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जब भरी सभा में ‘फिराक' ने गटकी शराब और जीत गए ‘सिंहासन'

firaq gorakhpuri

आजाद भारत के पहले आम चुनाव में यूपी की गोरखपुर दक्षिण सीट वीआईपी थी। यहां कांग्रेस के सिंहासन सिंह, मजदूर प्रजा पार्टी से मशहूर शायर रघुपति सहाय ‘फिराक गोरखपुरी' और हिंदू महासभा से गोरक्षपीठ के तत्कालीन महंत दिग्विजयनाथ के बीच मुकाबला था। प्रचार के दौरान एक ऐसा वाकया हुआ जिससे फिराक खुद हार गए और महंत दिग्विजयनाथ को भी जीतने नहीं दिया। इसका फायदा सिंहासन सिंह को भारी मतों से जीत के रूप में मिला। 

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में फिराक गोरखपुरी के छात्र और आकाशवाणी के लिए कई साक्षात्कार लेने वाले साहित्यकार रवींद्र श्रीवास्तव उर्फ जुगानी भाई वर्ष 1951 की चुनावी घटना को याद करते हैं। उन्होंने बताया कि उरुवा बाजार की सभा में महंत दिग्विजयनाथ ने फिराक पर शराब पीने का आरोप लगाया। इसके जवाब में चंद घंटे बाद फिराक ने उसी मैदान में सभा की और शराब की बोतल खोलकर सभी के सामने दो-तीन घूंट गटक लिए। उन्होंने दलील रखी कि सभी बंद कमरे में शराब पीते हैं, मैं तो खुलेआम पीता हूं। यदि नहीं पीने वाले को वोट देना है तो कांग्रेस के सिंहासन सिंह को वोट दें। वह शराब नहीं पीते। चुनाव परिणाम आया तो 9586 वोट पाने वाले फिराक अपनी जमानत भी नहीं बचा सके। कांग्रेस के सिंहासन सिंह ने 57,450 मतों से जीत हासिल की जबकि महंत दिग्विजयनाथ को 25,678 वोटों पर संतोष करना पड़ा।

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  • Web Title:when firaq gorakhpuri drunk at election stage at gorakhpur rally in 1951