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Lok Sabha Elections 2019- 'मत आपका अधिकार है, बहिष्कार समाधान नहीं'

बिहार के अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजय कुमार सिंह ने मतदाताओं द्वारा वोट बहिष्कार किए जाने को लेकर कहा कि निर्वाचन आयोग किसी भी मतदाता को मतदान के लिए बाध्य नहीं कर सकता है। आयोग की ओर से ऐसा कोई दिशा-निर्देश भी जारी नहीं किया गया है। मतदान करना प्रत्येक मतदाता का अधिकार है, उसकी मजबूरी नहीं है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में ही चुप रहने की स्वतंत्रता भी निहित है, उसी प्रकार मतदान करना मतदाता की जिम्मेवारी है, उसका हक है लेकिन कोई ऐसा नहीं करना चाहे तो उसे बाध्य नहीं किया जा सकता है। 

क्या है वोट बहिष्कार 
सिंह ने कहा कि कोई भी मतदाता या मतदाताओं का समूह किसी भी मतदान से खुद को अलग रखता है, तो उसे वोट बहिष्कार माना जाता है। वोट बहिष्कार किए जाने के बाद पुनर्मतदान का कोई प्रावधान नहीं हैं। आयोग ने स्वीप कार्यक्रम द्वारा और अन्य सुविधाओं को मुहैया कराते हुए सभी मतदाताओं से मतदान की अपील की और उनसे मतदान केंद्र आने व वोट देने  का आग्रह किया। सभी ईवीएम में नोटा की भी सुविधा उपलब्ध है। इसके बावजूद कोई मतदान नहीं करना चाहे तो यह उसका निर्णय है।

पहला चरण : तीस हजार से अधिक ने नहीं किया मत का दान 
वोट का महत्व बताने को जिस देश में अरबों रुपए खर्च हो जाते हों, वहां लोग अपनी मांगें मनवाने के लिए वोट बहिष्कार को हथियार बना रहे हैं। बहिष्कार के अधिकांश कारणों के मूल में सड़क और कहीं पानी और पुल है। बिहार भी इससे अछूता नहीं है। पहले चरण की बात करें तो गया, औरंगाबाद, नवादा लोकसभा क्षेत्रों में मतदान हुआ। चार सीटों के तहत 40 बूथों पर 30 हजार के करीब मतदाताओं ने खुद को मतदान से अलग रखा। मतदान के बहिष्कार ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। दलीय राजनीति पर भी असर है। 

जमुई लोकसभा क्षेत्र 
इस लोकसभा सीट पर लोजपा के चिराग पासवान और रालोसपा के भूदेव चौधरी के बीच सीधा मुकाबला था। इस संसदीय सीट के सिकंदरा विधानसभा क्षेत्र में करमा के निवासियों ने नहर में पानी न आने और पीने के पानी को लेकर वोट बहिष्कार किया। यहां के बूथ संख्या-129 में कुल 1688 लोगों को मतदान करना था लेकिन कोई वोट नहीं पड़ा। जबकि खैरा प्रखंड के दाबिल पचायत में सड़क निर्माण की मांग को लेकर मतदान का बहिष्कार किया था। यहां मंडल जाति के लोगों की बहुलता है।

चकाई विधानसभा क्षेत्र में उत्क्रमित मध्य विद्यालय जलखरिया के बूथ संख्या-275 पर मतदाताओं ने सड़क की समस्या को लेकर वोट नहीं डाला था। यहां 457 में से सिर्फ 36 वोट पड़े। उन्होंने साफ कहा कि रोड नहीं, तो वोट नहीं। यदि राजनैतिक नजरिए से देखें तो जिन बूथों पर बहिष्कार हुआ, वे राजग के प्रभाव वाले माने जाते हैं। वहीं मुंगेर जिले में पड़ने वाली इस लोकसभा की तारापुर विधानसभा क्षेत्र स्थित वासुदेवपुर उत्तरी भाग के मतदाताओं ने वोट बहिष्कार किया। यहां कुल 1600 मतदाता हैं। इसका लाभ एनडीए को मिल सकता है। इसी विधानसभा के प्राथमिक विद्यालय रायटोला बन्हारा (पूर्वी भाग) और (पश्चिमी भाग) स्थित दो बूथों पर कुल 2046 वोटरों में से महज 127 वोट पड़े।

गया लोकसभा सीट 
यहां पूर्व मुख्यमंत्री और हम के संस्थापक जीतनराम मांझी और जदयू के विजय मांझी के बीच सीधा मुकाबला था। लोकसभा क्षेत्र के शेरघाटी में बेला गांव में वोट बहिष्कार हुआ। माध्यमिक विद्यालय बेला में कोई वोट नहीं पड़ा। सामुदायिक विकास भवन बजौरा (बांया भाग) में भी मतदान प्रतिशत शून्य रहा। परैया प्रखंड के करहट्टा पंचायत में सिकंदरपुर में ‘रोड नहीं, तो वोट नहीं’ के साथ वोट बहिष्कार हुआ। बाराचट्टी विधानसभा क्षेत्र में प्राइमरी स्कूल गौरा स्थित बूथ पर कोई वोट नहीं पड़ा। बोधगया के प्राथमिक विद्यालय बेलादार बीघा में भी कोई मतदान नहीं हुआ। बेलागंज विधानसभा क्षेत्र के प्राइमरी स्कूल शाह मोहम्मदपुर स्थित बूथ पर 420 में से तीन वोट पड़े। जबकि अपग्रेडे़ड मिडिल स्कूल अमराहा टोला, नवी नगर में 1030 में से सिर्फ 36 वोट गिरे। वजीरगंज क्षेत्र के प्राइमरी स्कूल वेल्वे और उत्क्रमित मिडिल स्कूल, हसरा स्थित बूथ पर कोई वोट डालने नहीं पहुंचा। अधिकांश स्थानों पर बहिष्कार का कारण सड़क तो कुछ जगह पानी भी था।

