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कांटे की टक्‍कर में भाजपा के प्रवीण ने गठबंधन के भीष्‍म को दी मात

संतकबीरनगर में भाजपा प्रत्‍याशी प्रवीण निषाद और गठबंधन प्रत्‍याशी भीष्‍म शंकर उर्फ कुशल तिवारी के बीच कांटे की टक्‍कर देखने को मिली। सुबह से दोपहर तक हुई मतगणना में जहां भीष्‍म शंकर आगे चल रहे थे वहीं शाम पौने चार बजते-बजते प्रवीण निषाद 16451 वोटों से आगे हो गए। प्रवीण निषाद को कुल 368724 मत मिले थे तो भीष्‍म शंकर उर्फ कुशल तिवारी को 352273 मत। 

संतकबीरनगर में साढ़े 11 बजे तक हुई मतगणना में सपा बसपा गठबंधन के भीष्‍म शंकर उर्फ कुशल तिवारी को 85841 मत और भाजपा के प्रवीण निषाद को 77319 मत मिले थे। इस सीट पर कांग्रेस के भालचंद्र यादव 23443 मत पाकर तीसरे स्‍थान पर चल रहे हैं। 

संतकबीरनगर में सपा बसपा गठबंधन के उम्‍मीदवाद भीष्‍म शंकर उर्फ कुशल तिवारी को शुरुआती बढ़त मिली है। दस बजे तक हुई मतगणना में भीष्‍म शंकर को कुल 19372 वोट मिले तो भाजपा के प्रवीण निषाद को। कांग्रेस प्रत्‍याशी भालचंद यादव 4594 वोट पाकर तीसरे नंबर पर चल रहे हैं। 

कबीर ने कहा था कि ‘जाति न पूछो साधु की...’ लेकिन यहां चुनावी महासमर की सारी गोटियां इसी के ईद-गिर्द सिमटी रहीं। जीत का सारा जोड़-घटाना जातीय गोलबंदी पर ही केंद्रित था। मुद्दे इसके आगे गायब से हो गये। दो पूर्व सांसदों और एक मौजूदा सांसद की लड़ाई ने इस संसदीय सीट को दिलचस्प बना दिया। बसपा के भीष्म शंकर उर्फ कुशल तिवारी, भाजपा से प्रवीण निषाद और कांग्रेस के भालचंद्र यादव मैदान में हैं। प्रवीण  निषाद गोरखपुर से सांसद हैं तो भाल चंद्र यादव और कुशल तिवारी यहां से सांसद रह चुके हैं। पहले ये सीट खलीलाबाद कहलाती थी लेकिन जिला बनने के बाद 2008 में परिसीमन के चलते यह संत कबीर नगर लोकसभा सीट बन गई।

संतकबीर नगर का महत्व इससे बढ़ जाता है कि यहां पिछले वर्ष प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आये थे। मगहर के बहाने उन्होंने पूरे पूर्वांचल को साधने की कोशिश की थी। देखना होगा कि प्रवीण निषाद वोटरों को लुभा पाये या नहीं। उन पर बाहरी का ठप्पा लगा था। वह (निर्बल इण्डियन शोषित हमारा आम दल) निषाद पार्टी  के अध्यक्ष संजय निषाद के बेटे हैं। गोरखपुर संसदीय सीट पर हुए उपचुनाव में प्रवीण निषाद जीते थे। वह सपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे। इस बार वह भाजपा के सिम्बल पर चुनाव लड़े।

जूता कांड की रही चर्चा:
यहां के मौजूदा सांसद शरद त्रिपाठी की चर्चा ने चुनावी माहौल को चटपटा बना दिया। शरद त्रिपाठी का अपनी ही पार्टी के एक विधायक पर एक बैठक में जूते से पिटाई करने का वीडियो खूब वायरल हुआ। तभी से माना जा रहा था कि पार्टी इस अनुशासन हीनता पर टिकट तक काट सकती है और उनका टिकट कट भी गया।    

हालांकि शरद त्रिपाठी का टिकट काटने में भाजपा को बहुत मंथन करना पड़ा। यहां चर्चा थी कि उनका टिकट काटने से पहले भाजपा को अपने बेस वोट बैंक की चिंता थी। इस बात की पूरी कवायद थी कि टिकट कटा तो ब्राह्मण नाराज और न कटे तो ठाकुर।  इसका तोड़ पार्टी ने निकाला कि उनके पिता रमापति राम त्रिपाठी को देवरिया से टिकट दे दिया।  इससे उसने दोनों बेस वोटर की नाराजगी से बचने की कोशिश की। शरद पहली बार 2009 में लोकसभा का चुनाव लड़े लेकिन हार गये थे। 2014 में मोदी लहर में संसद पहुंच गये।

पूर्व सांसद को मिला कांग्रेस का साथ
चर्चा सिर्फ शरद त्रिपाठी की ही नहीं बल्कि पूर्व सांसद भालचंद्र यादव के साथ हुए अन्याय की भी थी। भालचंद्र इस बार कांग्रेस से मैदान में उतरे। कांग्रेस ने यहां से पहले घोषित अपने प्रत्याशी को बदलकर समाजवादी पार्टी से सांसद रह चुके भालचंद्र यादव को मैदान में उतारा। भालचंद्र यहां से दो बार सांसद रह चुके हैं। बस्ती और संत कबीर नगर जिलों में सपा के जिलाध्यक्ष भी रह चुके हैं और यहां उनकी छवि जमीनी नेता की है। भालचंद्र यादव को यहां से उतारने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।  

बाहरी प्रत्‍याशी पर मतभेद
भाजपा के प्रत्याशी प्रवीण निषाद को यहां बाहरी प्रत्याशी माना गया। हालांकि यहां की पांचों विधानसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा है।  यह भाजपा प्रत्याशी के लिए मजबूती देने वाला था लेकिन जातीय गोलबंदी में कौन किसको साध पायेगा, यह देखने वाला होगा। एक अनुमान के मुताबिक यहां 2.5 लाख ब्राह्मण, 4.20 लाख एससी वर्ग, 3.75 लाख मुस्लिम हैं। वहीं पिछड़ों के भी निर्णायक मत हैं।
 
बसपा ने ब्राहमण चेहरा मैदान में उतारा

बहुजन समाज पार्टी ने इसी सीट से अपने सांसद रहे भीष्म शंकर उर्फ कुशल तिवारी को यहां से फिर मैदान में उतारा। वह 2009 में इस सीट से सांसद रह चुके हैं और 2014 में दूसरे नंबर पर रहे। कुशल तिवारी कद्दावर नेता हरिशंकर तिवारी के बेटे हैं लिहाजा ब्राह्मण वोट साधने के लिए उनसे बेहतर कोई प्रत्याशी नहीं हो सकता था। पूर्वांचल में ब्राह्मण वोट साधने के  लिए हरिशंकर तिवारी बड़ा नाम है। वहीं गठबंधन के चलते यादव, मुस्लिम और दलित वोट भी साथ है। 

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