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वे दिन: किस्सा 1990 का, जब आडवाणी ने खड़े होकर अनुशासन का पाठ पढ़ाया

lk advani

बात 2009 के लोकसभा चुनाव की है। चुनाव के तारीखों की घोषणा हो चुकी थी। सभी दलों के साथ भाजपा ने भी अपना चुनाव अभियान शुरू कर दिया था। इसी क्रम में वाराणसी के कैंटोमेंट इलाके (नदेसर) में स्थित कटिंग स्कूल के मैदान में भाजपा की जनसभा थी। यह पूर्वांचल में भाजपा की पहली जनसभा थी।

उस सभा तक वाराणसी और आसपास के संसदीय सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों का चयन नहीं हुआ था। कई नामों की चर्चा चल रही। कटिंग स्कूली की सभा में बनारस संसदीय सीट के दावेदार और उनके समर्थक भी पहुंचे थे। भाजपा कार्यकर्ताओं की भी जबरदस्त भीड़ थी। कार्यकर्ता अपने नेताओं के पक्ष में नारेबाजी कर रहे थे। शाम करीब चार बजे लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और अरुण जेटली आदि मंच पर पहुंचे। पहले स्थानीय नेताओं का संबोधन शुरू हुआ।

इस बीच कार्यकर्ताओं के एक समूह ने अपने नेता के पक्ष में जबरदस्त नारेबाजी शुरू कर दी। मंच से कई बार कार्यकर्ताओं को शांत रहने का आग्रह हुआ। उनसे कहा गया कि पार्टी ने आपकी भावनाओं को समझ लिया है। यह सुनकर कार्यकर्ता कुछ देर शांत रहे। कुछ ही क्षणों बाद उन्होंने फिर नारेबाजी शुरू कर दी। काफी देर से यह तमाशा देख रहे लालकृष्ण आडवाणी से रहा नहीं गया। वह उठे, भाषण दे रहे नेता से माइक लिया और कुछ कड़े स्वर में कार्यकर्ताओं को अनुशासन व मर्यादा का पालन करने की हिदायत दी। उन्होंने कहा कि किसी भी संगठन में अनुशासन सबसे पहले है। उनके सख्त रुख से सभा में सन्नाटा छा गया। कार्यकर्ताओं की नारेबाजी क्या, खुसुरफुसर तक शांत हो गई। इसके बाद सभा सुचारू रूप से चली।

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  • Web Title:When Advani stood up and taught the lessons of discipline