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बड़ा फैसला: सोशल मीडिया पर मतदान से 48 घंटे पहले चुनाव बंद होगा प्रचार

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फेसबुक, ट्विटर और व्हाट्सएप समेत प्रमुख सोशल मीडिया मंचों पर मतदान से 48 घंटे पहले कोई राजनीतिक प्रचार-प्रसार की अनुमति नहीं होगी। सोशल मीडिया मंचों द्वारा स्वेच्छा से तैयार आचार संहिता के तहत यह निर्णय किया गया है।

इन मंचों ने बुधवार को इस तरह की आचार संहिता को चुनाव आयोग को सौंपा। चुनाव आयोग ने एक बयान में कहा, ‘इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईएएमएआई) और फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्विटर, गूगल, शेयर चैट तथा टिक टाक आदि समेत सोशल मीडिया कंपनियों के साथ मंगलवार की बैठक के बाद आचार संहिता तैयार की गई है। ये मंच सिन्हा समिति की सिफारिशों के तहत तीन घंटे के भीतर जन प्रतिनिधित्व कानून, 1951 की धारा 126 के तहत किसी भी नियम के उल्लंघन को लेकर कदम उठाएंगे।

इस कंपनियों ने माना कि उनके मंच पर उपयोगकर्ताओं को ऐसी सामग्री पोस्ट करने की अनुमति होती है जिसका वह उपयोगकर्ता न तो लेखक हैं और न ही प्रकाशक। हालांकि, इन मंचों ने सामान्य चुनाव 2019 (संहिता) के लिए इस ‘स्वैच्छिक आचार संहिता’ को विकसित किया है और चुनावी प्रक्रिया की अखंडता और पारदर्शिता में सुधार करके ऐसी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

संहिता का उद्देश्य
इस स्वैच्छिक संहिता का उद्देश्य उन उपायों की पहचान करना है जो उपयोगकर्ताओं को चुनावी प्रक्रिया में विश्वास बढ़ा सकते हैं। यह आगामी आम चुनावों के स्वतंत्र और निष्पक्ष होने और इन संचार माध्यमों का किसी भी तरह के दुरुपयोग को रोकने में मदद करेगा।  

वादा-

  • ये कंपनियां 2019 के आम चुनावों के दौरान निम्नलिखित प्रतिबद्धताओं को विश्वास और अपनी क्षमता के अनुसार पूरा करने का प्रयास करेंगी। 
  • ये कंपनियां उपयुक्त और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए चुनावी मामलों के बारे में अपने मंचों पर नीतियों और प्रक्रियाओं के बारे में समुचित जानकारी उपलब्ध कराएगी।
  • उपयोगकर्ताओं को चुनावी कानूनों और अन्य संबंधित निर्देशों सहित जागरूक करने के लिए स्वेच्छा से सूचना, शिक्षा और संचार अभियान शुरू करेगी। प्लेटफॉर्म और मंचों को चुनाव आयोग के नोडल अधिकारी से प्रशिक्षण दिलाने का भी प्रयास किया जाएगा, जिसमें कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार अनुरोध भेजने की जानकारी हो। 
  • ये कंपनियां और चुनाव आयोग एक नोटिफिकेशन तंत्र विकसित करेंगे जिसके माध्यम से आयोग जन प्रतिनिधित्व कानून- 1951 की धारा 126 और अन्य चुनावी नियमों का उल्लंघन करनेवाले संबंधित मंचों को आदेश जारी कर सके। ये आदेश उल्लंघन की जानकारी मिलने के तीन घंटे के अंदर  आ जाएंगे और उनका अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा। कानून की धारा 126 चुनाव के दिन से 48 घंटे पहले किसी भी प्रकार के प्रचार-प्रसार पर रोक लगाती है।
  • चुनाव आयोग के लिए ये कंपनियां उच्च प्राथमिकता वाले समर्पित रिपोर्टिंग तंत्र विकसित कर रहे हैं और चुनावों के दौरान इस तरह के आदेश प्राप्त होने पर त्वरित कार्रवाई करने के लिए अधिकारी नियुक्त करेंगे।  
  • सोशल मीडिया कंपनियों और मंचों को कानून के तहत अपने दायित्वों के अनुसार, राजनीतिक विज्ञापनदाताओं के लिए एक तंत्र विकसित करना होगा, जो चुनाव आयोग के विज्ञापन और/या मीडिया प्रमाणन और निगरानी समिति द्वारा चुनाव विज्ञापनों के संबंध में कानून सम्मत नियम जारी करेगा। इसके अलावा, इन कंपनियों को आयोग द्वारा गैर प्रमाणित और गैर अधिसूचित विज्ञापनों पर शीघ्रता से कार्रवाई करना होगा।
  • कंपनियों को राजनीतिक विज्ञापनों से मिले भुगतान के बारे में पूरी पारदर्शिता रखनी होगी। ऐसे विज्ञापनों के लिए उनके पहले से मौजूद लेबल तकनीक का उपयोग करना होगा। 
  • ये कंपनियां इंटरनेट और मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के माध्यम से चुनाव आयोग से मिले निर्देशों-आदेशों के अनुसार, उनके संबंधित प्लेटफार्मों के दुरुपयोग को रोकने के लिए उनके द्वारा किए गए उपायों पर अपडेट प्रदान करेगी।
  • इंटरनेट और मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया इस कोड के तहत इन कंपनियों के साथ समन्वय करेगा और चुनाव अवधि के दौरान आयोग के साथ निरंतर संचार में रहेंगे।

यह संहिता बुधवार से लागू हो गई है और पूरे चुनाव प्रक्रिया तक प्रभावी रहेगी। 

संहिता तैयार करना एक अच्छी शुरुआत है। संबंधित कंपनियों को आचार संहिता में जताई गई प्रतिबद्धता का अक्षरश: पालन करने की आवश्यकता है। आईएएमएआई सोशल मीडिया तथा आयोग के बीच संपर्क स्थापित करने का काम करेगा। साथ ही सोशल मीडिया कंपनियां नोडल अधिकारी की प्रचार सामग्री के बारे में दी गई रिपोर्ट पर कानून के अनुसार कार्रवाई करेंगी।- सुनील अरोड़ा, मुख्य चुनाव आयुक्त

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  • Web Title:The election campaign will be stopped 48 hours before voting on social media