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वे दिन : किस्सा 1980 का, जब राजनारायण के खिलाफ नहीं लड़ना चाहते थे कमलापति

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बनारस के राजनीतिक इतिहास में 1980 का चुनाव सबसे अलग माना जाता है। इस चुनाव के दो बड़े प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के पंडित कमलापति त्रिपाठी और जनता पार्टी (सेक्यूलर) के राजनारायण एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ना नहीं चाहते थे। इसकी वजह दोनों के बीच के आपसी रिश्ते थे, जो 1942 में वाराणसी जिला जेल में बने थे। कमलापति को राजनारायण ‘गुरुजी’ कहकर संबोधित करते थे।

वरिष्ठ समाजवादी चिंतक विजयनारायण कहते हैं कि जेल से ही दोनों के रिश्ते प्रगाढ़ हो गए थे। राजनारायण 1942 में अंग्रेज सरकार के खिलाफ बीएचयू की ओर से हुए आंदोलन के अगुवा थे और उन्होंने अपने सहयोगियों के साथ कई स्टेशनों को फूंक दिया था। इसके बाद उन्हें वाराणसी जिला जेल भेज दिया गया। तब कमलापति भी उसी जेल में थे।

1971, 1977 में राजनारायण ने रायबरेली से इंदिरा गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ा था। 71 में वह हार गए थे पर उनकी शिकायत पर हाईकोर्ट ने इंदिरा गांधी का चुनाव अवैध ठहरा दिया। 1977 में हुए चुनाव में राजनारायण ने रायबरेली से इंदिरा गांधी को हराया था। 1980 में जब राजनारायण ने वाराणसी से चुनाव लड़ने की घोषणा की तब दिल्ली में कांग्रेस की बैठक हुई। काफी विचार के बाद कमलापति त्रिपाठी का नाम तय हुआ। पंडित जी ने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया। लेकिन इंदिरा गांधी ने उन पर दबाव बनाया और चुनाव लड़ने के लिए राजी कर लिया। पंडितजी के नाम की घोषणा ने राजनारायण को भी असहज कर दिया था।   

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  • Web Title:we din kissa 1980 ka when rajnarayan did not wanted to contest election against kamlapati tripathi from varanasi lok sabha seat