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आरपीएन रहे तीसरे नंबर पर, भाजपा के विजय ने सपा के नथुनी को हराया

कुशीनगर में साढ़े 11 बजे तक हुई मतगणना में भाजपा के विजय दुबे  को 81124 और सपा-बसपा गठबंधन के नथुनी प्रसाद को 34726 मत मत मिले थे। जबकि कांग्रेस के आरपीएन सिंह 16937 मत पाकर तीसरे  नंबर पर चल रहे थे।

कुशीनगर में कांग्रेस के दिग्‍गज नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री आरपीएन सिंह  तीसरे नंबर पर चल रहे हैं। सवा दस बजे तक हुई मतगणना में उन्‍हें कुल 5337 मत मिले थे जबकि सपा-बसपा गठबंधन के उम्‍मीदवार नथुनी कुशवाहा को 10373 और भाजपा के विजय दुबे को 25075 मत। 

उत्तरी पूर्वांचल का कुशीनगर क्षेत्र हवा के साथ बहता रहा है। जो लहर आई, इलाका उसी के साथ हो लिया। 2019 के आम चुनाव से ठीक पहले यह इलाका लहर और उदासीनता के बीच की स्थिति में दिख रहा है। गांवों के बीच भी नजरिया बदला हुआ है। कहीं एयर स्ट्राइक की हवा है, तो कहीं बेरोजगारी, बाढ़, खेती के मुद्दे हावी हो रहे हैं। मुस्लिम तीन-तलाक बिल को अपनी जिंदगी में सरकारी हस्तक्षेप मान रहे हैं। जातीय दावेदारियों ने मुकाबलों को त्रिकोणीय बना दिया। जमीनी मुद्दे इस त्रिकोण में अपनी जगह तलाशते रहे। कांग्रेस के आरपीएन सिंह, भाजपा के विजय दुबे और गठबंधन के नथुनी कुशवाहा ने पूरा जोर लगाया। उनके बीच हुई इस जंग का अंजाम आज पता चल जाएगा। आइए जानते हैं भगवान बुद्ध की निर्वाण स्थली पर कैसे लड़ी गई ये चुनावी जंग-

यह कुशीनगर है। भगवान बुद्ध की निर्वाण स्थली। यहीं हिरण्यवती नदी का पानी पीकर बुद्ध ने अंतिम सांस ली थी। करीब-करीब सूख चुकी हिरण्यवती नदी को सदानीरा बनाने की कोशिशें शुरू हुई हैं। अचरज की बात है कि इस नदी का संरक्षण यहां कभी बड़ा मुद्दा नहीं बना। कभी जाति, कभी धर्म, कभी लोकलुभावन वायदे तो कभी चुनावी लहरों ने यहां चुनावी फैसले सुनाए। इस बार भी कुछ ऐसी ही तस्वीर यहां उभर रही है। सियासी तरकशों में जातियों के पैने तीर सजे हैं। किसानों की बदहाली, बेरोजगारी, उद्योगों की जरूरत और तालीम के इंतजामों की मांग तो है पर वह जातीय चोले ओढ़ कर मुखर हो रही है। सम्मान निधि, एयर स्ट्राइक, ‘न्याय' के 72 हजार, उज्ज्वला, बेरोजगारी, बेघरों को घर, सौभाग्य की बिजली को जातीय खेमों में बंट कर प्रशंसा या निंदा मिल रही है। विरोधाभास देखिए कि इसी जमीन पर कहीं बुद्ध ने धम्मपद का श्लोक गाया होगा, ‘अंधकारेन ओनद्धा पदीपं न गवेसथ' (अंधकार में घिरे हुए तुम लोग प्रकाश को क्यों नहीं खोजते)। यहां इस चुनाव में 17 लाख से ज्यादा मतदाता अपने लिए प्रकाश खोजेंगे।

