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लोकसभा चुनाव 2019: तीसरे चरण का रण समाजवादी पार्टी के गढ़ में

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उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी का गढ़ कहे जाने वाले दस संसदीय क्षेत्रों में तीसरे चरण का मतदान 23 अप्रैल को होने जा रहा है। सपा इन सीटों से किस कदर आशान्वित है इसका प्रमाण बसपा से समझौते में दस में से नौ सीटें सपा के खाते में जाना है। महज एक सीट बसपा के पास है। कुल मिलाकर इस चरण में सपा के सामने करो या मरो की स्थिति हैं, वहीं भाजपा यहां पर 2014 से भी बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश में है।

अंतिम दौर में दलों और प्रत्याशियों ने अपना पूरा दमखम प्रचार में झोक रखा है। 25 साल बाद पहली बार ऐसा हुआ कि इस चरण में शामिल मैनपुरी में मुलायम सिंह यादव और मायावती एक मंच पर नजर आएं। इस क्षेत्र को सपा का गढ़ कहने का प्रमुख कारण यह है कि 2014 में सपा ने जो पांच सीटें जीती थीं उनमें से तीन सीटों पर मतदान इसी चरण में होना है। 2014 में मैनपुरी से सपा प्रत्याशी तेज प्रताप सिंह यादव, बदायूं से धर्मेंद्र यादव और फिरोजाबाद से अक्षय यादव सांसद चुने गए थे। इस चरण की शेष सभी सीटों पर 2014 में भाजपा ने जीत दर्ज की थी। इस लिहाज से भाजपा भी पूरे दमखम के साथ इस चरण को अपना बनाने में जुटी है।

ये दस संसदीय क्षेत्र हैं इस चरण में शामिल
तीसरे चरण की संसदीय क्षेत्रों में मुरादाबाद, रामपुर, संभल, फिरोजाबाद, मैनपुरी, एटा, बदायूं, आंवला, बरेली और पीलीभीत शामिल हैं। रामपुर, फिरोजाबाद, मैनपुरी, एटा और बदायूं को सपा का मजबूत गढ़ माना जाता है।

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मैनपुरी में मुलायम को दिखानी पड़ रही है महारथ
मुलायम परिवार के गांव सैफई को समेटे मैनपुरी संसदीय क्षेत्र सपा का गढ़ कहा जाता है। 1996 से ही इस सीट पर सपा का कब्जा है। अब तक तीन बार मुलायम सिंह यादव जीते हैं जबकि उनके सीट छोड़ने पर एक बार धर्मेंद्र यादव और 2014 में तेज प्रताप यादव ने सपा से जीत हासिल की थी। इस बार फिर से इस सीट से मुलायम सिंह यादव चुनाव मैदान में हैं, उनका सामना भाजपा प्रत्याशी प्रेम सिंह शाक्य से होना है। भाजपा इस सीट के चुनाव में मुलायम सिंह यादव के सामने कड़ी चुनौती पेश करने की कोशिश में है। मैनपुरी के चुनाव को सपा किस कदर अहमियत देती है इसका प्रमाण यहां पर एक मंच पर मुलायम, मायावती का आना रहा है।

बदायूं में धर्मेंद्र के सामने संघमित्रा
बदायूं संसदीय सीट पर भी 1996 से अब तक सपा का ही कब्जा है। इस सीट से पहली बार 2009 में सैफई परिवार से धर्मेंद्र यादव ने यह सीट जीती।  2009 के बाद 2014 में भी धर्मेंद्र यादव इस सीट से चुनाव जीते। धर्मेंद्र इस बार भी यहां से सपा के प्रत्याशी हैं। इनका मुकाबला यहां भाजपा प्रत्याशी संघमित्रा मौर्य से है। संघमित्रा प्रदेश सरकार में मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी हैं। वहीं कांग्रेस ने यहां से पुराने नेता सलीम इकबाल शेरवानी को मैदान में उतारकर मुकाबले को त्रिकोणीय करने की कोशिश की है।

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फिरोजाबाद से अक्षय के सामने दोहरी चुनौती
सुहागनगरी फिरोजाबाद भी मुलायम परिवार का मजबूत गढ़ माना जाता है। 2009 में अखिलेश यादव यहां से सांसद चुने गए थे। 2014 में यहां से सांसद चुने अक्षय यादव फिर यहां से प्रत्याशी हैं। इस बार इनके सामने इस सीट को बचाने की दोहरी चुनौती है। चाचा शिवपाल सिंह यादव अपनी पार्टी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी से यहीं से प्रत्याशी हैं तो भाजपा ने चंद्रसेन जादौन को प्रत्याशी बनाया है।

रामपुर में आजम के सामने हैं जया प्रदा
आजम खां की वजह से रामपुर को भी समाजवादी पार्टी के गढ़ के रूप में माना जाता है। यहां का चुनाव बयानबाजी के कारण राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में है। आजम खां सपा प्रत्याशी हैं तो उनके सामने इस बार भाजपा ने अभिनेत्री व दो यहां से दो बार सांसद रहीं जया प्रदा को चुनाव मैदान में उतार दिया है। कांग्रेस से यहां संजय कपूर चुनाव मैदान में हैं।

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पांच सीटों से भी सपा को है काफी उम्मीदें
तीसरे चरण की इन दस संसदीय क्षेत्रों में सपा की मजबूती का आंकलन इसी से किया जा सकता है कि दस में से नौ सीटें गठबंधन में सपा के खाते में आई हैं। सपा ने एटा से देवेंद्र यादव, मुरादाबाद से एसटी हसन, बरेली से भगवत शरण गंगवार, पीलीभीत से हेमराज वर्मा, संभल से शफीकुर्रहमान बर्क को प्रत्याशी बनाया है। इस चरण की महज एक सीट आंवला गठबंधन के तहत बसपा को मिली है। बसपा ने यहां से रूचि वीरा को प्रत्याशी बनाया है।

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  • Web Title:Third phase elections on Samajwadi Party stronghold seats