नवादा लोकसभा क्षेत्र 
इस सीट पर लोजपा के चंदन कुमार और राजद की विभा देवी आमने-सामने थीं। यहां गोविंदपुर विधानसभा क्षेत्र के रोह प्रखंड स्थित मोरमा पंचायत के बजवारा बूथ (संख्या-29) पर सड़क की मांग को लेकर वोट बहिष्कार हुआ। कुल 1169 मतदाताओं में से किसी ने वोट नहीं डाला। हिसुआ विधान सभा क्षेत्र नरहट प्रखंड स्थित वाजिदपुर बूथ संख्या-145 पर भी बहिष्कार का कारण सड़क थी। 700 वोटरों में से कोई वोट देने नहीं पहुंचा। वारिसलीगंज विधानसभा क्षेत्र पकरीबरावां के एरूरी के मतदान केन्द्र संख्या 278 मध्य विद्यालय एरूरी पूर्वी भाग पर कुल मतदाताओं की संख्या 1375, जबकि मतदान केन्द्र संख्या 279 मध्य विद्यालय एरूरी में मतदाताओं की संख्या 1290 है। इन बूथों पर एक भी वोट नहीं पड़ा। इसी तरह, इसी पंचायत के मतदान केन्द्र संख्या 274 प्राथमिक विद्यालय बरडीहा बलियारी में मतदाताओं की संख्या 977 है। महज दो वोट पड़े।

अब इसे राजनैतिक दृष्टि से देखें तो बजरावा के कुशवाह मतदाताओं का रुझान एनडीए के पक्ष में तो करमा के यादव, नाई मतदाता महागठबंधन की ओर झुकाव वाले थे। बहिष्कार के चलते मतदान प्रतिशत तो घटा पर यहां जातिगत गणित के हिसाब से किसी को नफा-नुकसान नहीं दिखता। जबकि वाजिदपुर में यादवों की अधिकता और पकरीबरावां में अनुसूचित जाति और यादवों की संख्या अधिक है। बरडीहा बलियारी में भी मुस्लिम-यादव मतदाता अधिक होने के चलते महागठबंधन पर बहिष्कार का असर दिखता है।

औरंगाबाद लोकसभा क्षेत्र 
इस सीट पर भाजपा के सुशील सिंह और हम के उपेंद्र प्रसाद में सीधा मुकाबला है। औरंगाबाद विधानसभा क्षेत्र के सदर प्रखंड स्थित मंझार पंचायत में अपग्रेडेड मिडिल स्कूल बेली स्थित मतदान केंद्र संख्या 82 पर वोट बहिष्कार हुआ था। सुरीठ बीघा टोला का बूथ भी इसी से जुड़ा हुआ है। यहां 585 में से 47 वोट पड़े। यहां राजपूतों की संख्या ज्यादा है, जबकि सुरीठ बीघा में पाल (गड़ेरी) जाति के लोग हैं। सड़क  के लिए  वोट बहिष्कार किया गया।

कुटुंबा विधानसभा क्षेत्र के नेउरा सूरजमल बूथ के मतदाताओं ने चुनाव बहिष्कार किया था। अधिकारियों के तमाम समझाने-बुझाने के बाद भी यहां 950 में से  मात्र 10 वोट पड़े थे, जिसमें सात पुरुष व तीन महिलाएं शामिल थी। उनका कहना था कि गांव तक आने के लिए आज तक सड़क नहीं बन सकी।  नदी में पानी आने पर आवागमन मुश्किल हो जाता है। बरसात में 3 महीने तक बच्चे पढ़ने के नहीं जा पाते हैं। सिंचाई की भी गंभीर समस्या है। पटवन का उनके यहां कोई साधन नहीं है। ऐसे में वोट देने से क्या फायदा है। गुरुआ के प्राइमरी स्कूल सिकंदरपुर में 370 में से चार, प्राइमरी स्कूल गनगति में 629 में से 10 वोट पड़े। इमामगंज क्षेत्र के मिडिल स्कूल गेजना, अपग्रेडेड मिडिल स्कूल लुटुआ (पूर्वी भाग) में कोई वोट नहीं पड़ा और मध्य भाग में एक वोट प़ड़ा। जबकि इन तीनों स्थानों पर कुल वोटर 2489 थे। टिकारी विधानसभा क्षेत्र के सामुदायिक विकास भवन कल्याणपुर, प्राइमरी स्कूल सीताबीघा, अपग्रेडेड मिडिल स्कूल थानापुर स्थित बूथों पर कोई वोट नहीं पड़ा। प्राइमरी स्कूल कुसैता (हरिजन टोली) के बूथ पर 528 में से 25 वोट पड़े।

दूसरा चरण : सड़क नहीं तो वोट नहीं को लेकर बहिष्कार 
लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण का मतदान 23 अप्रैल को हुआ था। इस चरण में बिहार की पांच सीटों किशनगंज, कटिहार, बांका, भागलपुर और पूर्णियां शामिल थीं। सबसे ज्यादा चुनाव बहिष्कार भागलपुर में हुआ। सभी क्षेत्रों में हुए बहिष्कार के मूल में सड़क ही थी। जनप्रतिनिधियों ने सड़क की मांग पूरी न की तो लोगों ने नाराजगी व्यक्त करने का हथियार मतदान बहिष्कार को बना डाला।

बांका लोकसभा सीट
इस सीट पर मुख्य चुनावी मुकाबला राजद के जयप्रकाश नारायण यादव, जदयू के गिरधारी यादव और निर्दलीय पुतुल देवी के बीच था। बांका के अमरपुर विधानसभा के बूथ संख्या 149 पर कोई वोट नहीं पड़ा। यहां धीमड़ा गांव के लोगों ने चुनाव का पूरी तरह बहिष्कार किया। यहां कुल 1293 मतदाता हैं और सभी अल्पसंख्यक  हैं। गांव में पक्की सड़क की मांग को लेकर ग्रामीण विगत एक वर्ष से वोट बहिष्कार की धमकी दे रहे थे। इस बहिष्कार का सीधा नुकसान राजद प्रत्याशी को माना जा रहा है।

भागलपुर लोकसभा सीट
इस सीट पर राजद के बुलो मंडल और जदयू के अजय मंडल के बीच आमने-सामने की लड़ाई है। नवगछिया अनुमंडल के रंगरा प्रखण्ड स्थित  साधोपुर पंचायत के बूथ संख्या 110, 111 और बनिया के बूथ संख्या 133,134, और वैसी के बूथ संख्या135 और 136 पर सड़क नहीं तो वोट नही के नारे के साथ वोट बहिष्कार किया गया। प्राथमिक विद्यालय मसुदनपुर वैसी के बूथ संख्या  135 पर 11 बजे तक 4 वोट जबकि 136 पर सिर्फ एक ही वोट गिरा था।बैसी के बूथ  संख्या 135 पर 400 जबकि  136 पर 732 मतदाता थे। 

