गुजरात से जुड़े घटनाक्रम पर खबरें और विश्लेषण लिखते हैं।
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