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1.52 लाख वोटों से सदल को हरा कर तीसरी बार सांसद बने कमलेश

बांसगांव में साढ़े 11 बजे तक हुई मतगणना में भाजपा के कमलेश पासवान को 228564 और सपा के सदल प्रसाद को 161150 मत मिले थे।

बांसगांव संसदीय सीट पर भाजपा प्रत्‍याशी कमलेश पासवान जीत की हैट्रिक बनाने की राह पर हैं। अब तक की मतगणना में वह आगे चल रहे हैं। पौने दस बजे तक हुई मतगणना में उन्‍हें कुल 74545 वोट मिले। जबकि उनके निकटतम प्रत्‍याशी सपा-बसपा गठबंधन के सदल प्रसाद को 41654 वोट। 

बांसगांव संसदीय सीट प्रारंभ से ही अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित रही है। वैसे तो यह संसदीय सीट गोरखपुर जिले का हिस्सा है मगर इसके दो विधानसभा क्षेत्र (रुद्रपुर और बरहज) देवरिया जिले में पड़ते हैं। इस संसदीय क्षेत्र की बहुतायत आबादी ग्रामीण है। आजादी की लड़ाई में भी इस क्षेत्र का बड़ा योगदान है। शौर्य की अनगिनत गाथाएं यहां की फिजा में गूंजती हैं। 

कुदरत ने तो इस क्षेत्र को अपार जल संपदा दी है, ऋतंभरा नदियां दी हैं पर जल की इस थाती को सहेज न पाने के चलते यह क्षेत्र बाढ़ की विपदा झेलने को अभिशप्त है। साल के तीन माह तो कुछ क्षेत्रों के लोग विस्थापन की दारुण त्रासदी का सामना करते ही हैं। उद्योग धंधे यहां नदारद हैं। कृषि पर निर्भरता ज्यादा है लेकिन उपेक्षित क्षेत्र होने के कारण कृषि भी हाशिए पर ही है। रोजी रोजगार तो विकराल समस्या है ही। कनेक्टिविटी के लिहाज से यहां स्थितियां बेहतर तो हुई हैं लेकिन अभी चुनौतियां ढेर सारी हैं। जनता की अपने नेताओं से आम शिकायत है कि वे ताजपोशी के बाद उनकी सुधि लेने नहीं आते। हर चुनाव में यह उम्मीद फिर जिंदा हो उठती है कि शायद इस बार हालात बदलें। इस बार भी चुनाव में यह मुद़दा अहम रहा। भाजपा के कमलेश पासवान और सपा-बसपा गठबंधन के सदल ने अपनी-अपनी ओर से पूरा जोर लगाया। कामयाबी किए मिली आज पता लग जाएगा। जानते हैं बांसगांव की धरती की क्‍या है खासियत और इस बार कितनी दिलचस्‍प रही चुनावी जंग-

रहजन के हो गए कभी रहबर के हो गए।
अब राह चलने वाले मुकद्दर के हो गए।
दिल का कहा जो माने तो जाती है उसकी बात ।
हम क्या करें कि हम तो इसी भर के हो गए ।

जमील अहमद आजमी की ये पंक्तियां सियासी हालात और आम जन की बेबसीको बयां करने के लिए मौजूं हैं । दो जिलों में फैले बांसगांव संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन खारिज होने के बाद से भाजपा और गठबंधन के बीच सीधी टक्कर है। भाजपा ने दो बार लगातार विजयी रहे युवा सांसद कमलेश पासवान पर हेट्रिक के लिए दांव लगाया है। वहीं गठबंधन ने दो बार रनर रहे सदल प्रसाद पर फिर से भरोसा जताया है। सदल बसपा की ओर से गठबंधन से साझा उम्मीदवार हैं। इस संसदीय क्षेत्र में चुनावी शोर शराबा भले न दिखता हो मगर मतदाता बेबाकी से अपनी पक्षधरता साझा कर रहे हैं। यह पक्षधरता जातीय भूगोल में ज्यादा दिख रही है। साथ-साथ सुख-दुख साझा करने वालों के बीच भी पाले खिंच गए हैं। कहीं कहीं हंसी ठिठोली के बीच अपने पसंदीदा नेता के कसीदे काढ़े जा रहे हैं तो कहीं वाकयुद्ध जारी है। मुद्दों के प्रति संजीदगी बिसरा दी गई है।