साधोपुर में आक्रोशित लोगों ने कहा कि 25 वर्षो से सड़क नही बनी है। जीतने के बाद जनप्रतिनिधि देखने तक नही आते है। बाद में दो बूथ 135,136 पर मतदान करवाया गया परंतु लगभग 400 लोगों ने मतदान नहीं किया। बनिया में मतदान नही हुआ। यहां लगभग 800 मतदाता थे। जो सभी अनुसूचित जनजाति के और अल्पसंख्यक वर्ग के थे।
कटिहार लोकसभा क्षेत्र: इस सीट पर कांग्रेस के तारिक अनवर, जदयू के दुलालचंद गोस्वामी की सीधी लड़ाई है। यहां बलरामपुर प्रखंड के बूथ संख्या-64 प्राथमिक विद्यालय श्रीपटोल, लुत्तीपुर पंचायत में एक भी वोट नहीं पड़ा। यहां एक हजार वोटर हैं जो राजवंशी, मल्लाह, यादव और मुस्लिम हैं। यहां लोगों ने गांव की स़ड़क और अस्पताल की मांग को लेकर वोट नहीं डाला।

किशनगंज लोकसभा सीट
इस सीट पर कांग्रेस के मो. जावेद, जदयू के महमूद अशरफ और ओवैसी के दल के प्रत्याशी अख्तरुल ईमान के बीच त्रिकोंणीय मुकाबला था। यहां ठाकुरगंज प्रखंड के दल्ले गांव पंचायत के मतदान केंद्र संख्या 167 पर 1218 वोटर, बूथ संख्या 168 पर 1026 मतदाता, मतदान केंद्र संख्या 169 पर 1249 मतदाता एवं मतदान केंद्र संख्या 170 पर 806  मतदाताओं ने मतदान का बहिष्कार किया। बहिष्कार करने वालों का कहना था कि जब तक मेची नदी पर पुल नहीं बनेगा तब तक वोट नहीं डालेंगे। अमौर विधानसभा स्थित खाड़ी महीनगाव पंचायत के खाड़ी बासोल स्थित मदरसा जमेरुल इस्लामिया मतदान केंद्र संख्या 90 व प्राथमिक विद्यालय खाड़ी बासौल मतदान केंद्र संख्या 81 में करीब 1200 मतदाताओं ने चुनाव का बहिष्कार किया। महानंदा व कनकई नदी के बीचोबीच बसे इस गांव के लोगों ने बाढ़ की समस्या, सड़कों की दयनीय स्थिति को लेकर वोट का बहिष्कार किया था। इस पंचायत में अधिकांशतया मुस्लिम समुदाय के लोग रहते हैं। 

पूर्णियां लोकसभा सीट
इस सीट पर कांग्रेस के उदय सिंह पप्पू और जदयू के संतोष कुशवाह के बीच सीधी लड़ाई है। यहां बनमनखी विधानसभा के दो मतदान केंद्रों पर लोगों ने वोट का बहिष्कार किया था। रोड नहीं तो वोट नहीं का बैनर बकायदा गांव में लगाकर लोगों ने चुनाव का बहिष्कार किया था। हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों के समझाने-बुझाने के बाद एक बूथ पर 2.90 फीसदी तो दूसरे पर 26.06 फीसदी मतदान हुआ। बड़हारा कोठी के मटिहानी पंचायत स्थित मतदान केंद्र संख्या 254 मिडिल स्कूल शिशवा साउथ विंग में कुल 829 मतदाता था, जिसमें 24 ने ही मतदान किया। इसी तरह मतदान केंद्र संख्या 253 मिडिल स्कूल शिशवा नार्थ विंग में 994 मतदाताओं में सिर्फ 259 ने मतदान किया। 

तीसरा चरण : झंझारपुर के छोड़ सब जगह हुआ बहिष्कार
तीसरे चरण में बिहार में पांच सीटों पर चुनाव हुआ। इनमें अररिया, खगड़यिा, सुपौल और मधेपुरा सीट शामिल हैं। इन पांचों सीटों पर 23 अप्रैल को मतदान हुआ और सभी जगह आमने-सामने की लड़ाई है। इस चरण में केवल झंझारपुर लोकसभा क्षेत्र ही ऐसा था जहां कहीं भी मतदान का बहिष्कार नहीं हुआ।

अररिया लोकसभा सीट
इस सीट पर भाजपा के प्रदीप सिंह और राजद के सरफराज आलम के बीच आमने-सामने की टक्कर है। अररिया लोकसभा क्षेत्र के जोकीहाट विधानसभा क्षेत्र में दो बूथों पर सड़क नहीं तो वोट नहीं कहकर वोटरों ने मतदान का वहिष्कार किया था। बूथ संख्या 79 और 80 पर यह बहिष्कार हुआ जो सोहंदर पंचायत में पड़ते हैं। दोनों बूथों को मिलाकर 1500 वोट हैं। यहां केवल दो वोट बूथ नंबर 80 पर पड़े थे। यहां अतिपिछड़ों की संख्या अधिक है। वोट बहिष्कार का असर भाजपा प्रत्याशी पर पड़ने की बात कही जा रही है।

खगड़िया लोकसभा सीट
इस सीट पर वीआईपी के मुकेश सहनी और लोजपा के महबूब अली कैसर के बीच सीधी लड़ाई है। खगड़िया लोकसभा क्षेत्र में  दो जगहों पर मतदाताओं ने वोट बहिष्कार किये थे। पहला बेलदौर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत चौथम प्रखंड के मिडिल स्कूल तोफिर गढ़िया (बूथ संख्या 65) के सभी 854 वोटरों ने रोड नही तो वोट नही का नारा देकर मतदान का वहिष्कार किया। यहां ज्यादातर वोटर पासवान हैं। इसके अलावा भूमिहार व जुलाहा जाति के भी वोटर हैं। दूसरा परबत्ता विधान सभा क्षेत्र के मवि घनखेता बूथ संख्या 14 (पंचायत राटन) के इंदिरा नगर के 400 मतदाताओं ने सड़क की मांग को लेकर ही वोट का बहिष्कार किये थे। यहां दलित व अतिपिछड़ा जाति के मतदाता हैं। हालांकि परबत्ता विस के कोलवारा पंचायत स्थित मवि तेलिया बथान के बूथ संख्या 221 व 222 के वोटरों ने भी ओलावृष्टि में हुई क्षतिपूर्ति की मांग को लेकर वोट बहिष्कार किया था। लेकिन प्रशासनिक प्रयासों से 181 वोट डलवा दिया गया। यहां दोनो बूथों पर कुल 2038 मतदाता हैं। यहां के अधिकांश वोटर अतिपिछड़ी जाति के हैं। यहां एनडीए व महागठबंधन दोनों के वोटर हैं।

