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सीएम के शहर में रविकिशन 3 लाख वोट से जीते, मना जश्‍न

गोरखपुर सदर लोकसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी को रवि किशन को जीत मिली। उन्होंने 301664 वोटों के अंतर से जीत हासिल की है। इस सीट पर रवि किशन को 717122 वोट मिले जबकि प्रतिद्वंदी सपा प्रत्याशी रामभुआल को 415458 वोट मिले। 

गोरखपुर से भाजपा प्रत्‍याशी रविकिशन भारी जीत की ओर बढ़ रहे हैं। शाम साढ़े चार बजे तक रविकिशन को 711437 वोट मिले थे। जबकि गठबंधन उम्‍मीदवार रामभुआल को 411538 वोट। इस तरह रविकिशन कुल 299899 वोटों की बढ़त मिल गई थी। 

गोरखपुर में साढ़े 11 बजे तक हुई मतगणना में भाजपा के रविकिशन को 214713 और सपा के रामभुआल निषाद को 127310 मत मिले थे।

सुबह साढ़े नौ बजे तक की मतगणना में भाजपा प्रत्‍याशी रविकिशन 23451 मतों से आगे चल रहे हैं। उन्‍हें कुल 42134 मत मिले हैं जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंदी सपा के रामभुआल निषाद को 18683 वोट। मतों की गणना लगातार जारी है।

सीएम योगी की प्रतिष्‍ठा की सीट है गोरखपुर

गोरखपुर में योगी, अखिलेश व मायावती तीनों की प्रतिष्ठा दांव पर है। योगी ने यहां डेरा डाले रखा और बूथ स्तर तक निगरानी की। उनकी हिंदू युवा वाहिनी व संघ पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा सक्रिय दिखे। उधर, गठबंधन इस छीने हुए गढ़ पर हर हाल में काबिज रहने के लिए संघर्षरत रहा। ऐसे में क्या होगा? क्या भाजपा अपना गढ़ वापस छीन पाएगी? ऐसे तमाम सवाल लोगों के जेहन में काफी दिनों से हैं। आज इन सारे सवालों का जवाब मिल जाएगा। आइए जानते हैं इस बार क्‍या रहा इस सीट का मिजाज- 

‘अब अक्सर चुप-चुप से रहे हैं/ यूं ही कभी लब खोले हैं।
पहले फिराक को देखा होता/अब तो बहुत कम बोले हैं।।’

यह फिराक गोरखपुरी ने कहा था। लेकिन आज का गोरखपुर मुखर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ में कहीं उपचुनाव की हार का पछतावा है, तो कहीं गठबंधन की जीत का हौसला। दोनों पक्षों का उत्साह चरम पर है। इनके बीच जगह बनाने को बेताब कांग्रेस अभी तक मुख्य मुकाबले में नहीं आ सकी है। दशकों की दुश्मनी के बाद सपा-बसपा में मेल की प्रयोगशाला गोरखपुर ही बना था। 2018 के उपचुनाव में सपा-बसपा ने मिल कर प्रवीण निषाद को लड़ाया और 29 साल बाद भगवा ब्रिगेड से उसका गढ़ छीन लिया। यह अलग बात है कि प्रवीण के गले में अब भगवा दुपट्टा है। वह पाला बदल कर पड़ोस की संतकबीर नगर सीट से भाजपा के उम्मीदवार हैं। उपचुनाव में सफल प्रयोग से मजबूत हुआ गठबंधन आम चुनाव में भाजपा को पूरे प्रदेश में कड़ी चुनौती दे रहा है। 

सूबा बाजार में भाजपा के बूथ कार्यकर्ताओं के सम्मेलन का मंच। मुख्यमंत्री योगी मंच पर हैं। राम मिलन जी आगे आइए। ए रावण... बैठ जाओ। दिनेश तुम्हारे बूथ की बैठकें हो गईं या नहीं... किसी मुख्यमंत्री को तो अपने चुनाव में भी ऐसी कवायद नहीं करनी पड़ती। लेकिन यह योगी का स्टाइल है, साथ ही मजबूरी भी है। उपचुनाव में भाजपा की हार उनके लिए बड़ा झटका थी। गोरखपुर में भाजपा से कोई भी चुनाव लड़े, इसे योगी की हार-जीत के रूप में ही देखा जाता है। इस बार वह रविकिशन को चुनाव लड़वा रहे हैं। रविकिशन खुद कह रहे हैं, ‘मैं तो बाबा की खड़ाऊं लेकर चुनाव लड़ रहा हूं।’ उपचुनाव में प्रत्याशी रहे उपेंद्र शुक्ल अब भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं। रविकिशन की ज्यादातर सभाओं में उपेंद्र्र उनके साथ दिखते हैं।