चौरीचौरा विधानसभा क्षेत्र : हमने अपनी यात्रा की शुरुआत बांसगांव के ऐतिहासिक विधानसभा क्षेत्र चौरीचौरा से की। हमारी पहली मुलाकात जनरल मर्चेंट राजकुमार से हुई। चुनाव का मिजाज पूछते ही बोले- हम तो फूल वाले हैं। हमने जीतने के बाद यहां के सांसद की शक्ल तक नहीं देखी मगर हम तो मोदी के नाम पर वोट दे रहे हैं। कहते हैं क्या नहीं मिला ? पहले बिजली आती ही नहीं थी आज जाती ही नहीं है। सड़कें ठीक हो गईं। समस्या के नाम पर वे पानी की समस्या बताते हैं। चमड़ा मंडी में पानी की टंकी बन कर खड़ी है। चालू हो जाय तो शुद्ध पानी की समस्या दूर हो जाय।

चंद कदम दूर सड़क के किनारे खड़े छोटे लोडर चलाने वाले कुछ चालकों राजेश,अजय, शिवदान, रमेश, अनवर, नाजिर ने चुनाव का हाल पूछते ही समवेत स्वर में प्रत्याशी की जगह मोदी, योगी का नाम लिया। उनकी नजर में छोटे लोडरों से जिले की सीमा लांघते ही मनमाना शुल्क वसूली बड़ी परेशानी है। बताते हैं पीपीगंज में महाराज जी (योगी जी)ने खत्म करा दिया मगर कुछ जगह नगरपालिका के नाम पर हम छोटे लोडर चालकों से शुल्क लिए जा रहे हैं। पिपराइच में भी वसूली जारी है। इसी बीच दो चालकों ने नगर पंचायत गौरी बाजार और नगरपालिका परिषद देवरिया की पर्चियां दिखाईं। जहां पर कहीं 45 तो कहीं 65 रुपये का शुल्क प्रतिदिन लिया जा रहा है। सिटिंग सांसद के क्षेत्र में न आने की शिकायत यहां भी मिली। चौरीचौरा थाने से आगे चाय की दुकान में बहस छिड़ी थी। यहां मौजूदा सांसद के प्रति जबरदस्त गुस्सा था। सोहनलाल जायसवाल बोले यहां से तो भाजपा जा रही है। हमने दो बार सांसद रहे पासवान की जीतने के बाद शक्ल नहीं देखी। कहा इस क्षेत्र की असली नेता तो शारदा देवी  और बेचन राम (पूर्व एमएलए) थे। वे हफ्ते 15 दिन में क्षेत्र की जनता के बीच जरूर आते थे। हम मोदी के खिलाफ नहीं मगर इस बार सांसद को खामियाजा भुगतना पड़ेगा। शरीफ और सुभान अली भी उनसे सहमति जताते हैं। वहीं बैठे गेरुआधारी उदयी बोले थानों में तो लूट मची है। जो काम 500 में होता था उसके 5000 मांगे जा रहे हैं। राहुल गांधी के 72000 रुपये देने के वादे पर उदई  तल्ख हो गए। कहा- कब्बो दिहले बांट ? 40-50 साल उनही क खानदान सत्ता में रहल काहें न दे दिहलं, तब गरीबी नाहीं रहे?

रुद्रपुर विधानसभा क्षेत्र: संगम मोदनवाल की मिठाई की दुकान में हमारी मुलाकात गौनरिया, करौता के दिनेश पांडे, रतन शुक्ला, रामसुधारी पासवान से हुई। चुनाव का जिक्र होते ही एक स्वर में बोल पड़े- यहां तो मोदी का एक सिपाही भी आ जाय तो वोट उसी को देंगे। यहां मुद्दा क्या है इस सवाल पर कहते हैं झ्र हमारा तो एक ही मुद्दा है मोदी को किसी भी तरह से दुबारा देश का पीएम बनाओ। बस स्टैंड पर ताश खेल रही युवा मंडली में शामिल अजय गिरि, अरविंद गिरि, मुरली पाण्डेय, विजय पंकज कहते हैं- सांसद से तो हमारी बहुत नाराजगी है मगर हम मोदी के लिए वोट देंगे। मोदी ने पांच साल में देश का नाम रोशन किया है। कहते हैं - बस स्टैंड का बुरा हाल है, एक विधायक जयप्रकाश निषाद प्रदेश सरकार में मंत्री भी हैं मगर उन्होंने भी जीतने के बाद यहां की सुधि नहीं ली। मगर मोदी के लिए हम लोगों ने यह सब भुला दिया है। ताश खेलने वाली ही जमात में शामिल रितू, मुन्ना रामचक कहते हैं भाई हारे या जीते हम तो वोट बहन जी (मायावती) को ही देंगे। 