सुपौल लोकसभा सीट
इस सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी रंजीता रंजन और जदयू के दिलेश्वर कामत के बीच सीधी भिड़ंत है। सुपौल के निर्मली विधानसभा क्षेत्र के मरौना प्रखंड के खोखनाहा, मेनहा, लक्ष्मीनियां के करीब ढाई हजार वोटरों ने कोसीवासियों को आर्थिक पुनर्वास देने, बाढ़ का स्थायी निदान निकालने, जमीन की मालगुजारी माफ करने और रैयत को जमीन का अधिकार देने, कोसीवासियों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ, फसलक्षति का मुआवजा देने की मांग को लेकर वोट का बहिष्कार कर दिया।यह इलाका मुस्लिम और यादव बहुल है। इसके अलावा छातापुर विधानसभा के मधुबनी पंचायत के ब्राह्मण टोला के करीब एक हजार मतदाताओं ने सड़क नहीं तो वोट नहीं का नारा लगाकर मतदान का बहिष्कार कर दिया। यह इलाका ब्राह्मणों का इलाका है और यहां ज्यादातर वोटर एनडीए के थे।

मधेपुरा लोकसभा सीट
इस सीट पर त्रिकोंणीय लड़ाई थी। यहां राजद से शरद यादव, जदयू से दिनेश चन्द्र यादव और जाप के संरक्षक पप्पू यादव निर्दलीय मैदान में थे। मधेपुरा के चौसा ब्लॉक स्थित बूथ संख्या 315 और 316 उत्क्रमित मध्य विद्यालय विनटोली पर मतदाताओं नेवोट बहिष्कार किया। गांव में सड़क नहीं बनाए जाने से मतदाता आक्रोशित थे। दोनों बूथ पर 1834 मतदाता हैं। सभी जातियों के मतदाता हैं। एसडीएम के आश्वासन पर लोग मतदान करने के लिए राजी हुए। तीन बजे से मतदान शुरू हुआ। यहां कुल 828 वोट पड़े।

चौथा चरण : पंद्रह स्थानों पर मतदातओं ने किया वोट बहिष्कार
चौथे चरण में मतदाताओं ने 14 स्थानों पर आम चुनाव में मतदान का बहिष्कार किया। समस्तीपुर एवं उजियारपुर में लोकसभा क्षेत्र में मतदाताओं की नाराजगी के कारण वोट बहिष्कार की घटना सामने आयी। गौरतलब है कि चौथे चरण में पांच संसदीय सीटों दरभंगा, उजियारपुर, समस्तीपुर (सु), बेगूसराय व मुंगेर के लिए 29 अप्रैल को मतदान हुआ था। 
समस्तीपुर के कल्याणपुर प्रखंड के भगीरथ पुर पंचायत के सात मतदान केंद्रों पर मतदाताओं ने वोट बहिष्कार किया। यहां मतदाताओं के गुस्से का कारण रामेश्वर जूट मिल के लगातार बंद रहना था। कुल आठ हजार मतदाताओं ने वोट का बहिष्कार किया। इन बूथों पर एनडीए और महागठबंधन दोनों के वोट माने जा रहे हैं, इसलिए किसी एक गठबंधन को नुकसान या लाभ का मामला यहां नहीं रहा। 

उजियारपुर लोकसभा क्षेत्र के शाहपुर पटोरी प्रखंड के अरैया गांव स्थित मतदान केंद्र संख्या 42 में मात्र चार मतदाताओं ने ही वोट डाले। जबकि इस मतदान केंद्र में कुल मतदाताओं की संख्या 1308 है। इन मतदाताओं में अधिकांश यादव जाति के मतदाता शामिल हैं। मतदाताओं ने सड़क एवं पुल के निर्माण की मांग को लेकर वोट बहिष्कार का निर्णय लिया। बाद में प्रशासनिक अधिकारियों ने मान-मनौव्वल किया तो मात्र चार ने ही अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया और ज्यादा ने वोट बहिष्कार किया। दरभंगा में वोट बहिष्कार की कोई सूचना दर्ज नहीं हुई। हालांकि चुनाव आयोग के अनुसार चौथे चरण में एकमात्र मतदान केंद्र उजियारपुर संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत मोहिउद्दीननगर विधानसभा क्षेत्र के मतदान केंद्र संख्या 221 पर वोट बहिष्कार किया गया। 

मुंगेर लोकसभा हलसी प्रखंड के कुमैठा गांव के लोगों ने सड़क की समस्या को लेकर चुनाव के दौरान वोट बहिष्कार कर दिया। मतदाता सूची के अनुसार कुमैठा के बूथ संख्या 314 पर कुल मतदाता 785 हैं। चुनाव के दिन एक भी मतदाता ने वोट नहीं डाले। वहीं हलसी प्रखंड क्षेत्र के पूर्वी गिद्धा गांव के मतदाताओं ने बूथ शिफ्ट किये जाने के विरोध में वोट बहिष्कार किया है। गिद्धा व पूर्वी गिद्धा मिलाकर कुल 1383 मतदाता हैं। सिर्फ पूर्वी गिद्धा में करीब नौ सौ मतदाता हैं। पूर्वी गिद्धा बूथ को इसबार गिद्धा में शिफ्ट कर दिया गया। इस वजह से लोगों में नाराजगी थी।  सूर्यगढ़ा प्रखंड के कजरा थाना क्षेत्र अंतर्गत दो गांवों के लोगों ने भी वोट बहिष्कार किया। यहां 17 सौ मतदाता हैं। चंपानगर बूथ संख्या 199 व मंझियामा बूथ संख्या 196 के मतदाताओं ने पानी व सड़क की समस्या को लेकर वोट बहिष्कार किया था। यहां लगातार प्रशासनिक पदाधिकारी लोगों को वोट डालने के लिए मनाते रहे, लेकिन लोगों पर इसका तनिक भी असर नहीं पड़ा। इस गांव में आज भी टैंकर से लोगों तक पानी पहुंच रहा है।