कुशीनगर उन सीटों में से है, जहां भाजपा ने अपने सांसद का टिकट काटा है। राजेश पांडेय 2014 में सांसद चुने गए थे। उन्होंने मनमोहन सरकार में कद्दावर मंत्री रहे आरपीएन सिंह को हराया था। इस बार जिताऊ प्रत्याशी की खोज भाजपा को पूर्व विधायक विजय दुबे तक ले गई। दुबे योगी आदित्यनाथ की हिन्दू युवा वाहिनी से जुड़े रहे हैं। 2012 के विस चुनाव में उन्हें भाजपा से टिकट नहीं मिला तो वह कांग्रेस के टिकट पर लड़े और खड्डा विस क्षेत्र से चुनाव जीत लिया। राज्यसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस को दरकिनार कर भाजपा का साथ दिया। उम्मीद थी 2017 के विस चुनाव में भाजपा उन्हें उम्मीदवार बनाएगी। पर ऐसा नहीं हुआ। तब से खामोश बैठे विजय दुबे को भाजपा ने आम चुनाव में उतारा है। कांग्रेस ने इलाके में जाने-पहचाने चेहरे पूर्व मंत्री आरपीएन सिंह को उतारा है। गठबंधन में यह सीट सपा के खाते में गई। जिसने यहां एनपी कुशवाहा पर दांव लगाया है।

उत्तरी पूर्वांचल में यह अकेली सीट है, जहां जबरदस्त त्रिकोणीय मुकाबला होने के आसार हैं। इलाका ब्राह्मण और मौर्या-कुशवाहा वोटरों की बहुलता वाला है। गठबंधन ने यहां एनपी कुशवाहा को उतार कर भाजपा की रफ्तार रोकने की कोशिश की है। साथ ही मुस्लिम, यादव, दलित समीकरण के साथ मुख्य मुकाबले में है। कांग्रेस के आरपीएन सिंह इलाके के प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार से हैं। वह यहीं से सांसद भी रहे हैं। ऐसे में तीनों प्रत्याशियों के बीच एक-एक वोट की जंग है।

घर-टॉयलेट-पेंशन के बावजूद गठबंधन के साथ
पडरौना कस्बे से कोई 9 किमी दूर गांव बड़हरागंज। करीब 10 हजार आबादी वाले इस गांव में 6 हजार मतदाता है। मुस्लिम यहां बहुसंख्यक हैं। सरकार ने यहां 400 घरों में टॉयलेट बनवाए हैं। उज्जवला की गैस 50 घरों को मिली। गांव की सड़कें साफ सुथरी हैं पर अंदर गंदगी बजबजा रही है। यहां डॉ. सिकंदर के क्लीनिक पर कुछ मरीज बैठे हैं। हम बात शुरू करते हैं बड़हरागंज किसे जिताएगा? नौजवान शौकत, तालिक एक साथ बोल उठते हैं, ‘यहां तो गठबंधन ही जीतेगा।' क्यों? साफ-साफ कोई जवाब नहीं देते पर भाजपा सरकार को रोजगार, खेती और आर्थिक मामलों में फेल कहते हैं। सरकार ने घर, टॉयलेट व बिजली तो दी ? एक बुजुर्गवार ने कहा-दी है तो क्या? इस सरकार को तीन तलाक में टांग अड़ाने की क्या जरूरत थी। हम मजहब के मुताबिक जिंदगी बसर करने को आजाद हैं। भाजपा सरकार इसमें छेड़छाड़ कर रही है। हम गठबंधन को वोट देंगे। 