रुद्रपुर तहसील की कचहरी में वकील और मुवक्किलों की जमात के उमाशंकर त्रिपाठी, अजीत कुमार त्रिपाठी कहते हैं हम तो मोदी के आगे प्रत्याशी देख ही नहीं रहे हैं। मोदी जी ने रुद्रपुर में आकर क्षेत्र की जनता का मान बढ़ाया है अब हमारा फर्ज है कि उनके हाथों को मजबूत करें। इसी जमात में बैठे कबीर मंदिर के प्रमुख श्रवणदास कहते हैं यहां बीजेपी का प्रत्याशी मतलब आल आउट। हम तो मोदी के नाम पर सपोर्ट कर रहे हैं। ठेले पर गन्ने का रस बेच रहे युवक प्रमोद पटेल ने भी कहा मोदी की रुद्रपुर में सभा ने फिजां बदल दी है। 

भभौली चौराहा:  भभौली चौराहे पर हमारी मुलाकात नौजवानों की टोली अमित, भरत सिंह, प्रवीण शुक्ल और दिग्विजय यादव से हुई। वे एक दूसरे के प्रत्याशियों की खिंचाई कर रहे थे। दिग्विजय बोले यहां तो सदल का जोर हे। बाकी साथियों ने  कहा  हम प्रत्याशी को नहीं मोदी जी को वोट दे रहे हैं। मुद्दे के नाम पर उन लोगों ने सहजनवा दोहरीघाट रेल मार्ग को बड़ा मुद्दा बताया। कहा यह रेल मार्ग बन जाय तो रुद्रपुर की गुरबत दूर हो जाएगी।    रुद्रपुर बरहज मार्ग पर कोरवां गांव के जयनारायण शर्मा, रमेश यादव, लीलापत यादव, रामजी, भुलई, श्रीराम यादव, रामकेश यादव, धूपनारायण ने कहा कि यहां बहुत कांटे की टक्कर है।

बरहज विधानसभा क्षेत्र : इस क्षेत्र में भाजपा सांसद के गोद लिए गांव कपरवार में हम पहुंचे तो वहां समस्याओं का अंबार मिला। लोगों को वहां के विधायक सुरेश तिवारी से भी वही शिकायत है जो सांसद से है। अशोक सिंह कहते हैं गांव में कहने को 14 सफाई कर्मी हैं मगर सफाई का बुरा हाल है। नालियां चोक पड़ी हैं। नदी की कटान इतनी तेज है कि वह सड़क के एक तरफ (कुबाइच) के हिस्से को अपनी जद में ले रही है। बगल का ही गांव कूरह नदी की धारा में विलीन हो गया। लोग विस्थापन का दंश झेल रहे हैं। कपरवार के जवाहर, रामदयाल कहते हैं यहां बिजली, शौचालय सबको मिला है। बिजली भी खूब आ रही है।मुन्नीलाल, उमेश कहते हैं सासंद गांव नाम का है। यहां कोई फर्क नहीं पड़ा है।

चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र: यहां डेरवा चौराहे पर चाय की दुकान में बैठे संतराज साहनी, सुरेंद्र साहनी एक स्वर से भाजपा की तारीफ के पुल बांधते हैं। कहते हैं। योगी जी ने गुंडई खत्म कर दी। चौराहे पर जीना दूभर था। बिजली के लिए रामराज है। उन्हीं के बगल में बैठे बुजुर्ग माताबदल यादव कहते हैं भाई हम तो चाहे जीतें या हारें वोट अखिलेश को ही देंगे। बड़हलगंज चौराहे पर हमारी मुलाकात फूल की दुकान पर कुछ नौजवानों से हुई। बोले यहां हाथी का जोर है। दो बार हम भाजपा को जिता कर देख चुके हैं। कोई काम नहीं हुआ।

बांसगांव विधानसभा क्षेत्र : मझगंवा चौराहे पर  खड़े अजय साहनी, श्रवण कुमार बोले यहां तो मोदी लहर है। किसानों के खातों में दो दो हजार आ गए। बिजली भरपूर मिल रही है। हाइवे में जिनके दुकान मकान आए उन्हें भरपूर मुआवजा मिला। सड़कों का जाल बिछ गया है।  सब्जी खरीद रहे भूतपूर्व संस्कृत प्रवक्ता शंभु शरण शुक्ल कहते हैं- जीतेंद्रियो ही शक्नोति,वशे स्थापयितुम प्रजा (यानी जो जीते्द्रिरय है वही प्रजा की रक्षा कर सकता है ) वे योगी और मोदी को इसी श्रेणी में रखते हैं।