बेगूसराय लोकसभा 
बरौनी के राजबाड़ा वार्ड संख्या एक  का तीन हजार आबादी वाले लोगों के भारतीय नागरिकता होने पर ग्रहण लगा है। यहां के करीब 14 सौ मतदाताओं ने 2015 में विधान सभा चुनाव के बाद आजतक मतदान नहीं किया है। ये लोग नगर परिषद बीहट के नागरिक हैं या ग्राम पंचायत  हाजीपुर पिपरा (मालती)के, अभी तक मामला नहीं सुलझ पाया है। परिसीमन विवाद को लेकर ये लोग बीते पंचायत चुनाव व नगर परिषद के चुनाव में भी मतदान करने से वंचित रहे थे। ये लोग वर्ष 2014 से आज तक सरकार की  हर एक लाभकारी योजनाओं से वंचित हैं। 

बरौनी प्रखण्ड अंतर्गत राजवाड़ा हाई स्कूल में बने तीन बूथ 204, 205 व 206 पर सैकड़ों ग्रामीणों ने गोलबंद होकर 29 अप्रैल को वोट का बहिष्कार कर दिया था। दो घंटे तक कोई वोट नहीं पड़ा। ग्रामीणों का कहना था  कि राजवाड़ा गांव के पूर्व का एक नंबर वार्ड न तो नगर परिषद बीहट क्षेत्र में है और न ही किसी पंचायत में है।  सड़क, बिजली, पानी, पेंशन, आवास समेत अन्य सरकारी सुविधाओं से ग्रामीण पूर्णत: वंचित हैं।  

मटिहानी के शाम्हो प्रखंड की तीन पंचायतों के लोगों ने सड़क नहीं तो वोट नहीं का बैनर लगाकर वोट का बहिष्कार किया था। अधिकारी की लाख पहल के बाद भी यहां के लोगों ने दो मतदान केंद्र पर  मताधिकार का उपयोग नही किया। अकबरपुर बरारी पंचायत के बूथ संख्या 306  प्राथमिक विद्यालय जगन सैदपुर पर 1126 मतदाता थे। वहीं बूथ संख्या 307 प्राथमिक विद्यालय झगड़ाहा  पर कुल 846 मतदाता थे। दोनों बूथ पर एक भी मतदाता ने मताधिकार का उपयोग नहीं किया। दोनों मुहल्ला पिछड़ा और अतिपिछड़ा का है। इसमें  बिन्द, धानुक, नाई, यादव जति के लोग हैं। 

पांचवां चरण : सीतामढ़ी, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, सारण एवं हाजीपुर (सु) 
मुजफ्फरपुर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के औराई व कटरा स्थित दो बूथों एवं सीतामढ़ी  लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के बथनाहा प्रखंड के बखरी पंचायत स्थित एक बूथ पर वोट का बहिष्कार किया गया। करीब ढाई हजार मतदाताओं ने इन दोनों बूथों पर मतदान का बहिष्कार किया।  औराई के बभनगामा गांव में स्थित मतदान केंद्र संख्या 165 एवं कटरा स्थित मतदान केंद्र संख्या 215 पर मुख्य सड़क से गांव जाने के लिए स्थायी पुल की मांग को  लेकर वोट का बहिष्कार किया गया। इन दोनों बूथों के मतदाताओं को चचरी पुल से होकर गांव जाना पड़ता है। मुख्य सड़क से गांव को जोड़ने के लिए चचरी पुल ही एकमात्र सहारा है। स्थानीय दबंग लोगों द्वारा बनाए गए इस चचरी पुल से गुजरने के लिए लोगो ंको टैक्स देना पड़ता है। बिना टैक्स दिए इन चचरी पुलों से साईकिल भी नहीं गुजरती है। वोट बहिष्कार का दूसरा कारण यहां बिजली की आपूर्ति भी है। दरअसल गांव की सीमा में पोल-तार एवं ट्रांसफर्मर तो लगा दिए गए हैं, लेकिन अबतक बिजली नहीं पहुंच पायी है। इन क्षेत्रों में एनडीए को नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। 

सीतामढ़ी लोकसभा के बथना प्रखंड के बखरी पंचायत के पितामपुर गांव स्थित मतदान केंद्र संख्या 203 पर लोगों ने वोट का बहिष्कार किया। प्रशासनिक अधिकारियों के हस्तक्षेप पर दोपहर बाद लोगों ने वोट डाले। हालांकि इस बूथ पर अपेक्षाकृत मतदाता कम पहुंचे। संख्या कम रहने के कारण इस क्षेत्र के चुनाव परिणाम पर इसका कोई असर पड़ता नहीं दिख रहा है। 

सारण संसदीय क्षेत्र के गड़खा प्रखंड में दो बूथों पर 6 मई को वोटरों ने वोट का वहिष्कार किया था। यहां के भवानी छपरा प्राइमरी स्कूल बूथ नंबर 157 व 158 पर इंदिरा आवास के लिए वोटरों ने वोटिंग नहीं की। बूथ संख्या 157 पर 838 व बूथ संख्या 158 पर 637 वोटर थे। श्रीपाल बंसत पंचायत के भवानी छपरा गांव के अतिरिक्त इनमें बनवारी बसंत व झौंवा गांव के वोटर थे। ये वोटर विंद व पिछड़ी जातियों के थे जिसे जदयू का वोट बैंक माना जाता है। इनके वोट वहिष्कार से सीधे-सीधे एनडीए को वोटों का नुकसान हुआ। इनका कहना था कि वर्षों पूर्व भवानी छपरा गांव में हुई अगलगी की घटना में करीब एक हजार घर जलकर राख हो गये। इनमें से कइयों को अब तक सरकारी आवास की सुविधा नहीं मिली। इनका कहना है कि वे किसी चुनाव में हिस्सेदारी तबतक नहीं निभायेंगे जबतक सभी अग्निपीड़ितों के आवास नहीं बन जाते।