मुकाबला कड़ा है। गठबंधन में सपा के कोटे में गई गोरखपुर सीट पर रामभुआल निषाद प्रत्याशी हैं। उत्तर प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री और दो बार विधायक रहे हैं। पिछड़ों के बीच मजबूत पकड़ वाले नेता रामभुआल भाजपा को कांटे की टक्कर दे रहे हैं। गठबंधन के मूल वोटरों का हौसला भी उपचुनाव के परिणाम से बढ़ा-चढ़ा है। भाजपा मोदी के नाम, योगी के काम और गोरखपुर की दो साल में हुई तरक्की की बुनियाद पर चुनाव लड़ रही है। जबकि  गठबंधन ने जातिगत समीकरणों का मजबूत ताना-बाना बनाया है। 

गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्रो. अजय शुक्ल कहते हैं, ‘गठबंधन निषाद, यादव, दलित और मुसलमान वोटों को एक प्लेटफॉर्म पर लाने के नाम पर मजबूत है। लेकिन राजनीति में कई बार अंकगणित काम नहीं करता।’ वह मानते हैं कि योगी-मोदी के नाम पर जातियों की जकड़ टूटती है। यह कितना टूटेगी, इसी पर गोरखपुर का नतीजा निर्भर करेगा। गोरखपुर की तरक्की को पैमाना बनाएं, तो पिछले दो साल में हालात बिल्कुल बदल गए हैं। एम्स, खाद कारखाना और चीनी मिलों से बेरोजगारों, बीमारों, किसानों, आम शहरियों सभी को बड़ा लाभ मिला है। पूर्व मेयर और कांग्रेस नेता पवन बथवाल कहते हैं, ‘यह बिना मुद्दे का चुनाव है। कटुता बढ़ाने वाले बयान हर तरफ से उछल रहे हैं। लोगों की कांग्रेस से उम्मीदें हैं।’

विधायकों का भी इम्तिहान : गोरखपुर में भले ही योगी का रसूख दांव पर हो, अग्निपरीक्षा विधायकों की है। इस लोकसभा सीट के सभी पांचों विधानसभा क्षेत्रों पर भाजपा काबिज है। योगी ने इस बार सभी विधायकों को कहा है कि वे अपने चुनाव में जितने वोट पाए थे, उससे ज्यादा वोट रविकिशन को दिलवाएं। दरअसल उपचुनाव में हार की एक वजह यह भी थी कि गोरखपुर शहर व कैंपियरगंज विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा प्रत्याशी को उतने वोट भी नहीं मिले, जितने विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशियों को मिले थे। 

प्रत्याशी का पता नहीं, पर जीतेंगे मोदी : ग्रामीण इलाके का मोतीराम अड्डा बाजार। चौराहे पर फलों का ठेला लगाने वाले 18 वर्षीय कृष्णा पहली बार वोटर बने हैं। यहां कौन जीत रहा है, इस सवाल पर उन्होंने बेलौस जवाब दिया, ‘मोदी जीतेंगे। उन्होंने टॉयलेट और  घर बनवाए हैं। हालांकि कृष्णा को यह नहीं पता कि गोरखपुर में कौन-कौन प्रत्याशी हैं। हालांकि रामसूरत कालेज के छात्र राजकुमार विनोद और अभिनव ने कहा, ‘मोदी को साइकिल वाला टक्कर दे रहा है।’ इनसे अलग कुसुम्ही के दिनेश ने कहा, ‘मोदी ही जीतेंगे।’ लेकिन संवरू ने गठबंधन को मजबूत बताया।

कैम्पियरगंज, जसवल, पिपराइच, भिटनी, सहजनवां आदि जगहों पर भी लोगों की राय बंटी हुई नजर आई। हालांकि  भाजपा को आगे बताने वाले ज्यादातर लोगों ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को श्रेय दिया। जबकि गठबंधन समर्थकों ने कहा कि भाजपा मोदी के नाम पर वोट मांग रही है जबकि  गठबंधन को अपने काम की बदौलत वोट मिलेगा।

घनी आबादी वाले उर्दू बाजार में मिले नफीस ने कहा,  ‘योगी जी ने गोरखपुर में विकास कराया, पर भाजपा नफरत की सियासत कर रही है।’ सदाकत बोले, ‘भाजपा योगी जी के कारण लड़ाई में है। उपचुनाव में भी भाजपा का बड़ा जोर बताया जा रहा था। लेकिन सपा जीती थी। इस बार भी यही होगा।’ 

गोरखनाथ मंदिर से सटे जाहिदाबाद में रफी बोले, ‘गोरखनाथ मंदिर से हमारा पीढ़ियों का रिश्ता है। हमारे सुख-दुख में मंदिर साथ देता है। बाबा (योगी) हमारे सारे काम करते हैं। इसलिए हमारा पूरा परिवार भाजपा को वोट देता है। योगी लड़ें या न लड़ें, वो जिसे कहते हैं, हमारा वोट वहीं जाता है।’

