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नवीन पटनायक के लिए आसान नहीं होगा इस बार का लोकसभा चुनाव, जानें क्यों

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Lok Sabha Elections 2019: ओडिशा के मुख्यमंत्री और बीजू जनता दल के अध्यक्ष नवीन पटनायक की राजनीति में बेहद साफ छवि रही है। लेखन में गहरी रुचि रखने वाले पटनायक ने अपना युवाकाल राजनीति और ओडिशा से लगभग दूर ही बिताया। पिता की मौत के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और पार्टी की बागडोर संभाली। हिंजिली सीट से वर्ष 2000 से वह रिकॉर्ड चार बार मुख्यमंत्री रहे हैं।

इस बार ओडिशा में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एकसाथ हो रहे हैं। विधानसभा चुनाव में जीत के साथ-साथ लोकसभा चुनाव परिणामों को लेकर अनिश्चितता के बीच सभी की निगाहें बीजेडी के रुख पर टिकी हैं। किसी दल या गठबंधन को पूर्ण बहुमत न मिलने पर 21 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ रही पटनायक की पार्टी की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। 2014 में बीजेडी को 20, भाजपा को सिर्फ 1 सीट मिली थी।

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भाजपा-कांग्रेस ने जोर लगाया: इस बार पटनायक को भाजपा-कांग्रेस से टक्कर मिलने के आसार हैं। भाजपा बीजेडी की सत्ता में सेंध लगाने की तैयारी में है। संभव है कि वह किसी बड़े चेहरे के साथ मैदान में उतरे। अटकलें हैं कि पुरी सीट से नरेंद्र मोदी के नाम का ऐलान कर पार्टी मतदाताओं को ध्रुवीकरण की बड़ी वजह दे सकती है। इसके अलावा भाजपा गांवों और खासकर आदिवासियों पर ध्यान दे रही है। वहीं कांग्रेस एंटी इन्कम्बेंसी को हवा देने में जुटी है।

सभी पार्टियों से बेहतर संबंध
चुनाव बाद की स्थिति के अनुसार, पटनायक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा या कांग्रेस किसी के भी साथ जा सकते हैं। चाहे नोटबंदी हो या जीएसटी, मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास मत का मुद्दा हो या असम में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर का मुद्दा, बीजेडी ने मुश्किल घड़ी में हमेशा मोदी सरकार का साथ दिया है। ठीक उसी तरह 2004 से 2014 तक यूपीए सरकार के साथ भी उनके मधुर संबंध थे।

पिता का सपना पूरा किया
नवीन पटनायक ने ‘भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई' और ‘गरीब समर्थक नीतियां' लागू कर राज्य में अलग पहचान बनाई। नौकरशाही का बेहतर प्रबंधन कर पिता के विकसित राज्य के सपने को अपने विकास का आधार बनाया। 

आम आदमी के साथ वाली छवि
ओडिशा में नवीन पटनायक की छवि आम आदमी के हित वाली रही है। उन्होंने केंद्र की आयुष्मान योजना से पहले स्वास्थ्य क्षेत्र में ‘बीजू स्वास्थ्य कल्याण योजना ओडिशा' की शुरुआत की।

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नवीन पटनायक- निजी जीवन

  • 1946 में ओडिशा के कटक नगर में जन्म, स्नातक की पढ़ाई दिल्ली विश्वविद्यालय से
  • कला, पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर लेखन में खास दिलचस्पी रखते हैं
  • पर्यावरण से जुड़ी तीन किताबें हो चुकी हैं प्रकाशित

राजनीतिक जीवन

  • 1997 में पिता बीजू पटनायक के निधन के बाद राजनीति शुरु की
  • 1997 में आस्का लोकसभा सीट से उपचुनाव जीते, जनता दल में बंटवारे के बाद बीजू जनता दल का गठन
  • 2000 में भाजपा के साथ गठबंधन कर पहली बार मुख्यमंत्री बने
  • 2004, 2009 और 2014 में भी जीते
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