हाजीपुर लोकसभा क्षेत्र के महनार विधानसभा क्षेत्र में स्थित हसनपुर दक्षिणी पंचायत में मतदाताओं ने वोट बहिष्कार किया था। उत्क्रमित मध्य विद्यालय बहलोलपुर के बूथ नम्बर 264 पर मात्र एक वोट गिर पाया था। इस पंचायत के वार्ड नम्बर सात और आठ के वोटरों को इस मतदान केंद्र पर करना था। यह मतदान केंद्र महनार के दियारे इलाके में है। एक तरफ बख्तियारपुर काला दियारा और दूसरी तरफ समस्तीपुर के शाहपुर पटोरी के सरसावा दियारा स्थित है। यहां बूथ पर लगभग 800 वोटर हैं। यहां आवागमन में बहुत परेशानी है। चुनाव के दिन सुबह में ही मतदाताओं ने मतदान केंद्र के रास्ते को घेर लिया था और कोई मत नहीं गिराया। इस बूथ पर यादव मतदाताओं की संख्या ज्यादा है।  

छठा चरण : रोड नहीं तो वोट नहीं वोट बहिष्कार का मुख्य मुद्दा 
लोकसभा चुनाव के छठे चरण में आठ सीटों पर वोट पड़े। इन आठ सीटों पर 11 बूथों पर वोट बहिष्कार का निर्णय मतदाताओं ने किया। इनमें सबसे प्रमुख और कॉमन मुद्दा रहा रोड की मांग। वहीं एक जगह टोला में बिजली नहीं पहुंचना भी बहिष्कार का कारण बना। इन 11 बूथों पर 11961 मतदाताओं ने वोट नहीं डाला। अगर वोट का बहिष्कार नहीं हुआ रहता तो इनमें 50 से 60 प्रतिशत मतदाता जरूर वोट करते। पर, उनकी मांग पूरी नहीं होने के कारण वोट नहीं देकर लोगों ने अपनी नाराजगी का इजहार किया। हालांकि 11 में दो बूथ ऐसे रहे, जहां एक वोट भी नहीं पड़े वहीं एक बूथ पर एक ही वोट पड़े। अन्य बूथों पर प्रशासन के आग्रह पर लोगों ने कुछ घंटों बाद वोट दिया, पर उसका प्रतिशत बहुत ही कम था। 

वाल्मीकिनगर 
गांव से सात किलोमीटर दूर पर मतदान केंद्र। प्रशासन से कई बार गुहार लगाने के बाद भी कोई फायदा नहीं हुआ। मजबूरन लोगों ने वोट नहीं देने का फैसला लिया। यह घटना वाल्मीकिनगर लोकसभा क्षेत्र के नरकटियागंज में मंगुरही बैरिया के बूथ संख्या संख्या 79 और 80 की है। इन मतदान केंद्रों पर 1150 मतदाता थे, लेकिन एक भी वोट नहीं पड़े। इस बूथ का क्षेत्र मुस्लिम बाहुल्य है। 

वहीं ठठवा गांव में विरहा नदी पर पुल की मांग को लेकर 750 लोगों ने वोट बहिष्कार किया। यह क्षेत्र भी मुस्लिम बाहुल्य है। इसी प्रकार मैनाटांड़ में पश्चिमी पकुहवा गांव के बूथ संख्या 108 पर 1900 मतदाता है, जिनमें मात्र 184 ने ही वोट डाला। यहां के लोगों ने भी पांच किलोमीटर दूरी पर बूथ रहने के कारण वोट का बहिष्कार किया। ये बूथ अतिपिछड़ा समाज बाहुल्य है। लौरिया प्रखंड के लक्षनौता और बारी टोला में रेल अंडरपास की मांग को लेकर लोगों ने वोट बहिष्कार किया। लक्षनौता में बूथ संख्या 308 पर 2600 वोटर थे, जिनमें मात्र 308 ने वोट डाला? वहीं बारी टोला के बूथ संख्या 65 पर 3500 वोटर थे, जिनमें एक ने भी वोट नहीं डाला। वोट बहिष्का महागठबंधन के परिणाम का प्रभावित कर सकता है।  

पूर्वी चंपारण 
पूर्वी चंपारण लोकसभा क्षेत्र के बंजरिया प्रखंड के सुरहा के बूथ नंबर 40 और 41 पर लोगों ने वोट बहिष्कार किया। सड़क निर्माम की मांग को लेकर इन लोगों ने वोट नहीं देने का फैसला किया। इन लोगों को उम्मीद थी कि वोट का बहिष्कार करने पर शायद प्रशासन मांग पर विचार करें और सड़क का निर्माण हो सके। बूथ संख्या 40 पर 861 और  41 पर 845 वोटर थे। तीन बजे तो इन बूथों पर कोई भी वोट देने नहीं आया। बाद में एसडीओ के आश्वासन पर ग्रामीणों ने वोट डालने का निर्णय हुआ और फिर वोट देने के लिए कतार में खड़े हुए। दोनों ही बूथों पर मुस्लिम, कुशवाहा, धुनिय और दलित मतदाताओं की संख्या अधिक है। 


गोपालगंज 
जर्जर रोड से खफा होकर गोपालगंज लोकसभा क्षेत्र के टोला सिपाया के भरथियां गांव के बूथ संख्या 134 पर मतदाताओं ने सुबह सात बजे से दोपहर दो बजे तक वोट का बहिष्कार किया था। बाद में प्रखंड विकास पदाधिकारी के काफी समझाने और आग्रह के बाद ग्रामीणों ने वोट देना शुरू किया। इस गांव में 412 मतदाता थे। ये सभी सवर्ण जाति के हैं। वर्ष 1989 के बाद से गांव में विकास का कोई काम नहीं होने से यहां के लोग नाराज थे। ग्रामीणों का कहना था कि मुख्य सड़क से गांव जाने वाली सड़क दस वर्षों से जर्जर है। गांव में नल जल योजना शुरू तो हुई, लेकिन निम्न स्तर का काम होने के हर परिवार को पानी नहीं मिल पा रहा है।  

