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इंतजार कब तक? बिक्रम में ट्रॉमा सेंटर 17 साल बाद भी शुरू नहीं

बिक्रम स्थित राज्य का एकमात्र ट्रॉमा सेंटर 17 साल बाद भी शुरू नहीं हुआ। पिछले वर्ष मई में इसे आधुनिक रूप से विकसित करने की कवायद शुरू हुई थी लेकिन वो भी कागज पर ही रहा।  

बिक्रम प्रखंड में एनएच के किनारे कुछ दूरी पर ट्रॉमा सेंटर खोलने का निर्णय 2002 में तत्कालीन एनडीए की सरकार में लिया गया था। उस समय देशभर में छह ट्रॉमा सेंटर खोले जाने थे, जिनमें से एक बिक्रम का था। यहां पर ट्रॉमा सेंटर लाने में मौजूदा सांसद डॉ. सीपी ठाकुर का अहम योगदान था लेकिन यह ट्रॉमा सेंटर आज भी विधिवत शुरू होने के इंतजार में है। अगर यह सेंटर शुरू हो गया होता तो गया, जहानाबाद, पटना और आरा जिले के लोगों को काफी लाभ होता। 

ट्रॉमा सेंटर को तत्काल शुरू करने की कवायद पिछले वर्ष 2018 में की गई थी। स्वास्थ्य विभाग ने इसे आईजीआईएमएस को हैंडओवर करने का निर्णय किया था। इसके लिए एनओसी भी दिया था लेकिन बात वहीं की वहीं रह गई। ट्रॉमा सेंटर के स्थानांतरण के संबंध में विभाग ने आईजीआईएमएस से टेक्निकल फिजिबिलिटी एसेसमेंट और प्रोजेक्ट रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा था। संस्थान ने रिपोर्ट भी दी लेकिन बिक्रम में अतिरिक्त जमीन हस्तांतरण की जरूरत पड़ी तो उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। आईजीआईएमएस द्वारा बिक्रम ट्रॉमा सेंटर को संस्थान से टैग करने का अनुरोध विभाग से किया गया था। स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए सैद्धांतिक सहमति भी दे दी थी। 

दिल्ली एम्स-आईजीआईएमएस की टीम कर चुकी है निरीक्षण
दिल्ली एम्स की ट्रांसप्लांट यूनिट के हेड डॉ.वी शिनु समेत आईजीआईएमएस की टीम अब तक तीन बार ट्रॉमा सेंटर का निरीक्षण कर चुकी है। टीम ने यह निर्णय लिया था कि मौजूदा ट्रॉमा सेंटर को तत्काल शुरू किया जा सकता है। इसके लिए आईजीआईएमएस ने दो प्रस्ताव तैयार किये थे। पहला प्रस्ताव तत्काल शुरू करने के लिए था, जिसमें छह बेड की आईसीयू और 50 सपोर्टिव बेड होता। इसमें करीब 25 करोड़ रुपये की लागत आती। वहीं दूसरे प्रस्ताव के तहत नए लुक में 200 बेड का सुपर स्पेशियलिटी ट्रॉमा सह हॉस्पिटल होता। इसे तैयार करने में करीब 100 करोड़ रुपये की लागत आती।

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  • Web Title:Trauma center in Bikram does not start even after 17 years