‘न्याय' पर भरोसा, गठबंधन से किनारा
यहां से कुछ दूर आठ-दस लोगों का जत्था बातों में मशगूल है। यहां बात शुरू होती है। किसका साथ देगा यह गांव? जावेद शुरू करते हैं, ‘भाजपा से कांग्रेस ही लड़ रही है। छोटी पार्टियां मोदी को जवाब न दे पाएंगी। इसलिए हमारे गांव में ज्यादातर लोग कांग्रेस का साथ देंगे।' मुबारक अली नया एंगिल जोड़ते हैं, ‘आरपीएन सिंह यहां सांसद थे। पिछली बार भाजपा से हार गए। उन्होंने बहुत काम किया। गठबंधन से ठीक हमारे लिए वही हैं।' कुछ और लोग भी उनकी बातों पर सहमति जताते हैं। क्या भाजपा सरकार ने काम नहीं किया? जवाब मिलता है- कुछ काम तो जरूर किया लेकिन हमारी हालत कहां सुधरी। घर, टॉयलेट तो पहले की सरकारें भी देती थीं। 

पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब के प्रशंसक भी 
पडरौना कस्बे से कसया जाने वाले रास्ते के एक चौराहे पर चाय की दुकान। दस-बारह नौजवानों का मजमा लगा है। इनमें से दो केसरिया गमछा डाले है। यहां बात शुरू होते ही लगता है, इलाके में एयर स्ट्राइक की तेेज हवा है। दीपक शुक्ला ने कहा-किसी सरकार ने हिम्मत नहीं दिखाई कि हमला करे। भाजपा सरकार बालाकोट तक चढ़ गई। सैकड़ों आतंकी खत्म कर दिए। अब क्या पूछना कि वोट किसे देंगे। भाजपा जीतेगी। राजेन्द्र यादव 30 पार के नौजवान हैं। वह भी दीपक से सहमत दिखे। उन्होंने कहा-किसानों को 6 हजार रुपए सालाना इससे पहले किसने दिया? जब किसानों को पैसा मिलने लगा, तब कांग्रेस 72 हजार का वादा लेकर आई है। यह चुनावी वादा है। पूरा नहीं होगा। इस सरकार ने पाकिस्तान को घुटनों पर ला दिया। 

काम का जिक्र नहीं, जाति के नाम पर साथ
पडरौना से 15 किमी उत्तर में बसा गांव सरपतही बुजुर्ग। पिछड़े खासकर कुशवाहा आबादी यहां ज्यादा है। चार हजार आबादी वाले इस गांव में 2500 वोटर हैं। यहां 25 गरीबों को सरकार ने आवास दिए हैं। 100 से ज्यादा टॉयलेट बने हैं। 110 किसानों को सम्मान निधि की किस्त मिल चुकी है। बावजूद गठबंधन का झंडा यहां बुलंद है। गांव के उत्तरी छोर पर पेड़ के नीचे फूलबदन कुशवाहा, रामजीत बौद्ध, बिकऊ, विनीत और कई लोगों के साथ बैठे हैं। सरपतही बुजुर्ग किसे दिल्ली भेजेगा? सभी गठबंधन के साथ होने की बात खुलकर कहते हैं। वजह? फूलबदन स्वीकार करते हैं कि वह स्वजातीय प्रत्याशी होने से गठबंधन का साथ देंगे। यहां सपा के एनपी कुशवाहा गठबंधन के प्रत्याशी हैं। 

मतदान-
19 मई को हुआ था

2014 के नतीजे 
3,70,051 राजेश पांडेय, भाजपा
2,84,511 आरपीएन सिंह,  कांग्रेस
1,32,881 डा.संगम मिश्र, बसपा
1,11,256 राधेश्‍याम सिंह, सपा
-2009 के आम चुनाव में यहां से कांग्रेस के रंजीत प्रताप नारायण जीते थे

सर्वे के बाद अधर में रेल लाइन
कुशीनगर को रेल लाइन से जोड़ने की मांग लंबे समय से चली आ रही है। 2016 के रेल बजट में सरदारनगर से कुशीनगर होते हुए पडरौना तक रेल लाइन का सर्वे करने की व्यवस्था हुई। पूर्वोत्तर रेलवे ने इस रूट का सर्वे कराते हुए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट रेलवे बोर्ड को भेज भी दी है। पर इसके बाद बजट में वित्तीय स्वीकृति न मिलने के कारण मामला अधर में लटका हुआ है। 