महाराजगंज: बिजली के लिए किया वोट का बहिष्कार 
इस लोकसभा क्षेत्र के एकमा प्रखंड में 600 लोगों ने बिजली की मांग पर वोट का बहिष्कार किया। यहां के मधुबन धुंधरी सामुदायिक भवन बूथ संख्या 89 पर धुंधरी गांव के दलित और पिछड़ी जाति के ग्रामीणों ने वोट नहीं किया। इनका कहना था कि इनके टोला में घरों में बिजली अभी तक नहीं पहुंची है। चारों ओर बिजली जलती हैं, पर उनका टोला अंधेरे में रहने को विवश है। हालांकि इस बूथ के मधुबन गांव के यादव मतदाताओं ने वोट डाला। इस बूथ पर मतदाता की संख्या 1359 थी। इनमें से करीब छह सौ दलित व पिछड़ी जाति के मतदाताओं ने वोट नहीं डाला। 

सीवान: 862 मतदाता में सिर्फ एक ने किया वोट
सीवान लोकसभा  क्षेत्र के दो गांवों के मतदाताओं ने वोट बहिष्कार किया। दरौंदा विधानसभा क्षेत्र के सिसवन प्रखंड के शुभहाता में ग्रामीणों ने जनसमस्याओं को लेकर वोट का बहिष्कार किया। यहां बूथ संख्या 121 पर मतदाताओं की संख्या 862 थी, जिनमें सिर्फ एक महिला मतदाता बेबी कुमारी ने बहिष्कार के बीच वोट किया। राजपूत बाहुल्य इस गांव में यादव और पिछड़ा वर्ग के अन्य समाज के भी मतदाता हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि अंचल रघुनाथपुर तो प्रखंड सिसवन है। दूसरे गांव के नाम पर मतदाता पहचान पत्र है। इसी मुद्दे को लेकर बहिष्कार किया गया है। 2015 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी इन लोगों की वोट बहिष्कार की योजना थी, लेकिन प्रशासन के आश्वासन पर मामला थम गया। इस बार समस्या का समाधान नहीं होने पर वोट का बहिष्कार किया गया। दरौंदा विधानसभा के ही हसनपुरा प्रखंड के पकड़ी पंचायत के मेरहीं गांव में बूथ संख्या 58 व 59 पर वोट का बहिष्कार करने की घोषणा हुई थी। हालांकि बाद में जनप्रतिनिधियों के आश्वासन और प्रशासन के आग्रह पर बाद में वोट डाले गये। 

सातवां चरण: 34 बूथों पह बहिष्कार, 28 हजार से अधिक वोट प्रभावित 
सातवें चरण में 19 मई को हुए मतदान में आठ सीटों पर 34 बूथों पर मतदाताओं ने वोट का बहिष्कार किया। इनमें दो दर्जन बूथ पर एक वोट भी नहीं पड़े। सातवें चरण में भी वोट बहिष्कार का मुख्य कारण सड़क ही रहा है। 

सासाराम 
इस लोकसभा क्षेत्र के सात बूथों पर मतदाताओं ने वोट का बहिष्कार किया। सासाराम शहर के न्यू एरिया मोहल्ले  के दो बूथों पर 1826 मतदाता थे, जिनमें सिर्फ यादव जाति 456 ने वोट डाला। वहीं अन्य समाज में मतदाताओं ने वोट नहीं दिया, जिनमें अधिकांश सवर्ण और अन्य जाति के लोग शामिल थे। माना जा रहा है कि ऐसा करने से यहां पर एनडीए उम्मीदवार को नुकसान हुआ। जल जमाव की की समस्या से त्रस्त होकर यहां वोट बहिष्कार किया गया। 

वहीं, करगहर प्रखंड के पांच गांवों को मिलाकर बने तीन बूथ तेन्दुनी, टेकारी और पनैला पर रोड नहीं तो वोट नहीं का नारा बुलंद करते हुए मतदाताओं ने वोट का बहिष्कार किया। अधिकारियों के लाख समझाने के बाद भी ग्रामीणों ने वहां के पोलिंग एजेंट तक को वोट नहीं डालने दिया। इन तीनों बूथों पर सवर्ण, ओबीसी और  एससी-एसटी को मिलाकर कुल 3500 मतदाता थे। इनकी शिकायत थी कि गांव तक सड़क नहीं आई है। 

सासाराम प्रखंड के समरडीहा गांव के 250 मतदाताओं का नाम गांव के बूथ हटाकर बगल के गांव पटनवां के बूथ पर किये जाने के कारण सभी 250 ने वोट का बहिष्कार किया। इस गांव में ब्राह्मण व कुर्मी जाति के मतदाता थे। इसी तरह चेनारी प्रखंड के औरईया,भड़कुड़ा व उरदगा गांव के बूथ अधिक दूरी पर स्थापित रहने के कारण लोगों ने वोट का बहिष्कार किया था। प्रशासन और उम्मीदवारों के समझाने के बाद नौ बजे से इनलोगों ने वोट डालाना शुरू किया। लेकिन यहां मात्र 35 प्रतिशत ही वोट पड़े। इन तीनों बूथों पर महागठबंधन का अधिक वोट था। वहीं, चेनारी प्रखंड के कर्णपुरा में बने आर्दश बूथ संख्या 61 पर कर्णपुरा महादलित टोला के 250 मतदाताओं ने वोट का बहिष्कार किया। यहां पर सभी रास्ते की मांग कर रहे थे। बताया जा रहा है कि इनके वोट नहीं डालने से महागठबंधन उम्मीदवार को नुकसान हुआ।  

काराकाट 
काराकाट लोकसभा क्षेत्र के नोखा प्रखंड के गांव पिपरा के बूथ पर वोट का बहिष्कार किया गया था। यहां प्रशासन द्वारा समझाने के बाद गांव के लोगों ने विलंब से मताधिकार का प्रयोग किया। इस कारण इस बूथ पर सिर्फ 40 प्रतिशत वोट पड़े।  

बक्सर 
बक्सर लोकसभा क्षेत्र में पांच गांव के मतदाताओं ने सड़क नहीं बनने पर वोट बहिष्कार किया। इसमे बक्सर विधानसभा के चार गांव है। जबकि एक राजपुर विधानसभा का गांव है। वोट वहिष्कार करने वालें गांव गोबिंदपुर, लरई, पलियां, बलुआ और राजपुर के सखुआना गांव शामिल है। गोबिंदपुर में बूथ संख्या 162 पर 1043 मतदाता थे। इनमें करीब 200 भूमिहार और बाकी यादव और पासवान है। वहीं लरई बूथ संख्या 177 पर 563 मतदाता थे। यहां यादव समाज के लोगों की संख्या अधिक है। पलियां में बूथ संख्या 157 पर मतदताओं की संख्या 611 थी। वहीं बलुआं में बूथ संख्या 169 पर 1391 मतदाता थे। बूथ संख्या 168 पर 558 मतदाता थे। राजपुर विधान सभा के सखुआना गांव में भी सड़क नहीं बनने पर ग्रामीणों ने वोट का वहिष्कार किया है। इसमे बूथ संख्या 192 पर 1329 मतदाता थे, जिनमें एक भी वोट नहीं पड़े। कुल पांचों गांव के 5495 मतदताओं ने वोट वहिष्कार किया है। इसी प्रकार सूर्यपुरा प्रखंड के बूथ संख्या 266, 267 और 268 पर वोट बहिष्कार हुआ, जिनमें 3403 मतदाता थे और वोट पड़े सिर्फ दो। 

