Vaishali Lok Sabha seat Domination of ethnic equation on first ecstasy of democracy - वैशाली लोकसभा सीट: लोकतंत्र की पहली कर्मस्थली पर जातीय समीकरण का दबदबा DA Image
18 नबम्बर, 2019|1:52|IST

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वैशाली लोकसभा सीट: लोकतंत्र की पहली कर्मस्थली पर जातीय समीकरण का दबदबा

भगवान बुद्ध की कर्मभूमि और वर्धमान महावीर की जन्मभूमि होने के साथ-साथ वैशाली को विश्व में पहली बार लोकतंत्र की स्थापना और संसद के गठन का भी गौरव प्राप्त है। लगभग छठी शताब्दी ईसा पूर्व में यहां के शासक जनता के प्रतिनिधियों द्वारा चुने जाने लगे और गणतंत्र की नींव पड़ी। वैशाली गणतंत्र में 7777 निर्वाचित गण शासन व्यवस्था का संचालन करते थे।

आजादी के बाद पहली बार 1977 में वैशाली संसदीय क्षेत्र अस्तित्व में आया और हर लोकसभा चुनाव में जातीय समीकरणों पर यहां के वोटर रोचक आंकड़े गढ़ते रहे हैं। वैशाली संसदीय सीट पर 12 चुनावों में से दस बार राजपूत प्रत्याशी की जीत हुई है। दो बार भूमिहार प्रत्याशी जीते, जबकि छह बार दूसरे स्थान पर रहे। वैशाली राजद का मजबूत गढ़ रहा है। पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह यहां से लगातार पांच बार सांसद निर्वाचित हुए। वे 1996 में जनता दल तथा 1998, 1999, 2004 एवं 2009 में राजद के टिकट पर चुनाव जीते, परन्तु 2014 में लोजपा (एनडीए) के रामा किशोर सिंह ने उन्हें शिकस्त दे दी। 

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महिला लड़ाकों का रणक्षेत्र है वैशाली
वैशाली महिला लड़ाकों के लिए पसंदीदा चुनाव क्षेत्र रहा है। यहां अब तक के12लोकसभा चुनावों में से चार बार महिला सांसद निर्वाचित हुईं, जिनमें से तीन बार तो महिला उम्मीदवारों के बीच ही सीधा मुकाबला हुआ। जनता पार्टी ने 1980 में किशोरी सिन्हा को वैशाली में प्रत्याशी बनाया। किशोरी सिन्हा ने कांग्रेसी के एलपी शाही को शिकस्त दी। किशोरी सिन्हा ने कांग्रेस टिकट पर1984 में लोकदल की तारकेश्वरी सिन्हा को हाराया पर वे 1989 में जनता दल की उषा सिन्हा से हार गयीं। 1994  में बीपीपा के लवली आनंद ने किशोरी सिन्हा को शिकस्त दी।

सियासी कॅरियर का लिटमस टेस्ट
वैशाली संसदीय क्षेत्र चुनाव हारने वाले सांसद के सियासी कॅरियर का लिटमस टेस्ट साबित हुआ है। वैशाली में चुनाव हारने के बाद पूर्व केन्द्रीय मंत्री तारकेश्वरी सिन्हा एवं उषा सिन्हा, पूर्व सांसद नवल किशोर सिंह, किशोरी सिन्हा, लवली आनंद एवं वृशिण पटेल का सियासी कॅरियर में वापसी के लिए कठिन संघर्ष करना पड़ा। जनता पार्टी के दिग्विजय नारायण सिंह  ने 1977 में पूर्व कांग्रेसी सांसद नवल किशोर सिंह को शिकस्त दी। रघुवंश प्रसाद सिंह ने 1996 व 1998 में वृशिण पटेल को तथा 1999 में लवली आनंद को शिकस्त दी।

रोमांचक है वैशाली की जंग
वैशाली में राजद ने एक बार फिर डॉ. रघुवंश  सिंह को खड़ा किया है। लोजपा ने वर्तमान सांसद रामा किशोर सिंह की जगह पूर्व भाजपा विधायक वीणा देवी को पार्टी में शामिल करते हुए उम्मीदवार बनाया है। वीणा देवी के पति जेडीयू विधान पार्षद दिनेश सिंह ही पहले रघुवंश प्रसाद सिंह के चुनाव की व्यवस्था संभालते थे। वे रघुवंश प्रसाद सिंह के आधार वोट में सेंधमारी करने के साथ-साथ उनके चुनावी व्यूह रचना को भी भेदना चाहेंगे। इस बार वैशाली में पूर्व विधायक मुन्ना शुक्ला या उनकी पत्नी चुनाव नहीं लड़ रही हैं। 

वर्तमान सांसद : रामा किशोर सिंह
रघुवंश सिंह को एक लाख मतों से हरा बने सांसद

लोजपा के टिकट पर रामा किशोर सिंह ने 2014 के लोकसभा चुनाव में वैशाली संसदीय सीट पर राजद के दिग्गज नेता एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह को एक लाख मतों से हराया। वैशाली के कुम्हरकोल बुजुर्ग के मूल निवासी हैं। इन्होंने मुजफ्फरपुर के एलएस कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। ये 2000 से 2010 के बीच तीन बार बिहार विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हुए। 

कौन जीते कौन हारे  
2014

जीते: रामा किशोर सिंह, लोजपा, 305450
हारे: रघुवंश प्रसाद सिंह, राजद,    206183

2009
जीते: रघुवंश प्रसाद सिंह,राजद,    283454
हारे: विजय कुमार शुक्ला, जेडीयू, 262049

2004 
जीते: रघुवंश प्रसाद सिंह,राजद,    361503 
हारे: मुन्ना शुक्ला, निर्दलीय,    255568

1999
जीते: रघुवंश प्रसाद सिंह, राजद, 308458
हारीं: लवली आनंद, बीपीपा, 263066

कुल मतदाता 1421957
पुरुष मतदाता 762380
महिला मतदाता 659540
थर्ड जेंडर 37
12 मई को चुनाव  छवें चरण में
1477 मतदान केंद्र

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