इन्सेफेलाइटिस का खात्मा नहीं हुआ
इन्सेफेलाइटिस का रोग 40 साल से इस इलाके में कहर बरपा रहा है। अब तक 10 हजार से ज्यादा बच्चों की जान जा चुकी है। बीते दो साल में सफाई पर जोर और इलाज के संसाधन बढ़ाकर कई सुधार किए गए हैं, पर अभी इसे खत्म नहीं किया जा सका है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बेड की संख्या 268 से बढ़ा कर 428 कर दी गई है। नर्सों की संख्या भी दोगुनी हो गई है। आधुनिक वेंटिलेटर लगाए गए हैं।

नदियों को बचाने की जरूरत
प्रदूषण से क्षेत्र की नदियों का दम फूल रहा है। आमी और राप्ती दोनों नदियों का बुरा हाल है। एमएमएमयूटी में पर्यावरण इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. गोविंद पांडेय कहते हैं कि एनजीटी की सख्ती के बाद भी नदियों में बिना ट्रीटमेंट गंदा पानी गिराया जाता है। बांधों और नदी के बीच लोगों ने घर बना लिए हैं। इनका कचरा नदियों में ही जाता है। नौसड़ से कौड़ीराम रोड पर लोगों ने नदी के पेटे में कई घर बना लिए हैं।

बाढ़ की बर्बादी से नहीं मिली निजात
गोरखपुर के 200 से ज्यादा गांव हर बारिश में बाढ़ के खतरे का सामना करते हैं। गोरखपुर ने 1998 में सदी की भीषणतम बाढ़ झेली थी। तब अकेले गोरखपुर में बाढ़ ने 127 से अधिक जिंदगियां निगल ली थीं। करीब पांच लाख लोग प्रभावित हुए थे। 2017 में एक बार फिर नदियों ने तबाही मचाई। बचाव और राहत पर अकेले गोरखपुर में 13 करोड़ रुपये खर्च हो गए। हालांकि उसके बाद कुछ प्रभावी काम हुए। आपदा से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंध प्राधिकरण ने 200 नौजवानों को दक्ष बनाया है। नदियों की बाढ़ से निपटने के लिए अब एनडीआरएफ की एक टुकड़ी गोरखपुर में रहती है।

बदल रही सूरत
इन्सेफेलाइटिस के मुद्दे पर ‘हिन्दुस्तान’ ने व्यापक अभियान चलाया था। अंतत: सरकार ने गोरखपुर में एम्स बनाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसके शीघ्र निर्माण पर जोर दिया। अब यहां ओपीडी शुरू हो चुकी है। 

26 वर्षों से बंद पड़े खाद कारखाने को दोबारा शुरू करने के लिए नए कारखाने के निर्माण का काम चल रहा है। वर्ष 2020 तक उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य तय किया गया है। 

गोरखपुर की विशाल रामगढ़ झील में नौका विहार व इसके सौंदर्यीकरण का काम प्राय: पूरा हो चुका है। तारामंडल क्षेत्र में पूर्वांचल का पहला चिड़ियाघर भी बन रहा है।

गोरखपुर लोकसभा सीट के तहत आने वाले विधानसभा क्षेत्र :
गोरखपुर शहर, गोरखपुर ग्रामीण, कैम्पियरगंज, पिपराइच, सहजनवा
(इन सभी विधानसभा सीटों पर अभी भाजपा काबिजहै)

रामभुआल निषाद, सपा (गठबंधन)
उम्र 58 वर्ष। शिक्षा स्नातक तक। दो बार कौड़ीराम विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे। 2007 में उप्र सरकार में मत्स्यपालन विभाग के राज्यमंत्री रहे। 2014 में बसपा के टिकट पर गोरखपुर संसदीय सीट से चुनाव लड़े और हार गए।

मधुसूदन त्रिपाठी, कांग्रेस
उम 64 वर्ष। शिक्षा बीएससी, एलएलबी। बार एसोसिएशन सिविल कोर्ट के तीन बार अध्यक्ष रहे। वर्तमान में प्रदेश बार काउंसिल के सदस्य। पहली बार राजनीति में प्रवेश। पत्नी उषा राजनीति में सक्रिय नहीं। दो बेटे।

रवींद्र श्यामनारायण शुक्ल उर्फ रविकिशन, भाजपा
उम्र 51 वर्ष। शिक्षा इंटरमीडिएट तक। फिल्म अभिनेता और प्रोडक्शन हाउस के मालिक। पांच साल से राजनीति में सक्रिय। 2014 में जौनपुर संसदीय सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े, जिसमें वह हार गए थे। पत्नी प्रीति शुक्ला भी चुनाव में सक्रिय। तीन बेटियां और एक बेटा।

तीन चुनावों में योगी ने पाए आधे से ज्यादा वोट
1998    42.62%
1999    41.10%
2004    51.31%
2009    53.85%
 

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