जहानाबाद
सड़क नहीं रहने के कारण जहानाबाद सदर प्रखंड के गोनवां पंचायत के कालोपुर के ग्रामीणों ने वोट का बहिष्कार किया था। डीएम और एसपी के समझाने के बावजूद भी लोगों ने वोट नहीं डाले। इस 301 बूथ पर 818 मतदाता थे। इसी प्रकार करपी प्रखंड के कोचहसा पंचायत के चिरारी बिगहा बूथ 46 पर सड़क की मांग को लेकर वोट का बहिष्कार किया गया। इस बूथ पर 613 मतदाता थे। 

आरा 
आरा लोकसभा क्षेत्र के अगिआंव प्रखंड की डिलिया पंचायत के विशंभरपुर गांव में समीप के बनास नदी पर पुल निर्माण और गांव तक आने वाले रास्ते पर पक्की सड़क बनाने की मांग को लेकर मतदाताओं ने वोट बहिष्कार किया। यहां 747 मतदाता थे, पर सिर्फ 22 वोट ही पड़े। आजादी के 72 वर्ष बाद भी इस गांव की महत्वपूर्ण जरूरतों में शामिल रोड और पुलिया का निर्माण नहीं हो पाया है।

नालंदा 
नालंदा लोकसभा क्षेत्र में 13 स्थानों पर लोगों ने वोट का बहिष्कार किया। इनमें 12 बूथों पर एक भी वोट नहीं पड़ा। वहीं एक बूथ पर मात्र एक वोट पड़ा। वहीं कुछ ऐसे बूथ भी रहे जहां सिर्फ दस-20 वोट ही पड़े। अधिकांश जगहों पर वोट बहिष्कार का कारण सड़क की मांग ही थी। सरमेरा प्रखंड के चेरो गांव में बूथ संख्या 109 पर 759 वोट नहीं पड़े। बूथ संख्या 108 पर 750 मतदाता थे, जिनमें एक ने ही वोट डाला। नहर में पानी नहीं आने, बिजली नहीं पहुंचने, पेयजल आपूर्ति नहीं होने से लोग नाराज थे। सिलाव प्रखंड के जुआफर बाजार बूथ संख्या 177 पर वोट नहीं पड़ा। दुलरुआ बिगहा गांव की बूथ संख्या 141 पर भी यही हाल था। दोनों स्थानों पर लोग सड़क की मांग कर रहे थे। गिरियक प्रखंड के रामनगर-मरकट्टा गांव में बूथ संख्या 166 पर भी सड़क के कारण वोट नहीं डालक गयक। 

इस्लामपुर प्रखंड के हरसेनी गांव स्थित बूथ संख्या 259, मुस्तफापुर गांव स्थित बूथ संख्या 168 और चंडी प्रखंड के घोरहरी गांव स्थित बूथ संख्या 171 पर भी लोगों ने सड़क के लिए बूथ का बहिष्कार किया। घोरहरी में तो महिलाओं ने झाड़ू लेकर प्रदर्शन किया। चंडी के महमदपुर गांव की बूथ संख्या 97 पर लोगों ने पुल के लिए वोट नहीं डाला। करायपरसुराय प्रखंड की बूथ संख्या 35 पर लोग सड़क और पानी की मांग कर रहे थे। इधर, हिलसा के धर्मपुर गांव स्थित बूथ संख्या 92 पर लोगों ने सड़क के लिए वोट बहिष्कार किया। बिहारशरीफ प्रखंड के श्यामनगर गांव स्थित बूथ संख्या 39 पर लोगों ने स्कूल की खराब हालत के लिए वोट नहीं डाला। वहीं नेवाजी बिगहा गांव की बूथ संख्या 89 लोगों ने रोड नहीं तो वोट नहीं का नारा बुलंद कर मतदान नहीं किया। राजगीर के चंदौरा गांव के लोगों ने भी वोट का बहिष्कार किया। रोड व पानी की मांग कर रहे थे। हालांकि, यहां बीडीओ द्वारा जबरन आंगनबाड़ी सेविका से एक वोट दिलवा देने का ग्रामीणों का आरोप है।

पटना साहिब: 1939 मतदाता में मात्र चार ने दिये वोट 
पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र में बख्तियारपुर नगर परिषद के प्राथमिक विद्यालय बेलथान के दो बूथों पर सड़क नहीं होने के कारण लोगों ने वोट का बहिष्कार किया। बूथ संख्या 226 पर 964 मतदाता में सिर्फ एक तो बूथ संख्या 227 पर 975 मतदाता में सिर्फ तीन वोट पड़े हैं। इस बूथ का क्षेत्र यादव और पासवान जाति बाहुल्य है।  

पाटलिपुत्र : 2032 मतदाता में एक ने भी नहीं दिया वोट  
पाटलिपुत्र लोकसभा क्षेत्र के नौबतपुर की बारा पंचायत के सेलारपुर और अजवां पंचायत के चर्रा गांव के लोगों ने वोट का बहिष्कार किया। रोड नहीं तो वोट नहीं के नारा के साथ ही इन गांवों के लोगों ने वोट नहीं देने का फैसला किया। सेरालपुर स्थित बूथ संख्या 329 और चर्रा के बूथ संख्या 201 पर एक भी वोट नहीं पड़ा। सेलारपुर में 1200 और चर्रा में 832 मतदाता थे। चर्रा गांव भूमिहार, यादव, चंद्रवंशी समाज बाहुल्य क्षेत्र हैं। वहीं सेलारपुर में कुर्मी और नोनिया समुदाय की आबादी अधिक है।   

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