
इंदौर में दूषित पानी से 7 की मौत, 149 लोग अस्पताल में भर्ती; एक अधिकारी बर्खास्त और 2 सस्पेंड
मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी पीने से पिछले कुछ दिनों में 7 लोगों की मौत हो गई और करीब 150 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। दूषित पानी से होने वाली मौतों को लेकर हो रही आलोचनाओं के बीच राज्य सरकार ने आपातकालीन उपाय तेज कर दिया है।
मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी पीने से पिछले कुछ दिनों में 7 लोगों की मौत हो गई और करीब 150 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। दूषित पानी से होने वाली मौतों को लेकर हो रही आलोचनाओं के बीच राज्य सरकार ने आपातकालीन उपाय तेज कर दिया है। खबरों के मुताबिक, इस मामले में एक अधिकारी को बर्खास्त कर दिया गया और दो अन्य को सस्पेंड कर दिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि यह घटना शौचालय के नीचे स्थित पानी के मेन लाइन में रिसाव के कारण हुई।
इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने पीटीआई को बताया कि दिसंबर से अब तक दूषित पानी पीने से इंदौर में 7 लोगों की मौत हो चुकी है। भार्गव ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने इस बीमारी के प्रकोप से 3 मौतों की पुष्टि की है, जबकि अस्पतालों में भर्ती कराए गए 4 और लोगों की भी मौत हो गई है।
इस बीच, जिला मजिस्ट्रेट शिवम वर्मा ने बताया कि डॉक्टरों ने इस बीमारी के प्रकोप से 4 मौतों की पुष्टि की है। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने यह भी बताया कि 27 अस्पतालों में 149 लोगों को भर्ती कराया गया है।
इन मौतों के पीछे क्या कारण है?
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी माधव प्रसाद हसनी ने पहले एचटी को बताया था कि मौतें दस्त के कारण हुईं। अधिकारी ने कहा कि मरीजों ने बताया कि दूषित पानी पीने के बाद उन्हें उल्टी, दस्त और निर्जलीकरण की शिकायत हुई। उन्होंने यह भी बताया कि शौचालय के नीचे पानी के मेन पाइपलाइन में रिसाव के कारण पानी दूषित हुआ होगा। अधिकारियों ने बताया कि भागीरथपुरा में मुख्य जल आपूर्ति पाइपलाइन में रिसाव पाया गया, जिसके ऊपर शौचालय बना हुआ था। संभवतः इसी वजह से दूषित पानी पीने के पानी में मिल गया।
दो अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई
जोनल अधिकारी शालिग्राम शितोले और प्रभारी सहायक अभियंता योगेश जोशी को सस्पेंड कर दिया गया है, जबकि उप अभियंता शुभम श्रीवास्तव को बर्खास्त कर दिया गया है। स्थानीय पार्षद कमल बघेला ने बताया कि यह मामला तब सामने आया जब स्थानीय लोगों ने 25 दिसंबर को पानी में असामान्य गंध की शिकायत की। पिछले कुछ दिनों से समस्याएं चल रही थीं, लेकिन 25 दिसंबर को स्थिति गंभीर हो गई।
जैसा कि पहले बताया गया था, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएचएमओ) माधव प्रसाद हसनी ने बताया कि प्रकोप की सूचना मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने 2703 घरों का सर्वेक्षण किया और लगभग 12000 लोगों की जांच की। मामले की जांच के लिए आईएएस अधिकारी नवजीवन पंवार के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया है।
मुख्यमंत्री ने आपातकालीन स्थिति बताया
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बुधवार को इंदौर के विभिन्न अस्पतालों का दौरा कर मरीजों के स्वास्थ्य का जायजा लिया। उन्होंने इसे आपातकालीन स्थिति बताया। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार समय पर इलाज सुनिश्चित करने के लिए प्रयास कर रही है। यादव ने कहा कि हम इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने को तैयार हैं। इससे पहले उन्होंने मृतकों के परिवारों को 2 लाख रुपए प्रति परिवार मुआवजे की घोषणा की थी।
हाई कोर्ट ने स्टेटस रिपोर्ट मांगा
वहीं, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को दूषित पानी पीने से इसी तरह के लक्षण महसूस कर रहे लोगों को मुफ्त इलाज मुहैया कराने का निर्देश दिया है। साथ ही इस संबंध में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार से 2 जनवरी तक स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा है।





