भोजशाला 700 साल से मस्जिद, धार विवाद पर ओवैसी का हमला, बोले- बाबरी मस्जिद जैसा फैसला

Aditi Sharma लाइव हिन्दुस्तान, धार
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ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश के इंदौर हाई कोर्ट के धार जिले के भोजशाला परिसर से जुड़े हालिया आदेश की कड़ी आलोचना की है। 

भोजशाला 700 साल से मस्जिद, धार विवाद पर ओवैसी का हमला, बोले- बाबरी मस्जिद जैसा फैसला

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश के इंदौर हाई कोर्ट के धार जिले के भोजशाला परिसर से जुड़े हालिया आदेश की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह निर्णय भारत के संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। शुक्रवार को हैदराबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए ओवैसी ने तर्क दिया कि यह फैसला बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद की कानूनी दिशा को दर्शाता है।

उन्होंने कहा, यह फैसला संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद पर दिए गए फैसले ने एक धर्म को सर्वोच्चता प्रदान की है, जबकि अन्य धर्मों के पूजा-पाठ के अधिकारों को प्रभावी रूप से कमजोर किया है। इसके अलावा, इस फैसले ने एक नई राह खोल दी है। कल कोई भी अलग अलग जगहों की पवित्रता को चुनौती देने के लिए आगे आ सकता है।

उन्होंने न्यायपालिका के रुख में विरोधाभास का आरोप लगाते हुए कहा कि जहां हाई कोर्ट ने बाबरी मस्जिद मामले में प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट को संविधान के 'मूल ढांचे' से जोड़ा था, वहीं अब ऐसा लगता है कि उस सिद्धांत की पूरी तरह से अनदेखी कर दी गई है। उन्होंने पत्रकारों से कहा, यह विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि बाबरी मस्जिद-राम मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने खुद प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट के महत्व को स्वीकार करते हुए इसे संविधान के 'मूल ढांचे' से जोड़ा था, एक ऐसा सिद्धांत जिसकी कोर्ट ने आज पूरी तरह से अनदेखी कर दी है। प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट का मजाक उड़ाया जा रहा है।

बाबरी मस्जिद जैसा फैसला

बाबरी मस्जिद मामले से सीधा संबंध बताते हुए ओवैसी ने कहा, यह फैसला बिल्कुल बाबरी मस्जिद मामले जैसा निकला है। बाबरी मस्जिद मामले में अदालत ने कहा था कि मुसलमानों का उस जगह पर कोई कब्जा नहीं है। लेकिन इस मामले में, आज तक मुसलमानों का ही उस जगह पर कब्जा रहा है। उन्होंने कहा, भोजशाला 700 साल से मस्जिद है।

उन्होंने कहा, मैंने पहले ही कहा था कि बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद पर आया फैसला गलत था, यह फैसला पूरी तरह से आस्था के आधार पर दिया गया था। मैंने चेतावनी दी थी कि उस समय दिया गया यह फैसला कई ऐसे ही मुद्दों के सामने आने का रास्ता खोलेगा। उस समय कई लोगों ने मुझसे चुप रहने को कहा था।

उन लोगों को संबोधित करते हुए जिन्होंने उस समय उन्हें चुप रहने के लिए कहा था, उन्होंने आगे कहा, आज जो हो रहा है उसे देखिए। जिस फैसले का मैंने उदाहरण देते हुए चेतावनी दी थी कि यह कई ऐसे घटनाक्रमों का द्वार खोलेगा, अब उसी फैसले के कारण वैसी ही राहत मिली है।

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अदिति शर्मा

अदिति शर्मा डिजिटल मीडिया की एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें लाइव हिंदुस्तान, TV9 भारतवर्ष और न्यूज नेशन जैसे संस्थानों में 9 वर्षों का अनुभव है। BCA और MMC की शैक्षणिक पृष्ठभूमि के साथ, वे तकनीक और पत्रकारिता के मूल्यों का सटीक संतुलन बनाती हैं। उनकी विशेषज्ञता राजनीति, अपराध और शोध-आधारित लेखन में है, जहां वे सकारात्मक प्रभाव डालने वाली विश्वसनीय पत्रकारिता को प्राथमिकता देती हैं।


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डिजिटल मीडिया के इस दौर में, अदिति शर्मा पिछले 9 सालों से सूचनाओं को खबरों में और खबरों को अटूट विश्वसनीयता में बदलने का काम कर रही हैं। वर्तमान में 'लाइव हिंदुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत रहते हुए, उनकी पत्रकारिता का मुख्य आधार रफ्तार के साथ गहरी सटीकता बनाए रखना रहा है। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि तकनीकी और मीडिया शिक्षा का एक संतुलित मेल है। उन्होंने वेस्ट बंगाल स्टेट यूनिवर्सिटी से BCA किया है। इसके बाद उन्होंने इंडिया टुडे मीडिया इंस्टीट्यूट (ITMI) से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की, जिसने उनके पत्रकारिता कौशल को निखारा।


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