बाढ़ की वजह से विस्थापन की मजबूरी
रुद्रपुर विधानसभा क्षेत्र के गायघाट, करहकोल, पांडे माझा राजघर, नरायनपुर, शीतल माझा, माझा नरायन इन गांवों में बसने वाले करीब 50000 लोग बेघर हैं। कुछ बांधों और सड़कों पर एक दशक से ऊपर से शरण लिए हुए हैं तो कुछ ने जिला ही छोड़ दिया। अकेले रुद्रपुर क्षेत्र के 161 गांव हर साल बाढ़ से प्रभावित होते हैं। इनमें 52 गांव राप्ती गोर्रा के दोआबा के और 64 गांव कछार क्षेत्र के हैं। जिन गांवों का अस्तित्व समाप्त हो गया उनमें से कितने लोग भूमिहीन हो गए।जिनकी जमीन नदी के रास्ता बदलने के कारण दूसरे क्षेत्र में पडी वह विवादों में फंस गई है। मगर इतना बड़ा मुद्दा चुनाव में सिरे से गायब है।   

धुरियापार चीनी मिल
यह मिल सैकड़ों किसान परिवारों के रोजी रोटी का जरिया थी मगर अब बंद है। बीच में एक बार चली भी मगर सियासत के कारण फिर बंद हो गई। इसके चलते यहां गन्ने की कैश क्राप की खेती भी बंद हो गई। कृषि आधारित यहां की अर्थव्यवस्था में  चीनी मिल बहुत बड़ा रोजगार का साधन बनती मगर यह मुद्दा सिरे से गायब है। इसकी जगह यूपी सरकार ने एथनॉल प्लांट लागने की घोषणा की है मगर अभी यह योजना जमीन पर नहीं उतर पाई है।

सहजनवा दोहरीघाट रेललाइन
यहां रेल लाइन का मुद्दा भी अरसे से उठ रहा है लेकिन अभी तक वह कोई ठोस आकार नहीं ले पाया है।बजट में इसे सैद्धांतिक मंजूरी तो मिली है मगर वित्तीय मंजूरी अभी मीलों दूर है। इस रेल मार्ग से जहां कनेक्टिविटी बढ़ जाएगी वहीं रोजगार के अनेक अवसर भी विकसित होंगे पर चुनाव में यह मुद्दा भी चर्चा का विषय नहीं है।

अलग जिला बनाने की मांग
बांस गांव का बढता दायरा देखते हुए इस क्षेत्र को अलग जिला बनाने की मांग भी अब उठने लगी है। पर यह मुद्दा अभी आंदोलन का रूप नहीं ले पाया है। पर कालांतर में इसके जोर पकड़ने की संभावना है।    

बथुआ नदी का पुल बड़ा मुद्दा
बथुआ नदी पर पुल का बड़ा मुद्दा बताया जा रहा है। आजादी के बाद से इस नदी पर पुल बनाने की मांग हो रही है। खेती के सिलसिले में आने जाने के क्रम मे हर साल डूबने से कोई न कोई मौत होती है। यह पुल बन जाय तो पच्चीसों गांव जुड़ जाएंगे और यह रुद्रपुर बाईपास का भी काम करेगा। 

कुल मतदाता 1734707
पुरुष 947642
महिला 787065
चुनाव 19 मई को

2014 का रिजल्‍ट
कमलेश पासवान भाजपा 417959 
सदल प्रसाद बसपा 228443
गोरख प्रसाद सपा 133675
संजय कुमार कांग्रेस 50675

अब तक सांसद 
1962 महादेव प्रसाद कांग्रेस
1967 मोलहू प्रसाद संयुक्‍त सोशलिस्‍ट पार्टी 
1971 रामसूरत प्रसाद कांग्रेस
1977 विशारद फिरंगी प्रसाद भारतीय लोकदल
1980 महावीर प्रसाद कांग्रेस 
1984 महावीर प्रसाद कांग्रेस 
1989 महावीर प्रसाद कांग्रेस 
1991 राजनारायण पासी भाजपा 
1996 सुभावती पासवान सपा
1998 राजनारायण पासी भाजपा
1999 राजनारायण पासी भाजपा
2004 महावीर प्रसाद कांग्रेस
2009 कमलेश पासवान भाजपा
2014 कमलेश पासवान भाजपा 

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