बाढ़ की तबाही से बचाने की चुनौती 
कुशीनगर में बाढ की समस्या विकराल है। हर साल बाढ़ में खड्डा के रेता क्षेत्र के दर्जनों गांव जिले से कट जाते हैं। तमकुहीराज क्षेत्र के एपी तटबंध के किनारे पिपराघाट के चार पुरवे, विरवट कोहन्वलिया का एक पुरवा, बाघाचौर का दो, अहिरौलीदान का पांच पुरवा समेत 12 पुरवों का अस्तित्व समाप्त होने से इन गांवों की 4 हजार आबादी एपी तटबंध पर रह रही है। तबाही मचाने वाली नदी बड़ी गंडक 2009 से लगातार कटान कर लोगों को बेघर कर रही है।

पड़रौना की बंद पड़ी चीनी मिल
कपड़ा मंत्रालय के अधीन रही पडरौना चीनी मिल वर्षों से बंद पड़ी है। लोकसभा चुनाव 2014 में पडरौना में चुनाव प्रचार के दौरान पीएम मोदी ने सरकार बनने के एक साल के अंदर इसे चालू कराने का वादा किया था। इसी बीच कोर्ट के आदेश पर एक दर्जन से अधिक बार चीनी मिल को नीलाम करने का जिला प्रशासन ने प्रयास किया, पर खरीददार न मिलने से मामला अधर में लटका हुआ है। एक बार फिर लोकसभा चुनाव में कुशीनगर के प्रमुख चुनावी मुद्दे में शामिल है।

आरपीएन सिंह (कांग्रेस प्रत्‍याशी)
उम्र 54 साल। शिक्षा ग्रेजुएट-आनर्स। व्यवसाय कृषि। 1996 में कांग्रेस-बसपा गठबंधन से विधायक बने। इसके बाद 2002 व 2007 विधानसभा चुनाव में पडरौना से विधायक चुने गए। विधायक रहते हुए 2004 में कांग्रेस के टिकट पर पडरौना लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े, मगर हार मिली। 2009 लोकसभा चुनाव में कुशीनगर संसदीय सीट (पूर्व में पडरौना) के सांसद चुने गए। केंद्र सरकार में परिवहन, पेट्रोलियम, गृह राज्य मंत्री रहे। 2014 में भाजपा के राजेश पांडेय से चुनाव हार गए।

नथुनी कुशवाहा (सपा-बसपा गठबंधन प्रत्‍याशी)
उम्र 63 वर्ष। शिक्षा-एमए, बीएड। 1996 से 98 तक सपा के जिलाध्यक्ष। 1996 में सपा से पडरौना विधान सभा का चुनाव लड़े। वर्ष 2004 में बसपा से पडरौना लोकसभा क्षेत्र का चुनाव लडे़। बीच में बसपा में गए तो कुछ दिनों बाद फिर समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में कुशवाहा को पार्टी ने खड्डा विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया, लेकिन किसी चुनाव में जीत नहीं मिली। पडरौना शहर में दो शिक्षण संस्थाएं संचालित करते हैं।

विजय दुबे (भाजपा प्रत्याशी)
उम्र 59 वर्ष। 1982 में गोरखपुर विश्वविद्यालय से बीए प्रथम वर्ष तक शिक्षा। खड्डा क्षेत्र के ग्राम मठिया निवासी। व्यवसाय कृषि। वर्ष 2002 में हिन्दू युवा वाहिनी के जिला संयोजक बनकर राजनीति की शुरुआत की। 2009 में भाजपा के टिकट पर पडरौना लोकसभा का चुनाव लड़े, लेकिन हार गए। बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए और 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में खड्डा से विधायक निर्वाचित पुत्र शशांक वर्तमान में नेबुआ नौरंगिया के ब्लॉक प्रमुख हैं। 2017 विस चुनाव से ठीक पहले वे भाजपा में शामिल हो गए।

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